Thursday, January 8, 2026

Paris Paralympics: बढ़ा मरुधरा का मान, पेरिस पैरालिंपिक में अवनी व मोना ने रचा इतिहास

Two daughters of Rajasthan won medals in Paris Paralympics: पेरिस पैरालिंपिक (पैरा ओलिंपिक) में शुक्रवार को प्रदेश की दो बेटियों ने शूटिंग में स्वर्ण और कांस्य पदक जीतकर मरुधरा का मान बढ़ाया। जयपुर की अवनी लेखरा और मोना अग्रवाल ने शूटिंग की एक ही स्पर्धा में भारत को दो मेडल दिलाए। अवनी लेखरा ने स्वर्ण पदक जीता तो मोना अग्रवाल ने कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
अवनी लेखरा का पैरालिंपिक में यह दूसरा गोल्ड मेडल है। इससे पहले वह टोक्यो पैरालिंपिक में भी गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। इसके साथ ही वह पैरालिंपिक में 3 मेडल जीतने वाली भारत की पहली खिलाड़ी बन गई हैं। दोनों खिलाड़ियों को मेडल जीतने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने बधाई दी है।

अवनी ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ फहराया परचम

आर-2 महिला 10 एम एयर राइफल एसएच-1 के फाइनल राउंड में अवनी पहले और मोना तीसरे नंबर पर रहीं। गोल्ड पर निशाना साधने वाली अवनी ने अपना ही पैरालिंपिक रिकॉर्ड भी तोड़ा। टोक्यो पैरालिंपिक में उसने 249.6 पॉइंट हासिल कर पैरालिंपिक रिकॉर्ड बनाया था। इस बार 249.7 पॉइंट हासिल कर नया रिकॉर्ड बनाया। कोरिया की युनरी ली को सिल्वर मेडल मिला। उसका स्कोर 246.8 रहा। मोना अग्रवाल ने 228.7 का स्कोर कर कांस्य मेडल जीता।

मोना ने ढाई साल पहले की थी शूटिंग की शुरुआत

मोना अग्रवाल के परिवार वालों ने बताया कि उसने इसी साल 9 मार्च को अपने करियर के चौथे इंटरनेशनल टूर्नामेंट डब्ल्यूएसपीएस पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीता था। उसने वीमेन्स 10 मीटर एयर राइफल एसएच-1 कैटेगरी में गोल्ड जीतकर 2024 पेरिस पैरालिंपिक का कोटा हासिल किया था। वहीं, इस कैटेगरी में अवनी लखेरा ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इससे पहले मोना ने गोला फेंक और वेट लिफ्टिंग में स्टेट लेवल तक खेला है। मोना ने दिसंबर 2021 में शूटिंग की शुरुआत की थी। मोना अपने जन्म के कुछ महीनों बाद ही पोलियो से पीड़ित हो गई थी। मोना के दो बच्चे हैं।

‘रामचरितमानस की चौपाई ने बढ़ाया जोश’

मेडल जीतने के बाद अवनी और मोना के घर में खुशी का माहौल है। जैसे ही मेडल जीते तो दोनों के घरों पर परिजनों ने ढोल-नगाड़ों के साथ इस जीत को सेलिब्रेट किया। अवनी के पिता प्रवीण लेखरा ने बताया कि जब अवनी पैरालिंपिक खेलों के लिए रवाना हो रही थी, तभी उन्होंने उसे रामचरितमानस की एक चौपाई याद कराई। इस चौपाई से अवनी में एक नया जोश आया और उसने देश के लिए मेडल जीता। कोच चंद्रशेखर ने बताया कि अवनी काफी टैलेंटेड खिलाड़ी है और उन्हें पूरा यकीन था कि इस बार भी देश के लिए वह गोल्ड जीतेगी।

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