Thursday, January 29, 2026

नवरात्रि के 9 दिनों, कलश स्थापना से लेकर नवमी हवन और दशहरा तक की पूरी जानकारी

22 सितंबर से देवी आराधना के 9 दिवसीय महापर्व नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं, इस बार पंचमी तिथि की वृद्धि होने से नवरात्रि 10 दिनों की होगी जिसका बहुत शुभ फल होगा। इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी इसलिए यह और भी शुभ फल देने वाली नवरात्रि होगी।

इस साल की शारदीय नवरात्रि की पूरी जानकारी

नवरात्र की प्रतिपदा का व्रत सोमवार दिनांक 22 सितम्बर को होगा, अष्टमी व्रत मंगलवार 30 सितंबर को होगा। महानिशा अष्टमी पूजन सोमवार 29 सितंबर की रात्रि में होगा। 1 अक्टूबर को नवमी व्रत, हवन और नवरात्र पूर्णाहुति होगी।

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नवरात्रि कलश स्थापना मुहूर्त्त –

प्रतिपदा, सोमवार 22 सितम्बर को रात्रि 12:57 बजे तक है। इस साल चित्रा नक्षत्र व वैधृति का योग नहीं है इसलिए कलश स्थापना का भरपूर मुहूर्त्त मिलेगा। कलश स्थापन प्रातः काल व अभिजित मुहूर्त दोनों दोनों में किया जा सकता है। कलश स्थापना मुहूर्त्त

प्रातःकाल – 06:17-10:17
अभिजित मुहूर्त्त – 11:55-12:4

इस दिन कलश स्थापन, सप्तशती पाठ, ध्वजारोपण, शैलपुत्री देवी दर्शन और महाराजा अग्रसेन जयन्ती है।

द्वितीया, मंगलवार 23 सितम्बर रात्रि के 02:24 बजे तक है
ब्रह्मचारिणी देवी दर्शन

तृतीया, बुधवार 24 सितम्बर रात्रि के 04:11 बजे तक है
चन्द्रघण्टा देवी दर्शन

चतुर्थी, गुरुवार 25 सितम्बर अगले दिन सुबह 06:12 बजे तक है
कूष्माण्डा देवी दर्शन, श्रीगणेश चतुर्थी व्रत

पंचमी, शुक्रवार 26 सितम्बर पूरे दिन है
उपांग ललिता व्रत

पंचमी, शनिवार 27 सितम्बर प्रातः 08:17 बजे तक है
स्कन्दमाता देवी दर्शन

षष्ठी, रविवार 28 सितम्बर प्रातः 10:15 बजे तक है
कात्यायनी देवी दर्शन

सप्तमी, सोमवार 29 सितम्बर 11:57 बजे तक है
कालरात्रि देवी दर्शन, निशीथव्यापिनी अष्टमी महानिशापूजा, सरस्वती आवाहन मूल नक्षत्र में होगा, बिल्व सप्तमी

अष्टमी, मंगलवार 30 सितम्बर 13:15 बजे तक है
महागौरी देवी दर्शन, सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि होने से महाष्टमी (दुर्गाष्टमी) व्रत, सरस्वती पूजन आज पूर्वाषाढ़ नक्षत्र में होगा

नवमी, बुधवार 1 अक्टूबर 14:06 बजे तक है
नवरात्र पाठ पूर्णाहुति हवन, महाबलिदान, सिद्धिदात्री देवी दर्शन, महानवमी व्रत, विसर्जन, सरस्वती बलिदान उत्तराषाढ़ नक्षत्र में

विजयदशमी, गुरुवार 2 अक्टूबर 14:26 बजे तक है
दशहरा, श्री दुर्गा-सरस्वती आदि का प्रतिमा विसर्जन (श्रवण नक्षत्र में), नवरात्र व्रत पारण, शस्त्रपूजन एवं अपराजिता पूजन

यह सभी जानकारी हमें राजस्थान के एकमात्र सूर्यसिद्धांतीय जयादित्य पंचांग के सम्पादक ज्योतिषाचार्य मुदित मित्तल द्वारा दी गई है।

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नवरात्रि में प्रतिदिन देवी को यह चढाएं

22 सितंबर नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री को गाय का शुद्ध घी अर्पित करने से आरोग्य मिलता है व सभी रोग दूर होकर शरीर निरोगी रहता है।

23 सितंबर नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाने से वे प्रसन्न होती हैं और सभी की आयु बढ़ाती हैं।

24 सितंबर नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चन्द्रघण्टा को  दूध या दूध से बनी मिठाई, खीर का भोग लगाना शुभ होता है। इससे दुखों की मुक्ति मिलती है।

25 सितंबर नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा को मालपुए का भोग लगाने से वे प्रसन्न होती हैं। मालपुए का मंदिर में भी दान करना चाहिए। ऐसा करने से बुद्धि और निर्णयशक्ति बढ़ती है।

27 सितंबर नवरात्रि के पाँचवे दिन मां स्कंदमाता को केले चढ़ाना बहुत अच्छा होता है। ऐसा करने से किसी चीज का अभाव नहीं रहता और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

28 सितंबर नवरात्रि के छठे दिन कात्यायनी मां को शहद का भोग लगाना चाहिए। इससे मनुष्य का तेज बढ़ता है और व्यक्तित्व आकर्षक बन जाता है।

29 सितंबर नवरात्रि के सप्तम दिन देवी मां को गुड़ का भोग चढ़ाने व गुड़ दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है और अचानक आने वाले संकटों से रक्षा भी होती है।

30 सितंबर नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी को नारियल और हलवे का भोग लगाएं। इससे धन व सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है और सन्तान के लिए भी शुभ होता है।

1 अक्तूबर नवरात्रि के अंति‍म दिन माँ सिद्धिदात्री को खीर का भोग लगाने से रिद्धि सिद्धि की प्राप्ति होती है और माँ की कृपा से जीवन में कुछ भी असम्भव नहीं रहता।

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Mudit
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लेखक 'भारतीय ज्ञान परंपरा' के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर विश्लेषणात्मक लेखन कर रहे हैं। सांस्कृतिक सन्दर्भ में समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास के प्रमुख प्रश्नों के रिसर्च बेस्ड प्रस्तुतिकरण और समाधान में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। वे विषयों को केवल घटना के स्तर पर नहीं, बल्कि उनके ऐतिहासिक आधार, वैचारिक पृष्ठभूमि और दीर्घकालीन प्रभाव के स्तर पर परखते हैं। इसी कारण उनके राष्ट्रवादी लेख पाठक को नई दृष्टि और वैचारिक स्पष्टता भी देते हैं। इतिहास, धर्म और संस्कृति पर उनकी पकड़ व्यापक है। उनके प्रामाणिक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं। उनका शोधपरक लेखन सार्वजनिक संवाद को अधिक तथ्यपरक और अर्थपूर्ण बनाने पर केंद्रित है।
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