भारत की आत्मा उसकी संस्कृति, परंपराओं और किसानों में बसती है। इसी भावना को मजबूती से सामने रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मकर संक्रांति, उत्तरायण, पोंगल, भोगी और माघ बिहू जैसे प्रमुख फसल पर्वों पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
अपने संदेशों, पत्रों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री ने न केवल देश की सांस्कृतिक विविधता को सलाम किया, बल्कि किसानों के योगदान को राष्ट्र निर्माण की नींव बताया।
मकर संक्रांति है नए बदलावों का प्रतीक
मकर संक्रांति से पोंगल तक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के नाम लिखे पत्र में मकर संक्रांति को आशा और सकारात्मकता का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि सूर्य का उत्तरायण में प्रवेश जीवन में नए बदलाव, ऊर्जा और आत्मविश्वास का संकेत देता है।
पीएम मोदी ने लिखा कि यह पर्व देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन इसके मूल में एकता, उत्साह और सांस्कृतिक समृद्धि की भावना समान रहती है।
संक्रांति हमें भविष्य की ओर आशावाद और विश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
पीएम मोदी ने किसानों को बताया राष्ट्र की नींव
मकर संक्रांति से पोंगल तक: प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में किसानों और उनके परिवारों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि संक्रांति जैसे फसल पर्व किसानों के जीवन में खास स्थान रखते हैं, क्योंकि यह उनकी मेहनत, त्याग और योगदान का उत्सव है।
पीएम मोदी ने लिखा, यह उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है जो हमें पोषण देते हैं और समाज को मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने कामना की कि यह वर्ष सभी के लिए समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली लेकर आए।
पोंगल पर्व को बताया तमिल परंपराओं का वैश्विक उत्सव
मकर संक्रांति से पोंगल तक: पोंगल के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वनक्कम’ कहकर तमिल समुदाय को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पोंगल को श्रम और प्रकृति के बीच गहरे रिश्ते का प्रतीक बताया।
पीएम मोदी ने कहा कि यह त्योहार कृषि, ग्रामीण जीवन, किसानों की मेहनत और काम की गरिमा का उत्सव है।
परिवारों का एक साथ आना, पारंपरिक व्यंजन बनाना और खुशियां साझा करना पोंगल की आत्मा है, जो पीढ़ियों के बीच रिश्तों को मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि तमिल भाषा दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है और पोंगल आज एक वैश्विक त्योहार के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु से लेकर भारत के अन्य हिस्सों और दुनिया भर में बसे तमिल समुदाय पोंगल को उत्साहपूर्वक मना रहे हैं।
पीएम मोदी ने कामना की कि पोंगल सभी के जीवन में समृद्धि, सफलता और अच्छा स्वास्थ्य लेकर आए।
माघ बिहू पर्व बना असमिया संस्कृति का सजीव प्रतीक
माघ बिहू पर प्रधानमंत्री मोदी ने इसे असमिया संस्कृति का सजीव प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार खुशी, गर्मजोशी, भाईचारे और कृतज्ञता की भावना को मजबूत करता है।
माघ बिहू फसल कटाई के पूरा होने का उत्सव है और यह उन मेहनतकश किसानों के सम्मान का अवसर है जो समाज को बेहतर बनाते हैं।
पीएम मोदी ने सभी के लिए शांति, अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की है।
फसल पर्वों ने दी विविधता में एकता की मिसाल
मकर संक्रांति से पोंगल तक: 14 जनवरी को पूरे देश में अलग-अलग रूपों में फसल और सूर्य से जुड़े त्योहार मनाए जाते हैं।
तमिलनाडु में पोंगल, पंजाब-हरियाणा में लोहड़ी, गुजरात में उत्तरायण की पतंगबाजी, महाराष्ट्र में तिलगुल, उत्तर प्रदेश-बिहार में खिचड़ी पर्व, आंध्र-तेलंगाना में संक्रांति उत्सव और केरल में मकरविलक्कु ये सभी पर्व भारत की विविधता में एकता को दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया की लगभग सभी सभ्यताओं में फसल से जुड़े त्योहार रहे हैं और तमिल संस्कृति में किसान को जीवन की नींव माना गया है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को किसानों के प्रयासों से मजबूती मिल रही है और केंद्र सरकार किसानों को सशक्त बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
भारतीय पर्व ही है भारत की असली पहचान
मकर संक्रांति से पोंगल तक: पीएम मोदी के ये संदेश केवल शुभकामनाएं नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतिबिंब हैं। ये संदेश हमें हमारी जड़ों, किसानों के योगदान, सांस्कृतिक एकता और भविष्य के प्रति आशावाद की याद दिलाते हैं।
संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू जैसे पर्व हमें सिखाते हैं कि जब प्रकृति, परिश्रम और परंपरा एक साथ चलते हैं, तभी राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है।

