Punjab: पंजाब में रंगदारी का नेटवर्क अब और भी खतरनाक रूप ले चुका है। गैंगस्टरों ने अब उन कारोबारियों को अपना नया टारगेट बनाया है जिनकी इकलौती संतान है।
ऐसे परिवारों में वंश और बेटे की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता होती है। यही डर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन रहा है।
कई कारोबारी बिना पुलिस में शिकायत किए चुपचाप लाखों-करोड़ों रुपये दे रहे हैं।
दैनिक भास्कर ने खुलासा किया कि जालंधर क्षेत्र के कम से कम 5 ऐसे मामलों का खुलासा हुआ है, जिनमें एक बिल्डर, एक ज्वेलर, एक डॉक्टर और दो अन्य कारोबारी शामिल हैं।
सभी मामलों में धमकी देने वालों के पास परिवार की निजी जानकारी थी। यहां तक कि बेटों की लोकेशन और दिनचर्या तक।
‘तुम्हारा बेटा अभी यहां है…’, कॉल कर फ़ोन पर देते हैं धमकी
Punjab:पीड़ित परिवारों के मुताबिक, विदेशी नंबरों से कॉल आती है। फोन करने वाले खुद को बड़े गैंग का सदस्य बताते हैं और सीधे बेटे का जिक्र करते हैं।
वह कहां है, किसके साथ है और क्या कर रहा है। जब पिता अपने बेटे से बात करते हैं तो वही लोकेशन कन्फर्म होती है, जिससे उनका डर कई गुना बढ़ जाता है।
जालंधर सिटी और देहात इलाके में पिछले 14 महीनों में करीब 25 रंगदारी के मामले सामने आए हैं।
पुलिस ने इनकी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि कम से कम 5 केस बड़े घरानों से जुड़े हैं, जबकि बाकी अपर मिडिल क्लास परिवारों के हैं। इनमें से 6 मामलों में शिकायतकर्ता इकलौती संतान वाले थे।
डीआईजी नवीन सिंगला का कहना है कि अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत लोगों की खामोशी है। उनके मुताबिक, “डर से नहीं, रिपोर्ट से सुरक्षा मिलती है।”
55 वर्षीय व्यापारी से 75 लाख ठगे
Punjab:55 वर्षीय एक व्यापारी, जिनका एक ही बेटा है, बताते हैं कि बेटे की शादी में खर्च करना उनकी सबसे बड़ी गलती बन गया। शादी के तुरंत बाद जब बेटा-बहू हनीमून से लौट रहे थे, तभी एक विदेशी नंबर से कॉल आई। कॉलर ने खुद को लॉरेंस गैंग का सदस्य बताया और 2 करोड़ रुपये की मांग की।
कुछ ही देर में बेटे-बहू की एयरपोर्ट से ली गई तस्वीरें फोन पर भेज दी गईं। व्यापारी बताते हैं कि वह सदमे में थे। विदेश में बैठे व्यक्ति के पास यह जानकारी कैसे पहुंची?
आखिरकार डर के चलते उन्होंने 75 लाख रुपये एक बैग में डालकर तय स्थान पर पहुंचाए।
पुल के नीचे बाइक सवार दो युवक बैग लेकर फरार हो गए। अब यह व्यापारी अपना कारोबार दुबई शिफ्ट करने की तैयारी कर रहा है।
टिम्मी जैसा हाल होगा की धमकी, करोड़ों वसूले
Punjab: 45 वर्षीय एक अन्य कारोबारी को कॉल आई, “40 लाख तैयार रखो, वरना टिम्मी जैसा हाल होगा।” बेटे की लोकेशन का जिक्र सुनकर वह सन्न रह गए। उन्होंने बिना पीछे मुड़े बताए गए स्थान पर बैग छोड़ दिया।
45 वर्षीय एक अन्य कारोबारी को कॉल आई, “40 लाख तैयार रखो, वरना टिम्मी जैसा हाल होगा।” बेटे की लोकेशन का जिक्र सुनकर वह सन्न रह गए। उन्होंने बिना पीछे मुड़े बताए गए स्थान पर बैग छोड़ दिया।
‘टिम्मी’ का जिक्र दरअसल 7 दिसंबर 2022 को हुए नकोदर के कपड़ा व्यापारी भूपिंदर सिंह उर्फ टिम्मी चावला की हत्या से जुड़ा है। रंगदारी की शिकायत के बावजूद उनकी हत्या कर दी गई थी। अब यही घटना धमकी का हथियार बन गई है।
हाल ही में जालंधर देहात में तीन इकलौती औलाद वाले व्यापारियों से 40-40 लाख रुपये वसूले गए। सभी को एक ही लाइन दोहराई गई—“क्या चाहते हो कि आपका हाल भी टिम्मी जैसा हो?”
पार्सल में बेटे की फोटो और ‘गोली’
50 वर्षीय एक कारोबारी के घर सुबह एक पार्सल मिला। अंदर उनके 25 वर्षीय बेटे की फोटो और एक जिंदा कारतूस था। रात में कॉल आई थी कि अगर, 50 लाख नहीं दिए तो “शूट का ऑर्डर” दे दिया जाएगा।
सुबह 11 बजे दोबारा कॉल आई, “पिस्टल में अभी 17 राउंड बाकी हैं।” यह सुनकर व्यापारी टूट गए। उन्होंने तय लोकेशन पर बैग रखकर पैसे दे दिए। सबसे पहले वह पार्सल में मिली गोली को नहर में फेंक आए।
राज्य में 1506 गैंगस्टर, 750 से ज्यादा बाहर
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पंजाब में कुल 1506 गैंगस्टर सूचीबद्ध हैं। इनमें से 500 से ज्यादा जेल में हैं, जबकि 750 से अधिक जेल से बाहर सक्रिय हैं। 178 गैंगस्टर ‘सबसे खतरनाक’ श्रेणी में आते हैं। करीब 25 अपराधी विदेश से गैंग ऑपरेट कर रहे हैं।
भारत-पाक सीमा से सटे इलाकों, अमृतसर रूरल और तरनतारन, में ही 450 से ज्यादा गैंगस्टर सक्रिय बताए जाते हैं। ये क्षेत्र पहले से ही सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं।
बड़े गैंग्स का जाल
राज्य में सक्रिय प्रमुख गैंग्स में बंबीहा गैंग सबसे बड़ा है, जिसमें 421 गैंगस्टर शामिल बताए जाते हैं।
रिंदा-लंडा गैंग में 308, गोल्डी बराड़ गैंग में 206, जग्गू भगवानपुरिया गैंग में 161 और लॉरेंस गैंग में 129 गैंगस्टर शामिल हैं।
इनमें से कई गैंगस्टर कनाडा, अमेरिका और अन्य देशों से नेटवर्क संचालित कर रहे हैं, जिससे उन्हें पकड़ना और मुश्किल हो जाता है।
खामोशी बन रही अपराधियों की ताकत
पुलिस का मानना है कि जितने केस सामने आए हैं, उससे कहीं ज्यादा घटनाएं दबा दी जाती हैं। कारोबारी वंश खत्म होने के डर से चुप रहते हैं। वे सोचते हैं कि पुलिस में शिकायत करने से खतरा और बढ़ सकता है।

