Thursday, February 5, 2026

राजा भैया बायोग्राफी: तीन दशक से लगातार सत्ता की कमान संभालने वाले शाही खून की कहानी

सोचिए एक ऐसे नेता के बारे में, जिसने तीन दशकों से ज्यादा समय तक कभी चुनाव नहीं हारा, अपनी खुद की पार्टी बनाई, जेल की सजा झेली,

कई बार मंत्री बनकर कार्य किया और आधुनिक लोकतंत्र में जमींदार जैसी वफादारी और दबदबा कायम रखा। यही हैं रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा क्षेत्र से लंबे समय तक विधायक रह चुके एक प्रभावशाली नेता हैं।

इनका जन्म 31 अक्टूबर 1969 को कोलकाता में हुआ था। वे राजनीति में इतने लंबे समय से सक्रिय हैं कि स्थानीय लोग उन्हें सम्मान और डर दोनों के साथ “राजा” कहते हैं।

राजा भैया की पहचान उनकी स्थानीय लोकप्रियता, ठाकुर जाति प्रभाव और राजशाही जीवनशैली से है।

उन्हें घुड़सवारी, महंगी कारें, स्पीड बोट और विमान चलाने का शौक है। लगातार 1993 से कुंडा विधानसभा सीट जीतते रहने के कारण वे क्षेत्रीय राजनीति में एक दबदबे वाले नेता माने जाते हैं।

उनकी छवि कभी-कभी विवादों में रहने वाली रही है, लेकिन उनकी राजनीतिक ताकत और व्यक्तिगत आकर्षण ने उन्हें यूपी की राजनीति में एक अलग मुकाम दिलाया है।

व्यक्तिगत जानकारी

नामरघुराज प्रताप सिंह
उपनामराजा भैया
जन्म तिथि31 अक्टूबर 1969
जन्म स्थानकोलकाता, पश्चिम बंगाल
राजनीतिक पार्टीस्वतंत्र / जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक
पेशाभारतीय राजनीतिज्ञ
पिताराजा उदय प्रताप सिंह
मातामंजुल राजे
पत्नीभानवी कुमारी (अलग हो चुके है)
बच्चेशिवराज सिंह, बृजराज सिंह, बेटी- बृजेश्वरी, राधावी
धर्म/ जातिहिन्दू, ठाकुर(क्षत्रिय)

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

राजा भैया बायोग्राफी: राजा भैया का जन्म 31 अक्टूबर 1969 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। वे एक प्रतिष्ठित राजपूत परिवार से आते हैं, जिनके राजनीतिक और शाही कनेक्शन गहरे हैं।

पिता: उदय प्रताप सिंह

माता: मंजुल राजे, अंतिम महाराजा समथर राज्य के महाराजा राधाचरण सिंह की बेटी।

मामा: रणजीत सिंह जुडियो

दादा: बजरंग बहादुर सिंह, हिमाचल प्रदेश के उपराज्यपाल और सम्मानित शिक्षाविद।

राजा भैया शाही परिवार से आते है, लेकिन इसके बावजूद उनको राजनीतिक सफलता मुख्य रूप से उनके व्यक्तिगत प्रभाव और स्थानीय कनेक्शन से मिली।

शिक्षा

स्कूलिंग- इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के स्थानीय स्कूलों में

इंटरमीडिएट- कक्षा 12, कर्नल गंज इंटर कॉलेज, इलाहाबाद, 1987

विश्वविद्यालय: लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक, 1989.

राजनीतिक दबदबे की उभरती छवि

1990 के दशक की मंडल बनाम मंदिर राजनीति में राजा भैया को किंगमेकर के रूप में पहचान मिली। जब क्षेत्रीय और जातिगत समीकरण को काफी महत्वपूर्ण माना जाता था।

मंत्री पद– उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय मिले।

-कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री।

-खेल और युवा कल्याण मंत्री।

-खाद्य और नागरिक आपूर्ति तथा जेल मंत्री।

2012 में जेल से रिहाई के बाद जेल मंत्री भी रहें।

पार्टी की स्थापना

2018 में उन्होंने स्वतंत्र नेता के रूप में अपनी राजनीतिक पहचान को मजबूत करते हुए जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) की स्थापना की।

संपत्ति

कुल घोषित संपत्ति: लगभग ₹23.7 करोड़.

घोषित देनदारियां: शून्य.

विवाद

POTA मामला (2002–2006).

मायावती सरकार में 2002 में उन्हें आतंकवाद निरोधक अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया। वहीं 2006 में उन्हें सभी आरोपों से बरी किया कर दिया गया।

अपहरण और गैंगस्टर एक्ट मामले।

2010 से 2011 में उनके और उनके भाई के खिलाफ स्थानीय चुनावों में पंचायती सदस्यों को धमकाने के आरोप लगे। बाद में उन्हें हाई कोर्ट से जमानत मिली।

डीएसपी जिया-उल-हक हत्या मामला (2013).

इस मामले में उनका नाम सामने आया और उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया, बाद में CBI ने उन्हें क्लीन चिट दी।

अन्य आपराधिक आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स में उनके खिलाफ हत्या, मारपीट और धमकी जैसी कई आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं, इन मामलों में उनकी गिरफ्तारी भी हो चुकी है, जिनमें से कई मामले बाद में रद्द या बरी हो गए।

जन वितरण प्रणाली (PDS) में अनियमितताएं।

खाद्य अनाज में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे, CBI जांच हुई, लेकिन कोई ठोस सजा नहीं हुई।

घरेलू हिंसा के आरोप (2025).

उनकी पत्नी भानवी सिंह ने दिल्ली में लंबी अवधि की शारीरिक और मानसिक हिंसा की FIR दर्ज कराई थी और ये मामला अब भी न्यायिक प्रक्रिया में है।

मुख्य उपलब्धियां

कुंडा से कई बार विधायक चुने गए, अक्सर स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में।

उत्तर प्रदेश में कई मंत्रालयों में कार्य किया।

2018 में अपनी पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) की स्थापना।

दिलचस्प बातें

उड़ता राजा: वे प्रशिक्षित पायलट हैं और घुड़सवारी और शूटिंग जैसे साहसिक खेलों के शौकीन हैं।

कुंडा का दरबार: अब भी स्थानीय विवादों को सीधे हल करते हैं और जनता के बीच फैसले सुनाते हैं।

युवा नेता: यूपी के सबसे कम उम्र के विधायक में से एक।

जातिगत प्रभाव: ठाकुर नेता होने के बावजूद उनकी पकड़ कई समुदायों में है।

भूमिका और प्रभाव

राजा भैया उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित विधायक में से एक हैं और क्षेत्रीय राजनीति में उन्होंने एक स्थानीय शक्ति-निर्माता के रूप में पहचान बनाई है।

उनका प्रभाव न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक-स्थानीय संरचना पर भी गहरा रहा है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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