रियल एस्टेट पर मिडिल ईस्ट तनाव का असर
बढ़ते तनाव ने रियल एस्टेट सेक्टर की चिंता बढ़ाई
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ने लगा है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो घर खरीदना और महंगा हो सकता है। साथ ही कई निर्माणाधीन परियोजनाओं के पजेशन में देरी की आशंका भी बढ़ गई है।
नई दिल्ली में 24 मार्च 2026 को सामने आई इस स्थिति ने डेवलपर्स और खरीदारों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। रियल एस्टेट उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि लंबे समय तक बना युद्ध जैसा माहौल निर्माण लागत, सप्लाई और परियोजनाओं की रफ्तार पर सीधा असर डाल सकता है।
क्रेडाई और नारेडको ने दी लागत बढ़ने की चेतावनी
रियल एस्टेट डेवलपर्स के संगठन क्रेडाई और नारेडको ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबा संघर्ष निर्माण लागत को ऊपर ले जा सकता है। ईंधन और माल ढुलाई महंगी होने से स्टील, टाइल्स और दूसरी जरूरी सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा है।
दोनों संगठनों का कहना है कि कच्चे तेल के ऊंचे दाम और लॉजिस्टिक्स में आ रही रुकावटें पूरे निर्माण क्षेत्र पर दबाव बना रही हैं। स्टील समेत कई जरूरी निर्माण सामग्रियों की लागत बढ़ने से डेवलपर्स के मुनाफे पर असर पड़ रहा है और परियोजनाओं की व्यवहारिकता भी प्रभावित हो सकती है।
सामग्री की कमी से परियोजनाओं की समय सीमा पर दबाव
करीब 20 हजार डेवलपर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले इन संगठनों ने आशंका जताई है कि निर्माण सामग्री की संभावित कमी से परियोजनाओं को पूरा करने में देरी हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार स्टील, तार, पाइप और कांच जैसी अहम सामग्रियों की उपलब्धता पहले से प्रभावित दिखाई दे रही है।
ईंधन से जुड़ी चुनौतियों का असर केवल भारी निर्माण सामग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि सिरेमिक निर्माण जैसे क्षेत्र भी इसकी चपेट में हैं। ऐसे में डेवलपर्स को लागत, उपलब्धता और समय तीनों स्तर पर दबाव झेलना पड़ सकता है, जिसका असर खरीदारों तक पहुंचेगा।
लंबे संघर्ष की स्थिति में और महंगा हो सकता है निर्माण
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो निर्माण लागत में और तेजी आ सकती है। इसका सीधा असर परियोजनाओं की समय सीमा पर पड़ेगा और कई योजनाओं का काम धीमा हो सकता है, जिससे पजेशन मिलने में अपेक्षा से अधिक देर हो सकती है।
इससे पहले एनारॉक के एक विश्लेषण में भी कहा गया था कि मार्च की शुरुआत से हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने रियल एस्टेट सेक्टर को प्रभावित किया है। इससे निर्माण सामग्री महंगी हुई, सप्लाई चेन बाधित हुई और परियोजनाओं में देरी या रुकावट का जोखिम बढ़ गया।
बड़े शहरों और लग्जरी हाउसिंग पर ज्यादा असर की आशंका
स्टील की छड़ों की बढ़ती कीमतों का असर खास तौर पर मुंबई, दिल्ली एनसीआर और हैदराबाद जैसे ऊंची इमारतों वाले बाजारों में दिखाई दे सकता है। इन शहरों में निर्माण की लागत अधिक बढ़ने की आशंका है, क्योंकि यहां संरचनात्मक सामग्री की खपत सामान्य बाजारों से ज्यादा रहती है।
इस दबाव का असर लग्जरी हाउसिंग सेगमेंट पर भी पड़ सकता है। आशंका जताई गई है कि डेवलपर्स दरों में 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी कर सकते हैं। ऐसे में सपनों का घर खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए आने वाले समय में लागत और बढ़ सकती है।

