घूसखोर पंडित, यह नाम सुनते ही असहजता होना स्वाभाविक है। लेकिन बॉलीवुड और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए विवादित टाइटल अब कोई नई बात नहीं रह गई है।
इस बार एक बार फिर क्रिएटिव फ्रीडम के नाम पर बेहद सॉफ्ट लेकिन प्रभावशाली तरीके से पूरे ब्राह्मण समाज को भ्रष्टाचार से जोड़ने की कोशिश की गई।
सवाल यह है कि क्या किसी पूरी जाति की पहचान को एक नकारात्मक विशेषण के साथ जोड़ देना अभिव्यक्ति की आज़ादी कहलाएगा?
मनोज बाजपेयी और नीरज पांडेय की फिल्म पर उठा सवाल
घूसखोर पंडित विवाद: इस फिल्म में लीड रोल में मनोज बाजपेयी हैं और निर्देशन नीरज पांडेय का है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही ब्राह्मण समाज से आते हैं, इसके बावजूद ऐसा शीर्षक चुना गया।
विवाद तब और गहरा गया जब नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताई और एफआईआर दर्ज कराई गई।
इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर अदालतों तक इस कथित प्रोपेगैंडा पर सवाल उठने लगे।
पहली बार नहीं, पंडित की छवि बार-बार क्यों?
घूसखोर पंडित विवाद: यह कोई पहली घटना नहीं है जब फिल्मों या वेब कंटेंट में ‘पंडित’ शब्द को नकारात्मक अर्थों में पेश किया गया हो।
कभी लालची, कभी धूर्त, कभी पाखंडी और अब सीधे भ्रष्टाचार से जोड़ दिया गया।
‘पोंगा पंडित’ जैसे शब्द पहले भी सामने आते रहे हैं, जिन्हें हर बार व्यंग्य, कॉमेडी या आर्टिस्टिक फ्रीडम कहकर टाल दिया गया। लेकिन अब देश यह पूछ रहा है कि क्या किसी और धर्म या जाति के नाम के साथ ऐसा टाइटल रखने की हिम्मत दिखाई जा सकती थी?
मायावती का तीखा बयान: “यह दुख और चिंता की बात”
घूसखोर पंडित विवाद: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि ब्राह्मणों को ‘घूसखोर’ बताकर पूरे देश में उनका अपमान किया जाना बेहद दुखद और चिंताजनक है।
मायावती ने केंद्र सरकार से इस जातिसूचक फिल्म पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की और कहा कि इससे पूरे ब्राह्मण समाज में जबरदस्त रोष है।
यूपी में एफआईआर, पुलिस का सख्त रुख
लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में फिल्म के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
आरोप है कि फिल्म का शीर्षक जातिगत भावनाओं को आहत करता है और सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है।
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने अपने बयान में कहा कि किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और समाज में वैमनस्य फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सोशल मीडिया पर उबाल और #ShameOnNetflix ट्रेंड
फिल्म का टीज़र सामने आते ही सोशल मीडिया पर गुस्सा फूट पड़ा। #ShameOnNetflix ट्रेंड करने लगा और लोगों ने ओटीटी प्लेटफॉर्म से सीधे सवाल पूछने शुरू कर दिए।
दबाव इतना बढ़ा कि अंततः दिल्ली हाईकोर्ट में निर्देशक को आपत्तिजनक नाम और उससे जुड़े प्रचार सामग्री हटाने की घोषणा करनी पड़ी।
सिर्फ टाइटल नहीं, एक नैरेटिव की हार
घूसखोर पंडित विवाद: लोगों का मानना है कि यह सिर्फ़ एक फिल्म के टाइटल का हटना नहीं है, बल्कि उस पुराने नैरेटिव की हार है जो सालों से बिना सवाल उठे चलता आ रहा था।
‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘धुरंधर’ जैसी फिल्मों के बाद उम्मीद जगी थी कि बॉलीवुड ज़मीनी सच्चाइयों की ओर लौटेगा, लेकिन ‘घूसखोर पंडित’ जैसे नामों ने उस उम्मीद पर सवाल खड़े कर दिए।
ये भी पढ़ें: मजहबियों ने की हिंदू युवक की पिटाई, माथे से पोंछा तिलक और दबाई गर्दन

