रुबिका लियाकत बायोग्राफी: उदयपुर की शांत झीलों के किनारे पली-बढ़ी एक लड़की ने जब ख़ामोशी को छोड़कर हाथ में माइक थामने का फैसला किया, तो हिंदी पत्रकारिता को एक नई और निडर आवाज़ मिली।
उन्होंने 2000 के दशक की शुरुआत में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। यह एक ऐसा क्षेत्र था जहाँ सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं था।
अपनी मेहनत, अटूट आत्मविश्वास और काबिलियत के दम पर उन्होंने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो अपनी राह खुद बनाई जा सकती है।
‘ताल ठोक के’ और ‘मास्टर स्ट्रोक’ जैसे लोकप्रिय शोज के माध्यम से उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक बहस करने की कला में महारत हासिल की।
वे अपने तीखे सवालों और तथ्यों को सटीक रूप से रखने के अंदाज़ के लिए जानी जाती हैं, जहाँ वे शक्तिशाली नेताओं से भी वह पूछने का साहस रखती हैं जिससे अक्सर लोग बचते हैं।
आज एक सम्मानित और प्रभावशाली पत्रकार के रूप में उनकी बेजोड़ ऊर्जा और स्पष्ट दृष्टि यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी व्यक्ति अपना भाग्य खुद लिख सकता है।
आज वह भारत की सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक के रूप में खड़ी हैं, यह साबित करते हुए कि स्पष्ट दृष्टि और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कोई भी व्यक्ति अपने भाग्य का निर्धारण खुद कर सकता है।
व्यक्तिगत जीवन
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | रुबिका लियाकत |
| जन्म तिथि | 18 अप्रैल, 1983 |
| जन्म स्थान | उदयपुर, राजस्थान, भारत |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| शैक्षणिक योग्यता | बैचलर ऑफ मास मीडिया, University of Mumbai |
| पिता का नाम | स्वर्गीय अमर लियाकत (व्यापारी) |
| माता का नाम | फातिमा लियाकत (पर्यावरण वैज्ञानिक) |
| पति का नाम | नावेद कुरैशी (पत्रकार, विवाह 2012) |
| बच्चे | एक बेटा और एक बेटी |
| वर्तमान पद | News18 India में कंसल्टिंग एडिटर |
| सिग्नेचर शो | ताल ठोक के (Zee News), मास्टर स्ट्रोक (ABP News) |
| प्रमुख करियर उपलब्धि | अपने साहसी और जोशीले एंकरिंग अंदाज के लिए जानी जाती हैं |
प्रारंभिक जीवन और पृष्ठभूमि
रुबिका लियाकत का जन्म 18 अप्रैल, 1983 को राजस्थान के खूबसूरत “झीलों के शहर” उदयपुर में हुआ था।
उनका बचपन झीलों के इस शहर की वादियों में बीता, जहाँ के शांत माहौल ने उन्हें बड़े सपने देखने की हिम्मत दी।
पत्रकारिता का जुनून: उन्हें बचपन से ही अपनी बात को स्पष्ट रूप से रखने का शौक था। यही वजह थी कि उन्होंने मीडिया की दुनिया को अपना करियर चुना।
अपनी उच्च शिक्षा के लिए वे मुंबई चली गईं, जहाँ उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से मास मीडिया (Journalism) में अपनी डिग्री हासिल की।
पारिवारिक सहयोग: एक साधारण पृष्ठभूमि से होने के बावजूद, उनके परिवार ने उनके हौसलों को हमेशा उड़ान दी।
उन्होंने कम उम्र में ही यह तय कर लिया था कि वे अपनी आवाज़ को समाज की समस्याओं और बड़े सवालों को उठाने का जरिया बनाएंगी।
शैक्षिक योग्यता
रुबिका का शैक्षणिक सफर शुरू से ही संचार और मीडिया पर केंद्रित था
शिक्षा : उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा उदयपुर के सेंट ग्रेगोरियस सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की।
कॉलेज : उच्च शिक्षा के लिए वह मुंबई जैसे बड़े शहर में चली गईं और मुंबई विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास मीडिया (बीएमएम) की डिग्री प्राप्त की ।
व्यावसायिक प्रशिक्षण : अपने तकनीकी कौशल को निखारने के लिए, उन्होंने नोएडा स्थित फ्यूचरिस्टिक मीडिया कम्युनिकेशन सेंटर (एफएमसीसी) में मीडिया की आगे की शिक्षा प्राप्त की।
पत्रकारिता का जुनून
शुरू से ही रुबिका अपने वाद-विवाद क्षमता और जटिल विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने की काबिलियत के लिए जानी जाती है, उन्हें सिर्फ नौकरी नहीं चाहिए थी
उन्हें एक ऐसा मंच चाहिए था जहाँ वे महत्वपूर्ण सवाल पूछ सकें। इसी लगन ने उन्हें राजस्थान की शांत गलियों से मुंबई और दिल्ली के उच्च दबाव वाले समाचार कक्षों तक पहुँचाया।
रुबिका लियाकत की शैक्षणिक यात्रा इस बात का एक आदर्श उदाहरण है कि कैसे एक मजबूत अकादमिक नींव एक सफल करियर की ओर ले जा सकती है।
उन्होंने शुरू से ही मीडिया और संचार पर ध्यान केंद्रित किया।
शिक्षा : रुबिका ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान के उदयपुर स्थित अपने गृहनगर में पूरी की। उन्होंने सेंट ग्रेगोरियस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई की।
स्कूल के दिनों में वे एक कुशल वक्ता के रूप में जानी जाती थीं और वाद-विवाद में सक्रिय रूप से भाग लेती थीं,
जिससे उन्हें वह आत्मविश्वास प्राप्त करने में मदद मिली जो वे आज टीवी पर दिखाती हैं।
कॉलेज और स्नातक : वह अपनी पेशेवर पढ़ाई के लिए मुंबई चली गईं, जहां उन्होंने 2005 में मुंबई विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में बैचलर ऑफ मास मीडिया (बीएमएम) की डिग्री हासिल की।
व्यावहारिक प्रशिक्षण : अपने कॉलेज के वर्षों के दौरान, उन्होंने व्यावहारिक शिक्षा पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित किया और समाचार कक्ष के लिए तैयारी करने के लिए वृत्तचित्र,
फील्ड रिपोर्टिंग अभ्यास और अनुसंधान कार्यों जैसी परियोजनाओं में भाग लिया।
शुरुआती सपने (Early Aspirations) :
रुबिका लियाकत के मन में बचपन से ही कुछ बड़ा करने की चाहत थी। उनकी शुरुआती आकांक्षाएँ सिर्फ एक सुरक्षित नौकरी पाने तक सीमित नहीं थीं:
बदलाव की चाहत: वे शुरू से ही एक ऐसा मंच चाहती थीं जहाँ वे समाज के जरूरी और कड़े सवाल पूछ सकें।
बोलने की आज़ादी: अपनी बात को निडर होकर रखना और दूसरों की आवाज़ बनना उनका मुख्य लक्ष्य था।
पहचान बनाने का जुनून: उदयपुर जैसे छोटे और शांत शहर से निकलकर, वे मीडिया की दुनिया में अपनी एक अलग और प्रभावशाली पहचान बनाना चाहती थीं।
चुनौतियों से प्यार: वे हमेशा से मानती थीं कि पत्रकारिता का रास्ता कठिन है, लेकिन इसी कठिन रास्ते पर चलकर वे खुद को साबित करना चाहती थीं।
शुरुआती सफर (2007-2008)
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ‘लाइव इंडिया’ (Live India) चैनल से अपने करियर की शुरुआत की। यहाँ उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को जमीन से सीखा।
पहचान की तलाश (News 24): इसके बाद वे ‘न्यूज़ 24’ में शामिल हुईं। यहाँ उन्होंने एंकरिंग और रिपोर्टिंग दोनों में अपना हाथ आजमाया और धीरे-धीरे अपनी एक अलग पहचान बनानी शुरू की।
बड़ी सफलता (Zee News): रुबिका को असली पहचान ‘ज़ी न्यूज़’ (Zee News) से मिली। यहाँ उनके तीखे अंदाज़ और बेबाक एंकरिंग ने उन्हें दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। उन्होंने यहाँ कई बड़े शो होस्ट किए।
लोकप्रियता का शिखर (ABP News): ‘एबीपी न्यूज़’ में आने के बाद वे एक ‘स्टार एंकर’ बन गईं। उनके शो ‘ताल ठोक के’ और ‘मास्टर स्ट्रोक’ ने टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए।
यहाँ उन्होंने दिखाया कि कैसे सत्ता से निडर होकर सवाल पूछे जाते हैं।
वर्तमान और प्रभाव (News18 India): आज वे ‘न्यूज़ 18 इंडिया’ में एक वरिष्ठ पद (कंसल्टिंग एडिटर) पर हैं। उनके नए शो जैसे ‘गूँज’ को लाखों लोग देखते हैं।
स्किल्स और प्रभाव :
रुबिका लियाकत की पत्रकारिता को ये दो बातें सबसे अलग बनाती हैं।
- रुबिका जब टीवी पर आती हैं, तो उनका अंदाज़ बाकी एंकरों से काफी अलग होता है।
बेबाकी और निडरता: वे बिना डरे और बिना हिचकिचाए सीधे सवाल पूछती हैं। उनकी आवाज़ में एक खास तरह का आत्मविश्वास और कड़कापन होता है।
भाषा पर पकड़: उनकी हिंदी और उर्दू दोनों बहुत साफ़ और प्रभावशाली हैं। वे शब्दों का चुनाव बहुत सोच-समझकर करती हैं, जिससे उनकी बात सीधे दिल पर लगती है।
बॉडी लैंग्वेज: उनके बैठने और बात करने का तरीका एक ‘फाइटर’ जैसा होता है, जो बहस (Debate) के दौरान उन्हें और भी असरदार बनाता है।
लोगों पर असर
रुबिका की पत्रकारिता का समाज और दर्शकों पर बड़ा प्रभाव पड़ता है:
युवाओं के लिए मिसाल: वे उन लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं जो छोटे शहरों से आती हैं और मीडिया की दुनिया में नाम कमाना चाहती हैं।
जनता की आवाज़: वे अक्सर उन मुद्दों को उठाती हैं जो सीधे आम आदमी से जुड़े होते हैं, जिससे दर्शक खुद को उनसे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।
सोशल मीडिया की ताकत: उनके वीडियो सोशल मीडिया पर अक्सर वायरल होते हैं, जिसका मतलब है कि उनकी बातों को लाखों लोग सुनते और उन पर चर्चा करते हैं।
प्रमुख पुरस्कार और सम्मान
रुबिका लियाकत को टेलीविजन पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।
ये पुरस्कार एक कुशल साक्षात्कारकर्ता के रूप में उनकी क्षमता और दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता को मान्यता देते हैं।
आईटीए पुरस्कार (भारतीय टेलीविजन अकादमी पुरस्कार) :
आईटीए पुरस्कार भारतीय टेलीविजन उद्योग में सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक हैं।
सर्वश्रेष्ठ टॉक/चैट शो (2022): रुबिका ने एबीपी न्यूज़ पर अपने असाधारण प्रदर्शन के लिए यह पुरस्कार जीता।
उन्हें विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उनके हाई-प्रोफाइल साक्षात्कार के लिए सम्मानित किया गया ।
ENBA पुरस्कार (Exchange4media समाचार प्रसारण पुरस्कार) :
ENBA पुरस्कार भारत में समाचार प्रसारण के क्षेत्र में उत्कृष्टता को सम्मानित करते हैं।
सर्वश्रेष्ठ टॉक शो (हिंदी) : उन्हें उनके शो ” शिखर समागम ” के लिए सम्मानित किया गया है, जहां उन्होंने शीर्ष नेताओं और समाचार निर्माताओं के साथ गहन चर्चाओं की मेजबानी की।
तेजतर्रार पत्रकार : मीडिया जगत के विशेषज्ञ (जैसे Exchange4media) उन्हें अक्सर “तेजतर्रार” पत्रकार के रूप में पहचानते हैं।
यह उपाधि उन्हें उनकी निडर और ऊर्जावान रिपोर्टिंग शैली के कारण दी गई है।
शीर्ष प्रभावशाली व्यक्ति : औपचारिक पुरस्कारों से परे, उन्हें लगातार सोशल मीडिया पर सबसे प्रभावशाली भारतीय पत्रकारों में से एक के रूप में स्थान दिया जाता है।
अक्सर जनमत को आकार देने और लाखों अनुयायियों को जोड़ने की उनकी क्षमता के लिए पहचाना जाता है।
प्रभाव
रुबिका लियाकत की विरासत भारतीय पत्रकारिता की एक सशक्त हस्ती के रूप में उनकी भूमिका से परिभाषित होती है।
उन्होंने समाचार प्रस्तुत करने के तरीके को बदलकर और पेशेवरों की एक नई पीढ़ी को प्रेरित करके मीडिया उद्योग को प्रभावित किया है।
रूढ़ियों को तोड़ना
रुबिका ने एक बेहद प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में प्रगतिशील मुस्लिम महिला के रूप में महत्वपूर्ण छाप छोड़ी है।
उनकी सफलता ने भारत में शीर्ष समाचार एंकर बनने की पुरानी रूढ़ियों को तोड़ दिया है और यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा और कड़ी मेहनत सफलता के सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं।
“निडर” पत्रकारिता : उन्होंने पत्रकारिता की एक ऐसी शैली को विकसित करने में मदद की है जो निडर और देशभक्तिपूर्ण है।
“भारत की बेटी” की छवि: राष्ट्रीय मुद्दों पर उनके मजबूत रुख के कारण कई दर्शक उन्हें “भारत की बेटी” कहते हैं।
कठिन बहसें: गरमागरम और उच्च दबाव वाली राजनीतिक बहसों को संभालने की उनकी क्षमता ने प्राइम-टाइम शो की मेजबानी के लिए एक नया मानक स्थापित किया है।
डिजिटल पावर हाउस
पारंपरिक एंकरों के विपरीत, जो केवल टीवी पर ही मौजूद रहते हैं, रुबिका का डिजिटल क्षेत्र में बहुत बड़ा प्रभाव है।
सोशल मीडिया पर 46 लाख से अधिक फॉलोअर्स के साथ, उन्होंने यह साबित कर दिया है कि एक पत्रकार खुद एक “ब्रांड” बन सकता है।
वह अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने शो के खत्म होने के बाद भी खबरों को जीवित रखने के लिए करती है, और सीधे जनता से जुड़ती है।
युवाओं के लिए आदर्श
उदयपुर जैसे छोटे शहर से भारतीय मीडिया उद्योग के शिखर तक का उनका सफर छोटे शहरों के युवा छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
वह मीडिया नैतिकता की प्रबल समर्थक हैं और युवा महिलाओं को पत्रकारिता में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करती हैं ताकि बेआवाज लोगों को आवाज दी जा सके।
उनकी विरासत निरंतरता और आत्मविश्वास की मिसाल है, जो यह दर्शाती है कि यदि आप अच्छी तरह से तैयार और साहसी हैं, तो आप राष्ट्रीय संवाद का नेतृत्व कर सकते हैं।
विवाद
1. निष्पक्षता पर सवाल (NBDSA की कार्रवाई): जनवरी 2025 में, न्यूज़ रेगुलेटर (NBDSA) ने रुबिका लियाकत और न्यूज़18 इंडिया की आलोचना की थी।
उन पर आरोप था कि एक डिबेट के दौरान उन्होंने अरविंद केजरीवाल के मामले में जांच पूरी होने से पहले ही उन्हें ‘दोषी’ की तरह पेश किया। रेगुलेटर ने कहा कि एंकर को डिबेट में निष्पक्ष (Neutral) रहना चाहिए था।
2. नेताओं के साथ तीखी नोक-झोक: लाइव डिबेट के दौरान रुबिका का अंदाज़ काफी आक्रामक रहता है।
कई बार समाजवादी पार्टी या अन्य विपक्षी दलों के प्रवक्ताओं के साथ उनकी बहस इतनी बढ़ गई कि उन्हें ‘मर्यादा’ में रहने की चेतावनी देनी पड़ी।
आलोचक अक्सर उन पर एक पक्ष का समर्थन करने का आरोप लगाते हैं।
3. पक्षपात के आरोप (MIB को शिकायत): साल 2025 में एक पूर्व IPS अधिकारी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि रुबिका का व्यवहार सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के प्रति अलग-अलग (भेदभावपूर्ण) रहता है।
4. धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर बहस: रुबिका अक्सर हिजाब, शरिया कानून और अन्य धार्मिक विषयों पर बेबाकी से बोलती हैं।
इस वजह से कई बार रूढ़िवादी लोग या धर्मगुरु उनसे नाराज हो जाते हैं और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ जाती है।
5. फेक वीडियो का शिकार: फरवरी 2026 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें दावा किया गया कि एक पाकिस्तानी व्यक्ति ने लाइव डिबेट में उनके साथ बदतमीजी की।
हालांकि, जांच (Fact Check) में यह वीडियो फर्जी और एडिटेड पाया गया।
रुबिका लियाकत के बारे में 5 रोचक तथ्य, उनका अनदेखा पहलू
बिना टीवी वाला बचपन :
आज भले ही रुबिका दिन भर टीवी स्क्रीन पर छाई रहती हैं, लेकिन उनके बचपन का एक बड़ा हिस्सा बिना टीवी के बीता।
उदयपुर में पढ़ाई के दौरान उनके घर में टीवी नहीं था। उन्होंने रेडियो सुनकर और अखबार पढ़कर अपनी भाषा और बोलने की शैली को निखारा।
- ‘राउडी’ कनेक्शन और दोस्ती :
रुबिका लियाकत और साउथ के सुपरस्टार विजय देवरकोंडा के बीच गहरी दोस्ती है।
यहाँ तक कि 26 फरवरी, 2026 को उदयपुर में हुई विजय और रश्मिका मंदाना की शादी में रुबिका एक खास मेहमान के रूप में शामिल हुई थीं।
वे अक्सर एक-दूसरे के काम की सराहना करते हैं।
- फिटनेस का जुनून :
टीवी की दुनिया में आने के बाद रुबिका ने अपनी फिटनेस पर बहुत मेहनत की। वे एक सख्त डाइट और वर्कआउट रूटीन फॉलो करती हैं।
उनके लिए योग और जिम जाना उतना ही जरूरी है जितना कि न्यूज़ रूम में जाना।
- उर्दू और हिंदी का संगम :
बहुत कम लोग जानते हैं कि रुबिका की हिंदी इतनी शुद्ध इसलिए है क्योंकि उन्होंने इसे बहुत करीब से सीखा है।
उनकी उर्दू पर भी उतनी ही जबरदस्त पकड़ है। यही कारण है कि उनकी डिबेट्स में शब्दों का चुनाव बहुत ही ‘शायराना’ लेकिन ‘चुभने वाला’ होता है।
- बेबाक माँ और गृहिणी :
कैमरे के सामने कड़े सवाल पूछने वाली रुबिका घर पर एक बहुत ही नरम दिल माँ हैं।
वे अपने बच्चों के साथ समय बिताना और उनके लिए कुकिंग करना पसंद करती हैं।
वे अक्सर कहती हैं कि “स्टूडियो में मैं एक पत्रकार हूँ, लेकिन घर पहुँचते ही मैं सिर्फ एक माँ और बेटी हूँ।”
इस बायोग्राफी की लेखिका आरूषि शर्मा हैं।
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