Wednesday, February 11, 2026

मिर्जापुर में देवी-देवताओं का अपमान करने वाली गायिका सरोज सरगम गिरफ्तार

सरोज सरगम

वीडियो में मां दुर्गा के लिए अपमानजनक शब्द, थंबनेल पर भी गाली लिखने का आरोप

मिर्जापुर जिले के मड़िहान क्षेत्र की रहने वाली बिरहा गायिका सरोज सरगम को पुलिस ने 23 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया।

सरोज ने अपने यूट्यूब चैनल पर 19 सितंबर को नवरात्रि शुरू होने से ठीक पहले एक वीडियो अपलोड किया था।

आरोप है कि इस वीडियो में देवी दुर्गा के प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया और थंबनेल पर भी अशोभनीय भाषा लिखी गई।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, आठ एफआईआर दर्ज

वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद हिन्दू समाज, विश्व हिन्दू परिषद और भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया।

विभिन्न थानों में कुल आठ अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू की।

पति-पत्नी दोनों आरोपी, वीडियो का निर्माता-निर्देशक पति राममिलन बिंद

पुलिस जांच में सामने आया कि सरोज सरगम के इस वीडियो का निर्माण और निर्देशन उसके पति राममिलन बिंद ने किया था।

सरोज बतौर गायिका वीडियो में शामिल थी। 23 सितंबर को पुलिस ने दोनों को दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया।

अवैध कब्ज़े का भी खुलासा, प्रशासन ने जमीन मुक्त कराई

पुलिस जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ। सरोज सरगम ने वन विभाग की लगभग 15 बीघा जमीन पर अवैध कब्ज़ा कर रखा था।

प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस जमीन को कब्ज़ा मुक्त कराया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे और तथ्य सामने आ सकते हैं।

पहचान छिपाने के लिए पहनती थी बुर्का

पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी के वक्त सरोज सरगम बुर्के में मिली। बताया जा रहा है कि वह अपनी पहचान छिपाने के लिए अकसर बुर्के का इस्तेमाल करती थी।

समाज में आक्रोश, कानून पर भरोसा

देवी-देवताओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी को लेकर हिन्दू समाज में गहरा आक्रोश है। विश्व हिन्दू परिषद और भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, स्थानीय लोग कह रहे हैं कि आस्था को ठेस पहुँचाने वाली ऐसी गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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Samudra
Samudra
लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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