वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में गोलीबारी: अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में स्थित ओल्ड डोमिनियन विश्वविद्यालय में गुरुवार 12 मार्च को गोलीबारी की घटना सामने आई।
यह घटना विश्वविद्यालय के व्यापार अध्ययन भवन में हुई,
जहां पढ़ाई के दौरान एक व्यक्ति अचानक कक्षा में घुस आया और गोली चलानी शुरू कर दी। हमलावर की पहचान मोहम्मद बैलोर जल्लोह के रूप में हुई है।
बताया गया कि उसने कक्षा में प्रवेश करते ही “अल्लाहू अकबर” चिल्लाया और इसके बाद अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हो गए। हालांकि वहां मौजूद छात्रों की बहादुरी के कारण हमलावर को जल्दी ही रोक दिया गया और बड़ा नुकसान होने से बच गया।
क्लॉस में मची अफरा-तफरी
घटना के समय कक्षा में सेना के अधिकारी बनने की तैयारी करने वाले छात्रों का प्रशिक्षण चल रहा था।
यह कार्यक्रम उन विद्यार्थियों के लिए होता है जो कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ सेना में अधिकारी बनने की तैयारी करते हैं।
जब जल्लोह ने गोली चलानी शुरू की तो कक्षा में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन कुछ छात्रों ने घबराने के बजाय हिम्मत दिखाई और हमलावर का सामना करने का फैसला किया।
उन्होंने मिलकर जल्लोह को काबू में करने की कोशिश की। इसी दौरान एक छात्र ने आत्मरक्षा में चाकू से हमला कर दिया, जिससे हमलावर की मौत हो गई।
पूर्व सैनिक ने किया हमला
घटना की जांच कर रही संघीय जांच एजेंसी ने बताया कि हमलावर 36 वर्षीय पूर्व सैनिक था और पहले वर्जीनिया की नेशनल गार्ड में सेवा कर चुका था।
अधिकारियों के अनुसार उसे वर्ष 2016 में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट को मदद करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था।
हालांकि बाद में उसे समय से पहले रिहा कर दिया गया था और वह निगरानी के तहत बाहर रह रहा था।
जांच अधिकारियों ने बताया कि छात्रों ने बेहद साहस और समझदारी दिखाई।
उनके मुताबिक यदि छात्रों ने तुरंत कार्रवाई नहीं की होती तो इस घटना में और अधिक लोगों की जान जा सकती थी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हमलावर को गोली नहीं लगी थी, बल्कि छात्रों ने आत्मरक्षा में चाकुओं से हमला करके उसे रोका।
विश्वविद्यालय में सैन्य प्रशिक्षण
इस हमले में जिस व्यक्ति की मौत हुई, उसकी पहचान लेफ्टिनेंट कर्नल ब्रैंडन शाह के रूप में हुई है।
वह विश्वविद्यालय में सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रशिक्षक थे और छात्रों को सेना में अधिकारी बनने के लिए तैयार कर रहे थे।
वर्जीनिया की राज्यपाल एबिगेल स्पैनबर्गर ने उन्हें सच्चा देशभक्त बताया और कहा कि उन्होंने न केवल अपने देश की सेवा की, बल्कि युवाओं को भी देश सेवा के लिए प्रेरित किया।
इस घटना में दो छात्र घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों छात्र भी सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़े हुए थे।
अधिकारियों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
आतंकवादी हमले के रूप में हो रही जांच
जांच एजेंसी के प्रमुख काश पटेल ने सामाजिक माध्यम पर लिखा कि इस घटना की जांच आतंकवादी हमले के रूप में की जा रही है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जल्लोह वर्ष 2009 में हुए फोर्ट हूड हमले जैसी घटना को दोहराना चाहता था। वह मूल रूप से सिएरा लियोन का रहने वाला था और बाद में अमेरिकी नागरिक बन गया था।
वर्ष 2009 से 2015 तक उसने नेशनल गार्ड में सेवा की थी और सम्मान के साथ सेवा से मुक्त हुआ था। बाद में कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित होकर वह चरमपंथ की ओर झुक गया।
विश्वविद्यालय पुलिस प्रमुख गैरेट शेल्टन के अनुसार घटना की सूचना मिलने के करीब दस मिनट के भीतर ही पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंच गए थे।
जब अधिकारी पहुंचे तब तक हमलावर मृत पाया गया था। फिलहाल उसकी मौत के सही कारण की जांच जारी है।

