Monday, March 2, 2026

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की मौत, कभी था इजरायल के नक्शे को मिटाने का ख्वाब

ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की मौत: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बीच एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है।

रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई के साथ-साथ देश के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की भी मौत हो गई है।

हालांकि इन खबरों को लेकर आधिकारिक स्तर पर पूरी तरह स्पष्ट पुष्टि अभी सामने नहीं आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस घटना को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं।

अहमदीनेजाद के घर पर हुआ हमला

बताया जा रहा है कि महमूद अहमदीनेजाद पर हमला उनके घर पर किया गया। उनका निवास तेहरान के जिस इलाके में बताया जा रहा है, वहां सुरक्षा व्यवस्था पहले से कड़ी थी।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें कुछ समय पहले नजरबंद किया गया था। कहा गया कि उन्होंने सत्ता के अंदरूनी ढांचे में बदलाव की कोशिश की थी,

जिसे सरकार ने गंभीरता से लिया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हमले के बाद से राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

ईरान का परमाणु कार्यक्रम, वैश्विक बहस

महमूद अहमदीनेजाद ईरान की राजनीति में एक बेहद विवादित और चर्चित चेहरा रहे हैं। उन्होंने साल 2005 से 2013 तक दो कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद संभाला।

उनके शासनकाल में ईरान की विदेश नीति अधिक आक्रामक और टकराव वाली मानी जाती थी। खासकर अमेरिका और इजरायल के प्रति उनका रुख काफी सख्त रहा।

उन्होंने कई बार ऐसे बयान दिए जिनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हुआ। इजरायल के खिलाफ उनकी तीखी टिप्पणी विश्व राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रही।

उनके कार्यकाल के दौरान ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी वैश्विक बहस का मुद्दा बना। पश्चिमी देशों ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए।

इन प्रतिबंधों का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा और देश के भीतर भी असंतोष बढ़ा।

अहमदीनेजाद का मानना था कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर आगे बढ़ने का पूरा अधिकार है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता था।

पूरे देश में विरोध

साल 2009 का राष्ट्रपति चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का सबसे विवादित अध्याय रहा। चुनाव परिणाम आने के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। यह आंदोलन बाद में “ग्रीन मूवमेंट” के नाम से जाना गया।

सुरक्षा बलों ने इन प्रदर्शनों को सख्ती से दबाया, जिससे कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई।

अहमदीनेजाद की छवि एक ऐसे नेता की रही जो खुलकर बोलते थे और पश्चिमी शक्तियों को सीधे चुनौती देते थे।

उनके समर्थक उन्हें राष्ट्रवादी नेता मानते थे, जबकि आलोचक उन्हें कट्टर और टकराव की राजनीति करने वाला चेहरा बताते रहे।

राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी वे समय-समय पर राजनीतिक बयान देते रहे और सुर्खियों में बने रहे।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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