Saturday, August 30, 2025

RSS: अंग्रेजी सीखना ठीक, अंग्रेज बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए : मोहन भागवत

RSS: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संगठन की 100 वर्षों की यात्रा पर आयोजित व्याख्यानमाला के तीसरे दिन अपने विचार रखे। इस दौरान उन्होंने भारत की शिक्षा प्रणाली, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारतीय परंपरा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से बात की।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now

RSS: स्टूडेंट को अपने अतीत और संस्कृति से भी परिचित होना चाहिए

भागवत ने कहा कि शिक्षा का असली अर्थ केवल जानकारियां रटना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अपने अतीत और संस्कृति से भी परिचित होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक और आधुनिकता शिक्षा के विरोधी नहीं हैं,

लेकिन शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं बल्कि इंसान को पूर्ण रूप से सुशिक्षित बनाना होना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP) को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया और कहा कि इसमें पंचकोशीय शिक्षा का उल्लेख महत्वपूर्ण है।

ब्रिटिशों द्वारा थोपी गई शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताई

संघ प्रमुख ने ब्रिटिशों द्वारा थोपी गई शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के प्रभाव से हमारी मूल भारतीय शिक्षा प्रणाली धीरे-धीरे खत्म हो गई। विद्यार्थियों को भारत के गौरवशाली इतिहास और अपनी परंपराओं के बारे में जानना चाहिए, क्योंकि वही उनकी असली पहचान है।

अंग्रेजी भाषा को लेकर भागवत ने स्पष्ट किया कि इसे सीखने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि यह मात्र एक भाषा है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेज बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने उदाहरण दिया कि दुनिया के कई देशों से लोग संघ शिक्षा वर्ग को देखने आते हैं और कहते हैं कि अगर उनके यहां भी आरएसएस जैसा संगठन होता तो उनके समाज को मजबूती मिलती।

पिता ने दिया मार्गदर्शन

भागवत ने शिक्षा को भारतीय मूल्यों और परंपराओं से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा की शिक्षा को गुरुकुल शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए। संस्कृत के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि भारत को गहराई से समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान होना जरूरी है।

अपने बचपन को याद करते हुए भागवत ने कहा कि जब वह आठवीं कक्षा में थे, उनके पिता ने उन्हें ओलिवर ट्विस्ट पढ़ने के लिए दिया था, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि विदेशी साहित्य पढ़ना अच्छा है, पर प्रेमचंद जैसे भारतीय साहित्यकारों को नजरअंदाज करना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन न होकर, चरित्र निर्माण और समाज के लिए जिम्मेदार नागरिक बनाने का माध्यम होनी चाहिए। भारत की शिक्षा पद्धति को उसी दिशा में आगे बढ़ाना होगा, जिसमें परंपरा और आधुनिकता का संतुलन हो।

Madhuri Sonkar
Madhuri Sonkarhttps://reportbharathindi.com/
ETV Bharat में एक साल ट्रेनिंग कंटेंट एडिटर के तौर पर काम कर चुकी हैं। डेली हंट और Raftaar News में रिपोर्टिंग, V/O का अनुभव। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और बॉलीवुड न्यूज पर अच्छी पकड़।
- Advertisement -

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -

Latest article