योगी सरकार का बड़ा फैसला: उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या धाम और पंचकोसी परिक्रमा मार्ग की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखने के लिए बड़ा निर्णय लिया है।
सरकार ने इन पवित्र मार्गों पर मांसाहारी भोजन की बिक्री और आपूर्ति पर पूर्ण रोक लगाने का आदेश जारी किया है।
सूत्रों के मुताबिक, यह रोक सिर्फ दुकानों, होटलों और रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं होगी।
Zomato, Swiggy और अन्य ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स पर भी नॉन-वेज खाना बेचने और मंगाने पर पाबंदी रहेगी।
सरकार का यह कदम आस्था से जुड़े करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
पंचकोसी परिक्रमा है रामनगरी की शान
पंचकोसी परिक्रमा अयोध्या की सबसे प्राचीन और पवित्र धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। इस परिक्रमा में श्रद्धालु भगवान श्रीराम की नगरी की परिक्रमा कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
इस मार्ग में कई तीर्थ, मंदिर और आश्रम स्थित हैं, जहां शुद्ध सात्विक जीवनशैली का पालन परंपरागत रूप से किया जाता रहा है।
ऐसे में नॉन-वेज भोजन की मौजूदगी को लंबे समय से धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ माना जाता रहा है।
क्या-क्या शामिल है प्रतिबंध में
योगी सरकार का बड़ा फैसला: सरकार के फैसले के अनुसार अयोध्या धाम और पंचकोसी परिक्रमा क्षेत्र में मांस, मछली और अंडे की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और ठेले पर नॉन-वेज नहीं परोसा जाएगा। जोमैटो, स्विगी जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप्स के माध्यम से भी नॉन-वेज डिलीवरी नहीं होगी।
गेस्ट हाउस, होमस्टे और धर्मशालाओं में ठहरने वाले पर्यटकों को भी नॉन-वेज पकाने या मंगाने की अनुमति नहीं होगी।
यह निर्णय केवल व्यवसायिक गतिविधियों पर नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनशैली पर प्रभाव डालेगा।
गेस्ट हाउस हो या होमस्टे, नियम सबके लिए समान
योगी सरकार का बड़ा फैसला: पर्यटन के बढ़ते दबाव के कारण अयोध्या में बड़ी संख्या में गेस्ट हाउस और होमस्टे विकसित हुए हैं।
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक क्षेत्र में स्थित होने के कारण इन पर भी वही नियम लागू होंगे जो अन्य सार्वजनिक स्थलों पर हैं।
कोई भी होमस्टे संचालक या गेस्ट हाउस मालिक नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करने तक का प्रावधान हो सकता है।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली बार ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाओं को भी सीधे तौर पर धार्मिक मर्यादा के दायरे में लाया गया है।
सरकार का मानना है कि अगर ऑनलाइन माध्यम से नॉन-वेज की आपूर्ति जारी रहती है, तो प्रतिबंध का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।
इसलिए ऐप कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर इस क्षेत्र को “नॉन-वेज फ्री ज़ोन” के रूप में चिन्हित करें।
फैसले को लेकर व्यापारियों में रही मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस फैसले को लेकर स्थानीय व्यापारियों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। जहां एक ओर कई दुकानदार और होटल संचालक इसे अयोध्या की पहचान को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं,
वहीं कुछ व्यवसायी इसे अपने कारोबार के लिए चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं।
हालांकि सरकार का साफ कहना है कि धार्मिक स्थल की गरिमा किसी भी आर्थिक लाभ से ऊपर है और व्यापारियों को समय के साथ वैकल्पिक सात्विक व्यंजन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम, खाद्य सुरक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त टीमें गठित की जाएंगी।
नियमित निरीक्षण, औचक छापेमारी और शिकायत निवारण प्रणाली के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी नियम तोड़ने की कोशिश न करे।
उल्लंघन की स्थिति में जुर्माना, लाइसेंस निरस्तीकरण और कानूनी कार्रवाई तक की व्यवस्था की गई है।
आस्था की मर्यादा में विकास की दिशा
योगी सरकार का बड़ा फैसला: राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या वैश्विक धार्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में उभर रही है।
सरकार चाहती है कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु एक शुद्ध, शांत और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव करे।
नॉन-वेज पर प्रतिबंध को इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे अयोध्या की छवि एक आदर्श धार्मिक नगरी के रूप में स्थापित हो सके।
अयोध्या धाम और पंचकोसी परिक्रमा क्षेत्र में नॉन-वेज पर लगाया गया यह प्रतिबंध सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और परंपरा की रक्षा का संकल्प है।
यह फैसला बताता है कि विकास के साथ-साथ धार्मिक मूल्यों का संरक्षण भी उतना ही जरूरी है।
आने वाले समय में यह निर्णय अयोध्या को न केवल आध्यात्मिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित कर सकता है।

