मोकामा दुलारचंद हत्याकांड: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पटना के मोकामा में जन सुराज पार्टी के नेता दुलारचंद यादव की हत्या ने सियासी हलचल तेज कर दी है।
मोकामा दुलारचंद हत्याकांड: हत्या के बाद जन सुराज पार्टी और जेडीयू के समर्थकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
वहीं, पुलिस ने इस मामले में अब तक तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं, लेकिन हैरानी की बात ये है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट दुलारचंद के पोते की एफआईआर से मेल नहीं खा रही।
पोते नीरज की FIR, ‘अनंत सिंह ने दादा को गोली मारी’
मोकामा दुलारचंद हत्याकांड: मृतक के पोते नीरज कुमार ने पहली एफआईआर (संख्या 110/25) भदौर थाना में दर्ज कराई। नीरज ने आरोप लगाया कि जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और गाली-गलौज करने लगे।
उनके मुताबिक, अनंत सिंह ने अपनी कमर से पिस्टल निकाली और दुलारचंद यादव के पैर में गोली मार दी। इसके बाद अनंत के साथियों ने उन्हें गाड़ी से कुचल दिया।
नीरज की एफआईआर में नामजद आरोपी हैं, अनंत सिंह, राजवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, छोटन सिंह और कंजम सिंह।
नीरज का दावा है कि घटना के वक्त वह खुद मौके पर मौजूद था और सब कुछ उसकी आंखों के सामने हुआ।
अनंत सिंह की पलटवार FIR, ‘हम पर ही हमला हुआ था’
मोकामा दुलारचंद हत्याकांड: इस मामले में दूसरी एफआईआर (संख्या 111/25) अनंत सिंह के समर्थक जीतेंद्र की ओर से दर्ज कराई गई। इसमें जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी और उनके समर्थकों पर हमला करने का आरोप लगाया गया है।
इस एफआईआर में पीयूष प्रियदर्शी, लखन महतो, बाजो महतो, ईश्वर महतो और अजय महतो समेत कई अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
आरोप है कि जन सुराज के समर्थकों ने अनंत सिंह के काफिले पर हमला किया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
तीसरी FIR पुलिस की ओर से, दोनों पक्षों की हिंसा पर केस
मोकामा दुलारचंद हत्याकांड: पुलिस ने तीसरी FIR खुद दर्ज की है, जिसमें दोनों पक्षों की हिंसक झड़प का जिक्र है। पटना (ग्रामीण) पुलिस का कहना है कि अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच जारी है।
SP विक्रम सिहाग के मुताबिक, “पहली नजर में यह स्पष्ट है कि मौत गोली लगने से नहीं हुई। बाकी पहलुओं की जांच की जा रही है।”
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाई उलझन, ‘गोली घातक नहीं थी’
मोकामा दुलारचंद हत्याकांड: मामले में सबसे चौंकाने वाली बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, दुलारचंद की मौत गोली लगने से नहीं हुई।
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर अजय कुमार ने बताया कि गोली पैर में लगी थी, लेकिन वह जानलेवा नहीं थी। उन्होंने कहा, “गोली से मृत्यु नहीं हुई है, विस्तृत रिपोर्ट पुलिस को सौंपी जाएगी।”
अब सवाल उठ रहा है कि अगर गोली मौत की वजह नहीं थी, तो फिर दुलारचंद की मौत कैसे हुई? क्या पोते का बयान गलत है या फिर कहानी में कोई छिपा मोड़ है?
चुनावी मैदान में गहराई साजिश की गूंज
मोकामा दुलारचंद हत्याकांड: मोकामा विधानसभा सीट से यह मामला अब चुनावी बहस का केंद्र बन गया है। जन सुराज पार्टी इसे राजनीतिक हत्या बता रही है, जबकि जेडीयू पक्ष कह रहा है कि यह झड़प के दौरान हुई दुर्घटना थी।
वहीं, सोशल मीडिया पर इस केस को लेकर कई तरह की थ्योरीज़ घूम रही हैं।
कोई इसे “राजनीतिक बदले” से जोड़ रहा है तो कोई “पार्टी फूट” का नतीजा बता रहा है।
आखिर झूठ कौन बोल रहा है?
मोकामा दुलारचंद हत्याकांड: तीन एफआईआर, अलग-अलग बयान और अब पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से उलझी ये कहानी बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।
पोते नीरज के बयान पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी है।

