Thursday, February 5, 2026

नागालैंड: भारत का एक ऐसा गांव जहां दुकानों पर नहीं बैठता दुकान वाला

नागालैंड: आज के दौर में जहां चारों ओर फरेब, धोखाधड़ी और अपराध के किस्से सुनने को मिलते हैं,

वहीं भारत का एक छोटा सा गांव अपनी ईमानदारी और सादगी से पूरे देश के लिए मिसाल बन गया है।

इस गांव में न कोई दुकानदार होता है और न ही दुकानों पर ताले लगते हैं।

लोग खुद अपनी जरूरत का सामान चुनते हैं, उसकी कीमत चुकाते हैं और ईमानदारी से पैसे वहीं रख देते हैं।

इतना ही नहीं, इस गांव में कभी चोरी या ठगी जैसी कोई घटना देखने को नहीं मिली।

यह अद्भुत गांव है नागालैंड का खोनोमा गांव, जो अपनी सच्चाई और विश्वास की संस्कृति से पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

नागालैंड: खोनोमा की ईमानदारी की परंपरा

नागालैंड की राजधानी कोहिमा से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित खोनोमा गांव में दुकानों पर दुकानदार मौजूद नहीं होते।

यहां दुकानें खुली रहती हैं, लेकिन कोई चोरी नहीं करता। लोग अपनी जरूरत की चीज़ें उठाते हैं, और जितनी कीमत होती है उतने पैसे वहीं रख जाते हैं।

इस गांव में यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही जीवनशैली का हिस्सा है।

खोनोमा के लोग मानते हैं कि “ईमानदारी इंसान की सबसे बड़ी पूंजी है।” यहां के बुजुर्ग बच्चों को शुरू से यही सिखाते हैं कि झूठ बोलना, किसी का हक छीनना या धोखा देना गलत है।

यही शिक्षा इस गांव की जड़ों में इतनी गहराई तक बैठ चुकी है कि यहां अपराध जैसी बात सोच पाना भी नामुमकिन लगता है।

गांव के लोगों का कहना है कि वे सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए जिम्मेदार हैं। यही सोच उन्हें एक-दूसरे के प्रति ईमानदार और भरोसेमंद बनाती है।

भारत का पहला “ग्रीन विलेज”

खोनोमा गांव सिर्फ अपनी ईमानदारी के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए भी जाना जाता है। यह गांव भारत का पहला “ग्रीन विलेज” (Green Village) कहलाता है।


यहां के लोग जंगलों, पेड़ों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को अपना धर्म मानते हैं।

गांव में सफाई और हरियाली को लेकर खास नियम बनाए गए हैं, जिन्हें हर निवासी सख्ती से पालन करता है। यही कारण है कि यहां की हवा, मिट्टी और वातावरण बेहद स्वच्छ और शांत है।

यह गांव न सिर्फ ईमानदारी बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी आदर्श उदाहरण बन गया है, जिसकी मिसाल देश-विदेश के लोग देते हैं।

खोनोमा कैसे पहुंचें?

अगर आप इस अनोखे और सच्चाई से भरे गांव की यात्रा करना चाहते हैं, तो पहले नागालैंड की राजधानी कोहिमा पहुंचना होगा। कोहिमा से खोनोमा गांव करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर है।


कोहिमा का नजदीकी रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट ड‍िमापुर में है। ड‍िमापुर से आप टैक्सी या बस के जरिए कोहिमा पहुंच सकते हैं, और वहां से आसानी से खोनोमा का सफर तय कर सकते हैं।

क्यों है यह गांव खास?

खोनोमा की खासियत सिर्फ उसकी खूबसूरती नहीं, बल्कि वहां के लोगों का विश्वास और नैतिकता है।

जहां बाकी दुनिया सुरक्षा और ताले में विश्वास रखती है, वहीं यह गांव ईमानदारी और भरोसे पर टिका हुआ है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article