Saturday, March 7, 2026

सरगुजा में कट्टरपंथियों का ख़ौफ, राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र ‘पंडो जनजाति’ अपनी ही ज़मीन से बेघर

सरगुजा में कट्टरपंथियों का ख़ौफ: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने आदिवासी हितों और उनकी सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिले के लखनपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मांजा के राजाकटेल मोहल्ले में रहने वाली विशेष संरक्षित पंडो जनजाति (PVTG Pando Tribe Chhattisgarh) के ग्रामीणों ने अपनी ही पुश्तैनी ज़मीन पर अवैध कब्जे का बड़ा आरोप लगाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी लगभग 50 एकड़ जमीन पर मज़हबियों ने छल और बल के दम पर कब्जा कर लिया है।

छल-कपट और दस्तावेजों का खेल

पंडो जनजाति, जिन्हें राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कहा जाता है, आज अपनी ही जमीन से बेदखल होने की कगार पर हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि वे पीढ़ियों से इस जमीन पर रह रहे थे और खेती-बाड़ी कर अपना जीवन यापन कर रहे थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां सोची-समझी रणनीति के तहत कट्टरपंथियों का दखल बढ़ गया है।

आरोप के मुताबिक, जमील अहमद, शकील अहमद, समीम, गुलबहार अहमद समेत कई अन्य लोगों ने पंडो समाज की सरलता और अज्ञानता का फायदा उठाया।

ग्रामीणों का कहना है कि उनसे सादे कागजों और सरकारी दस्तावेजों पर धोखे से अंगूठे लगवा लिए गए और उनकी कीमती जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया गया।

धीरे-धीरे यहां उनके रिश्तेदारों को बसाया गया और आज स्थिति यह है कि वहां 80 से 90 परिवार अवैध रूप से काबिज हो चुके हैं।

धमकी और खौफ के साये में ग्रामीण | Tribal Land Rights Chhattisgarh

सरगुजा में कट्टरपंथियों का ख़ौफ: बताया जा रहा है कि पंडो ग्रामीणों का दर्द केवल जमीन खोने तक सीमित नहीं है। जब भी वे अपनी जमीन वापस मांगने या अवैध निर्माण का विरोध करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं।

ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक (SP) को सौंपे अपने आवेदन में स्पष्ट रूप से नसीम, खुर्शीद, कबीर, असलम, मोहम्मद जमील, बाबर और मोहताब जैसे नामों का उल्लेख करते हुए प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

आदिवासियों का कहना है कि वे अपने ही घर में डर-डर कर जीने को मजबूर हैं।

धारा 170-बी के तहत कार्रवाई शुरू | Section 170-B Land Case

सूत्रों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासन हरकत में आया है।

उदयपुर SDM न्यायालय में छत्तीसगढ़ भूमि राजस्व संहिता की धारा 170-बी के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धारा 170-बी कानून विशेष रूप से आदिवासियों की भूमि की रक्षा के लिए बनाया गया है।

इसके तहत यदि किसी गैर-आदिवासी ने धोखाधड़ी या अवैध तरीके से किसी आदिवासी की जमीन हड़पी है, तो प्रशासन को उस जमीन को वापस मूल मालिक को दिलाने का अधिकार है।

प्रशासन ने वर्तमान में कब्जाधारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गई है।

संरक्षित जनजातियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

लोगों का कहना है कि पंडो जनजाति छत्तीसगढ़ की उन विशेष पिछड़ी जनजातियों में से एक है जिनके संरक्षण की जिम्मेदारी सीधे तौर पर सरकार की होती है।

यदि इतनी बड़ी मात्रा में (50 एकड़) जमीन पर अवैध कब्जा हो जाता है, तो यह स्थानीय राजस्व विभाग और पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाता है।

ग्रामीणों की मांग स्पष्ट है कि उनकी जमीन से अवैध कब्जा हटाया जाए, दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज हो और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।

सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि राजाकटेल का यह मामला केवल एक भूमि विवाद नहीं है, बल्कि एक पूरी जनजाति के अस्तित्व और उनके अधिकारों के हनन की कहानी है।

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