मिडिल ईस्ट में महायुद्ध: नई दिल्ली/वॉशिंगटन: मिडिल ईस्ट का युद्ध अब उस खतरनाक मुकाम पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी का रास्ता नजर नहीं आ रहा।
एक तरफ अमेरिका ने ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे की कमर तोड़ने के लिए अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया है, तो दूसरी तरफ ईरान ने पलटवार करते हुए अमेरिका की अर्थव्यवस्था की जान कही जाने वाली 18 दिग्गज टेक कंपनियों को ‘मिटा देने’ का अल्टीमेटम दे दिया है।
इस्फहान में ‘बंकर बस्टर’ का कहर: परमाणु कार्यक्रम पर सीधी चोट
अमेरिकी वायुसेना ने हाल ही में ईरान के सबसे सुरक्षित शहर इस्फहान को निशाना बनाया।
इस हमले की सबसे बड़ी बात यह थी कि इसमें 2,000 पाउंड के ‘बंकर बस्टर’ (Bunker Buster) बमों का इस्तेमाल किया गया।
ये बम विशेष रूप से जमीन के नीचे सैकड़ों फीट गहरे कंक्रीट के बंकरों को भेदने के लिए बनाए गए हैं।
11 परमाणु बमों का खतरा खत्म? खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्फहान की अंडरग्राउंड फैसिलिटी में करीब 540 किलो संवर्धित यूरेनियम छिपा था।
यह मात्रा 11 परमाणु बम बनाने के लिए काफी थी। इस हमले का मुख्य मकसद ईरान की ‘न्यूक्लियर क्लॉक’ को पूरी तरह तबाह करना था।
नारंगी आसमान और महाविस्फोट: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस हमले का वीडियो साझा किया, जिसमें रात के अंधेरे में एक के बाद एक कई सेकेंडरी धमाके होते दिख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन धमाकों की तीव्रता बताती है कि निशाना सटीक लगा है और ईरान का मुख्य गोला-बारूद डिपो मलबे में तब्दील हो चुका है।
ईरान का पलटवार: 18 अमेरिकी टेक कंपनियाँ ‘हिट लिस्ट’ में
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध: इस्फहान पर हुए हमले के जवाब में ईरान की सेना IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स) ने युद्ध को एक नया मोड़ दे दिया है। ईरान ने अब सैन्य ठिकानों के बजाय अमेरिका की आर्थिक और तकनीकी ताकत पर हमला करने की घोषणा की है।
ईरान ने 18 बड़ी कंपनियों की सूची जारी की है, जिन्हें 1 अप्रैल की रात 8 बजे तक का समय दिया गया है। ईरान ने इन कंपनियों को ‘आतंकवादी’ घोषित किया है।
निशाने पर कौन है? इस लिस्ट में एप्पल (Apple), गूगल (Google), मेटा (Meta), टेस्ला (Tesla), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), एनवीडिया (Nvidia), और इंटेल (Intel) जैसे नाम शामिल हैं।
ईरान का दावा है कि इन कंपनियों ने अपने डेटा और सैटेलाइट तकनीक के जरिए ईरानी कमांडरों की ‘टारगेटेड हत्याओं’ में अमेरिका और इजरायल की मदद की है। IRGC ने चेतावनी दी है कि वे इन कंपनियों को ‘पत्थर युग’ में भेज देंगे और इनके आसपास रहने वाले लोग 1 किमी का दायरा खाली कर दें।
ट्रंप का ‘एग्जिट प्लान’ और सहयोगियों को दो टूक
इतने बड़े तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप का रुख काफी हैरान करने वाला है। व्हाइट हाउस से दिए अपने बयान में ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका इस युद्ध को बहुत लंबा नहीं खींचना चाहता।
“हम ईरान को कई दशक पीछे धकेल रहे हैं ताकि वह भविष्य में कभी परमाणु हथियार न बना सके। हमारा काम लगभग पूरा हो गया है और 2 से 3 हफ्तों में अमेरिकी सेना वापस लौट सकती है।” – डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उन्हें ईरान के साथ किसी नई ‘डील’ (Deal) में कोई दिलचस्पी नहीं है। उनका लक्ष्य केवल ईरान की सैन्य क्षमता को पंगु बनाना है।
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध: साथ ही, उन्होंने फ्रांस जैसे मित्र देशों को भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर उन्हें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई चाहिए, तो वे अपनी सेना खुद भेजें; अमेरिका अब किसी और की ‘ऊर्जा सुरक्षा’ की जिम्मेदारी नहीं उठाएगा।
क्या होगा वैश्विक असर?
यह युद्ध अब केवल दो देशों के बीच नहीं रहा। यदि ईरान 1 अप्रैल की अपनी धमकी पर अमल करता है, तो पूरी दुनिया की सप्लाई चेन और इंटरनेट अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो सकती है। वहीं, अगर इस्फहान जैसे हमलों से ईरान की सैन्य सप्लाई लाइन टूटती है, तो वह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा।
भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हम ‘पीक प्रेशर’ (Peak Pressure) के दौर में हैं। ट्रंप की रणनीति ‘शॉर्ट एंड शार्प’ हमलों की है, ताकि ईरान को इतना कमजोर कर दिया जाए कि वह बिना किसी औपचारिक संधि के ही पीछे हटने पर मजबूर हो जाए।
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध: अब सवाल यह है कि क्या 1 अप्रैल की रात दुनिया एक और बड़े साइबर या फिजिकल हमले की गवाह बनेगी, या युद्ध विराम की ओर कदम बढ़ेंगे?
BY: Snigdha
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