Sambhal: संभल में आये दिन हिन्दुओं की गाढ़ी विरासत के निशान मिलते रहते हैं। ऐसे में संभल में जो हिन्दुओं का नरसंघार हुआ वो अब किसी से छुपा नहीं है। योगी सरकार वहां हिंदू विरासत को पुनः स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इस ही क्रम में अब संभल में हर साल आयोजित होने वाले नेजा मेले पर भी इस बार रोक लगा दी गई है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि आक्रांता सैयद सालार मसूद गाज़ी के नाम पर किसी भी प्रकार का कोई आयोजन नहीं होगा। ASP श्रीश चंद्र ने कहा कि यदि कोई कुप्रथा वर्षों से चली आ रही है तो उसे बदलना अब आवश्यक है।
हिन्दुओं का हत्यारा था सालार मसूद गाजी?
Sambhal: सैयद सालार मसूद गाजी को इतिहास में एक क्रूर आक्रमणकारी के रूप में जाना जाता है। वह महमूद गजनवी का भांजा और सेनापति था, जिसने भारत पर कई हमले किए। उसका मुख्य उद्देश्य लूटपाट और इस्लामिक शासन स्थापित करना था। हिंदुओं के प्रति नफरत और इस्लाम के प्रति अपने प्रेम के चलते सैयाद सालार ने कई बार हिंदुओं का नरसंघार किया था।
सोमनाथ मंदिर पर हमला और हिंदुओं का नरसंहार
Sambhal: महमूद गजनवी के सेनापति के रूप में सालार मसूद गाजी ने सोमनाथ मंदिर को लूटने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, उसने उत्तर भारत में कई हिंदू मंदिरों को ध्वस्त किया और बड़े पैमाने पर हिंदुओं का नरसंहार किया।
राजा सुहेलदेव ने किया था वध
सालार मसूद गाजी को श्रावस्ती के पराक्रमी राजा सुहेलदेव ने युद्ध में परास्त कर मार गिराया था। ये युद्ध इस्लाम के अंत में एक बड़ी भूमिका निभाने वाला माना जाता है। हिंदुओं के नरसंघार को रोकने में इस युद्ध ने अहम भूलिका निभाई थी।
संभल प्रशासन की सख्ती
Sambhal: संभल में हर साल सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर नेजा मेले का आयोजन किया जाता था। लेकिन प्रशासन ने इस बार इसको लेकर सख्त रुख अपनाया है। संभल ASPश्रीश चंद्र ने कहा कि भारत में क्रूरता फैलाने वाले किसी भी लुटेरे की याद में आयोजन नहीं होने दिया जाएगा।]
उनके अनुसार, “कोई परंपरा यदि सालों से चली आ रही है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह सही हो। इसे बदलने की जरूरत है।” प्रशासन की इस सख्ती के बाद हिंदू संगठनों ने इसे सही कदम बताया है।