बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी प्रमुख बेगम खालिदा जिया का आज, 31 दिसंबर 2025 को ढाका में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उनके निधन पर न केवल बांग्लादेश बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शोक व्यक्त किया जा रहा है।
इसी क्रम में भारत की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ढाका पहुंचे और अंतिम संस्कार में शामिल होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
जयशंकर ने तारिक रहमान को सौंपी पीएम मोदी की चिट्ठी
बांग्लादेश: ढाका पहुंचने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी सुप्रीमो तारिक रहमान से मुलाकात की।
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भेजा गया शोक पत्र तारिक रहमान को सौंपा।
यह संदेश भारत सरकार और भारतीय जनता की ओर से संवेदना और सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।
भारत ने खालिदा जिया के लोकतांत्रिक योगदान को किया स्वीकार
बांग्लादेश: भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हामिदुल्लाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि डॉ. जयशंकर ने भारत सरकार और जनता की ओर से खालिदा जिया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।
साथ ही बांग्लादेश के लोकतांत्रिक इतिहास में उनके योगदान को भी स्वीकार किया गया।
शेख हसीना के सत्ता छोड़ने के बाद पहला दौरा
बांग्लादेश: गौरतलब है कि शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद यह डॉ. एस. जयशंकर का पहला बांग्लादेश दौरा है।
ऐसे समय में यह यात्रा और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
जयशंकर की यह मौजूदगी कूटनीतिक संकेतों के लिहाज़ से अहम मानी जा रही है।
तारिक रहमान से हैंडशेक बना चर्चा का विषय
बांग्लादेश: जयशंकर और तारिक रहमान की मुलाकात के दौरान दोनों के बीच हैंडशेक भी हुआ, जिसकी तस्वीरें सामने आई हैं।
इस मुलाकात में तारिक रहमान की बेटी जायमा रहमान भी मौजूद थीं।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में चल रही तनातनी और क्षेत्रीय राजनीति के बीच यह दृश्य काफी प्रतीकात्मक माना जा रहा है, खासकर तब जब पाकिस्तान द्वारा दोनों देशों के रिश्तों में हस्तक्षेप की कोशिशों की चर्चा हो रही है।
फरवरी में चुनाव, तारिक रहमान की वापसी से बदली सियासत
बांग्लादेश: गौर करने वाली बात यह भी है कि तारिक रहमान 17 वर्षों के बाद बांग्लादेश लौटे हैं और उनकी पार्टी बीएनपी फरवरी में होने वाले आम चुनावों में हिस्सा लेने जा रही है।
तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
ऐसे में भारत की यह कूटनीतिक पहल भविष्य में भारत-बांग्लादेश संबंधों को नई दिशा देने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है।

