Period Health: बहुत-सी महिलाएं सोचती हैं कि अगर उनके पीरियड्स हर महीने समय पर आते हैं तो उनके हार्मोन बिल्कुल सही हैं।
28–30 दिन में नियमित पीरियड्स होना अच्छा संकेत जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शरीर के अंदर सब कुछ पूरी तरह संतुलित ही हो।
शरीर के हार्मोन करते हैं काम
Period Health: महिलाओं का हार्मोन सिस्टम बहुत जटिल होता है। इसमें दिमाग ओवरी, थायरॉइड, एड्रिनल ग्रंथियां और मेटाबॉलिज्म सभी मिलकर काम करते हैं।
कई बार अंदर हल्का असंतुलन होने के बावजूद पीरियड्स समय पर आते रहते हैं।
इसलिए कुछ महिलाओं के पीरियड्स तो नियमित होते हैं, लेकिन उन्हें दर्द, मूड स्विंग या गर्भधारण में परेशानी हो सकती है।
छिपी हो सकती हैं अंदरूनी समस्याएं
ऐसी स्थिति भी होती है जिसमें ओवुलेशन सही समय पर होता है और पीरियड्स भी ठीक आते हैं, लेकिन एक जरूरी हार्मोन कम होने से गर्भ ठहरने में दिक्कत हो सकती है।
कुछ महिलाओं में हल्का पीसीओएस या इंसुलिन रेसिस्टेंस भी हो सकता है, जो बाहर से नजर नहीं आता पर शरीर को प्रभावित करता है।
थायरॉइड या दूसरे हार्मोन की छोटी गड़बड़ी भी बिना पीरियड्स बिगाड़े असर डाल सकती है।
लाइफस्टाइल पर पड़ता है असर
लगातार तनाव, कम नींद और अनियमित खानपान से शरीर में तनाव वाला हार्मोन बढ़ जाता है।
इससे धीरे-धीरे हार्मोन बैलेंस बिगड़ सकता है, भले ही पीरियड्स नियमित आते रहें।
इन संकेतों को करें नजरअंदाज
अगर तेज मूड स्विंग, बहुत दर्द वाले पीरियड्स, हमेशा थकान, सूजन, कम इच्छा या भावनात्मक उतार-चढ़ाव जैसे लक्षण दिखें तो इन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें।
ये संकेत बताते हैं कि शरीर अंदर से संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
नियमित पीरियड्स अच्छा संकेत हैं, लेकिन यही अकेली निशानी नहीं है कि हार्मोन पूरी तरह सही हैं।
शरीर के बाकी संकेतों पर भी ध्यान देना उतना ही जरूरी है।
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