रवि गुप्ता बायोग्राफी: उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर से निकला एक साधारण सा लड़का, न कोई फिल्मी बैकग्राउंड, न बड़े संपर्क बस पैनी नज़र, सादा अंदाज़ और जिंदगी को अलग नज़र से देखने की कला।
यही लड़का आगे चलकर “शुद्ध देसी कॉमेडियन” के नाम से पूरे देश में जाना गया।
रवि गुप्ता ने साधारण परिवार की ज़िंदगी की छोटी-छोटी परेशानियों, नौकरी की टेंशन, घर-परिवार की उम्मीदों और रोज़मर्रा के संघर्षों को ऐसे शब्द दिए कि लोग हँसते-हँसते खुद को उसमें देखने लगे।
उनका मशहूर डायलॉग -“इतनी बचत है मेरे पास कि मैं कल की चिंता नहीं करता…” आज भी लाखों लोगों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है।
उनका मशहूर डायलॉग – “इतनी बचत है मेरे पास कि मैं कल की चिंता नहीं करता…” सिर्फ एक पंचलाइन नहीं, बल्कि एक सोच है।
यह लाइन सुनते ही हर नौकरीपेशा इंसान को अपनी सैलरी, ईएमआई और भविष्य की प्लानिंग याद आ जाती है, लेकिन उसी के साथ चेहरे पर मुस्कान भी आ जाती है।
रवि की खासियत यह है कि वे चिल्लाकर नहीं हँसाते, बल्कि धीरे-धीरे अपनी बात कहकर दिल में उतर जाते हैं।
उनकी बातें सुनकर ऐसा लगता है जैसे मोहल्ले का कोई अपना ही लड़का किस्से सुना रहा हो।
शायद यही वजह है कि उनकी कॉमेडी सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनेपन का एहसास भी देती है।
व्यक्तिगत जानकारी
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | रवि गुप्ता |
| जन्म तिथि | 18 सितंबर, 1990 |
| जन्म स्थान | प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश |
| शिक्षा | स्नातक (Applied Arts & Illustration), Banaras Hindu University (BHU) |
| पेशा | स्टैंड-अप कॉमेडियन, इलस्ट्रेटर, कंटेंट क्रिएटर |
| खास पहचान | ऑब्जर्वेशनल कॉमेडी और मध्यमवर्गीय हास्य |
| फेमस डायलॉग | “इतनी बचत है मेरे पास कि मैं कल की चिंता नहीं करता” |
| कद/वजन | 5 फीट 10 इंच / 80 किलोग्राम |
| माता | सुशीला गुप्ता |
| बहन | पूनम गुप्ता |
| जीवनसाथी | प्रेरणा श्रीवास्तव |
| अनुमानित नेटवर्थ | ₹1 से 3 करोड़ |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| धर्म | हिंदू |
शुरुआती जीवन
रवि का बचपन प्रतापगढ़ की गलियों में बीता। छोटा शहर, सादा जीवन और परिवार का मजबूत साथ, इन्हीं सबने उनके भीतर गहरी “देसी सोच” पैदा की।
वे अक्सर आसपास की छोटी-छोटी बातों को चुपचाप देखते और मन ही मन उनसे कहानियाँ बना लेते थे।
घर में माँ और बड़ी बहन के साथ उनका रिश्ता बहुत गहरा रहा। पारिवारिक माहौल ने उन्हें जमीन से जुड़े रहना सिखाया। यही सादगी आगे चलकर उनकी कॉमेडी की पहचान बनी।
कला के प्रति उनका झुकाव बचपन से था। इसी लगाव ने उन्हें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय तक पहुंचाया, जहाँ उन्होंने शिल्प कला और चित्रण की पढ़ाई की।
पढ़ाई के दौरान उन्होंने सीखा कि भावनाओं को चित्रों में कैसे ढाला जाता है – बाद में यही हुनर उनके शब्दों में झलकने लगा।
नौकरी से मंच तक का सफर (कलम से माइक की ओर)
दिल्ली में 9 से 5 की नौकरी करते हुए रवि को स्टैंड-अप कॉमेडी का चस्का लगा। वे अक्सर दिल्ली के ‘ओपन माइक’ इवेंट्स में दर्शकों के तौर पर जाया करते थे।
वहाँ उन्होंने देखा कि लोग अक्सर पश्चिमी शैली की नकल कर रहे हैं। रवि ने तय किया कि वे वैसे ही रहेंगे जैसे वो असल में हैं।
जब वे पहली बार मंच पर उतरे, तो उनके लहजे में वही उत्तर प्रदेश वाली सौम्यता और लय थी।
उन्होंने दफ्तर की राजनीति और घर की किच-किच को अपना हथियार बनाया। उनके ‘आम आदमी’ वाले अंदाज ने लोगों का दिल जीत लिया और जल्द ही उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी ताकि वे फुल-टाइम “कहानियां” सुना सकें।
वो ‘बड़ा ब्रेक’ जिसने रातों-रात स्टार बना दिया
रवि दिल्ली के सर्किट में अच्छा कर रहे थे, लेकिन उनकी किस्मत तब चमकी जब उनका वीडियो “Job & Passion” सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
इस वीडियो में उन्होंने एक ऐसी बात कही जो हर नौकरीपेशा इंसान के मन की बात थी….
“इतनी बचत है मेरे पास कि मैं कल की चिंता नहीं करता… पर परसों की बहुत है!”
यह लाइन सिर्फ एक चुटकुला नहीं रही, बल्कि एक ‘मीम’ बन गई। देखते ही देखते रवि के यूट्यूब सब्सक्राइबर हजारों से लाखों में पहुँच गए। आज वे YouTube पर 2 मिलियन (20 लाख) से ज्यादा का परिवार बन चुके हैं।
प्रसिद्धि की समयरेखा
2012 : उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल लॉन्च किया, शुरुआत में उन्होंने अपनी रचनात्मक रुचियों पर ध्यान केंद्रित किया।
2015 : दिल्ली में उभरते स्टैंड-अप कॉमेडी सीन से प्रेरित होकर, ओपन माइक कार्यक्रमों में प्रदर्शन करना शुरू किया।
2018 : उन्होंने अपना पहला वायरल एक्ट, “जापान बनाम भारत” रिलीज़ किया, जिसे लाखों व्यूज़ मिले और इसने उनकी “देसी बनाम दुनिया” कॉमेडी शैली को स्थापित किया।
निर्णायक मोड़ : उनके सेट “जॉब एंड पैशन” ने प्रतिष्ठित पंक्ति, “इतनी बचत है मेरे पास कि मैं कल की चिंता नहीं करता” (मेरे पास इतनी बचत है कि मुझे कल की चिंता नहीं है) को पेश किया, जो एक व्यापक मीम और एक सांस्कृतिक मुहावरा बन गया।
प्रमुख उपलब्धियां और टीवी शो
रवि गुप्ता ने न केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म बल्कि टेलीविजन पर भी अपनी छाप छोड़ी है:
इंडियाज लाफ्टर चैंपियन (Sony TV): इस शो में वे एक मजबूत प्रतियोगी के रूप में उभरे।
गुड नाइट इंडिया (SAB TV): अमित टंडन के साथ इस शो में उन्होंने अपनी कॉमेडी का लोहा मनवाया।
ग्लोबल टूर्स: रवि के सोलो शो ‘कल की चिंता नहीं करता’ के टिकट न केवल भारत (मुंबई, दिल्ली, गुरुग्राम) में बल्कि ऑस्ट्रेलिया (ब्रिस्बेन, एडिलेड) और दुबई जैसे शहरों में भी हाथों-हाथ बिकते हैं।
2026 टूर: “कल की चिंता नहीं करता”
रवि इन दिनों अपने नए टूर पर हैं।
इंडिया लेग
17 फरवरी 2026 – गुरुग्राम
21 फरवरी 2026 – मुंबई
7 मार्च 2026 – नई दिल्ली
12 अप्रैल 2026 – मुंबई (ग्रैंड फिनाले)
ऑस्ट्रेलिया लेग
22 मार्च 2026 – ब्रिस्बेन
28 मार्च 2026 – एडिलेड
अब वे सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में बसे भारतीयों के लिए भी घर की याद बन चुके हैं।
सम्मान और उपलब्धियाँ
यूट्यूब गोल्ड प्ले बटन (10 लाख+ सब्सक्राइबर)
सर्वश्रेष्ठ स्टैंड-अप कॉमेडियन (2021)
वर्ष का लोकप्रिय हास्य कलाकार (2020)
कॉमेडी की अपनी शैली (साफ-सुथरा हास्य)
रवि की सबसे बड़ी खूबी उनकी “साफ-सुथरी कॉमेडी” है। उनके शो में आप दादा-दादी से लेकर बच्चों तक, पूरे परिवार के साथ बैठकर हंस सकते हैं।
वे अक्सर मजाक में कहते हैं, “जिस जगह से रोटी आती हो, उससे कभी नफरत मत करो।” वे आज भी एक सक्रिय इलस्ट्रेटर हैं और अपने जोक्स को एक पेंटिंग की तरह बुनते हैं।
इस बायोग्राफी की लेखिका स्निग्धा सिंह हैं।
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