Sunday, March 15, 2026

महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्ती: ‘लव जिहाद’ रोकने के लिए आया नया कानून, ब्रेनवॉशिंग से लेकर बच्चों के धर्म तक तय होंगे नियम

महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्ती: महाराष्ट्र में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए सरकार ने एक सख्त कानून की दिशा में कदम बढ़ाया है। महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 को विधानसभा में पेश कर दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य लालच, धोखाधड़ी, दबाव या झाँसा देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है।

इस प्रस्तावित कानून में ऐसे मामलों को गंभीर अपराध माना गया है और दोषी पाए जाने पर कठोर सजा का प्रावधान किया गया है।

सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रेम संबंधों के नाम पर जबरन या छलपूर्वक धर्मांतरण के कई मामले सामने आए हैं।

इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कानून लाया गया है, ताकि विशेष रूप से महिलाओं और कमजोर वर्गों को ऐसे मामलों से सुरक्षा मिल सके।

अवैध धर्मांतरण पर सख्त सजा का प्रावधान

महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्ती: प्रस्तावित कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति लालच, बहला-फुसलाकर या दबाव डालकर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो उसे 7 साल तक की जेल और 1 लाख से 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

यदि मामला महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति-जनजाति या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति से जुड़ा होता है, तो सजा और अधिक कड़ी हो सकती है।

इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति बार-बार अवैध धर्मांतरण में शामिल पाया जाता है, तो उसे 10 साल तक की सजा दी जा सकती है।

धर्म बदलने से पहले 60 दिन की सूचना अनिवार्य

महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्ती: विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी।

इस सूचना में व्यक्ति का नाम, उम्र, वर्तमान धर्म और जिस धर्म को वह अपनाना चाहता है, उससे जुड़ी जानकारी देना जरूरी होगा।

इसके बाद जिला प्रशासन यह जांच करेगा कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव, धोखाधड़ी या लालच के कारण तो नहीं किया जा रहा। जांच पूरी होने के बाद ही धर्म परिवर्तन को मान्यता दी जाएगी।

ब्रेनवॉशिंग को भी माना जाएगा अपराध

कानून के मुताबिक यदि किसी को शिक्षा, प्रचार या धार्मिक संदेशों के माध्यम से इस तरह प्रभावित किया जाता है कि वह अपना धर्म बदलने के लिए प्रेरित हो जाए, तो उसे अवैध प्रभाव माना जा सकता है।

इसके अलावा किसी एक धर्म को दूसरे धर्म से बेहतर बताना या किसी धर्म की परंपराओं को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करना भी कानून के तहत जांच के दायरे में आ सकता है।

धर्मांतरण से पैदा हुए बच्चों के धर्म पर भी नियम

महाराष्ट्र में धर्मांतरण पर सख्ती: विधेयक में उन मामलों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है, जहाँ किसी महिला का जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन कराकर विवाह कराया जाता है।

ऐसी स्थिति में अगर उस विवाह से बच्चा जन्म लेता है, तो उस बच्चे को मां के मूल धर्म का माना जाएगा, यानी वह धर्म जो महिला ने धर्म परिवर्तन से पहले अपनाया हुआ था।

इसके साथ ही बच्चे को माता-पिता की संपत्ति से भरण-पोषण का अधिकार भी मिलेगा।

पुलिस को दी गई विशेष कार्रवाई की शक्ति

इस कानून में पुलिस को विशेष अधिकार दिए गए हैं। यदि पुलिस को यह संदेह होता है कि धर्म परिवर्तन दबाव या धोखे से कराया गया है, तो वह बिना औपचारिक शिकायत के भी स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकती है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति पर शिकायत दर्ज कराने का दबाव न हो।

लालच और प्रलोभन की परिभाषा को किया गया विस्तृत

विधेयक में “लालच” या “प्रलोभन” की परिभाषा को पहले से अधिक व्यापक बना दिया गया है।

यदि किसी को पैसा, गिफ्ट, नौकरी, बेहतर जीवन का वादा, या धार्मिक संस्थानों द्वारा मुफ्त शिक्षा जैसी सुविधाओं के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जाता है, तो इसे अवैध माना जा सकता है।

इसके अलावा किसी गरीब व्यक्ति को शादी का वादा करना या दैवी उपचार का झांसा देना भी इस कानून के तहत अपराध माना जाएगा।

मास कन्वर्जन पर भी कड़ी कार्रवाई

अगर दो या उससे अधिक लोग एक साथ धर्म परिवर्तन करते हैं, तो उसे “मास कन्वर्जन” माना जाएगा।

ऐसे मामलों में आयोजकों और संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। दोबारा ऐसा करने पर 7 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

संस्थाओं के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान

यदि कोई संस्था या संगठन धर्मांतरण में शामिल पाया जाता है, तो सरकार उसके पंजीकरण को रद्द कर सकती है।

साथ ही संस्था से जुड़े जिम्मेदार व्यक्तियों को 7 साल तक की जेल की सजा भी हो सकती है।

कई राज्यों में पहले से लागू हैं ऐसे कानून

पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों ने धर्मांतरण को लेकर कानून बनाए हैं।

2017 से अब तक झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और राजस्थान जैसे राज्यों में इस प्रकार के कानून लागू किए जा चुके हैं।

इन सभी कानूनों का घोषित उद्देश्य जबरदस्ती, धोखाधड़ी या लालच के माध्यम से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।

सिविल सोसाइटी संगठनों ने जताई आपत्ति

हालाँकि महाराष्ट्र में प्रस्तावित इस कानून को लेकर विरोध की आवाजें भी उठ रही हैं। राज्य की लगभग 35 सिविल सोसाइटी संगठनों ने इस विधेयक का विरोध किया है।

इन संगठनों का कहना है कि धर्म परिवर्तन से पहले 60 दिन की सूचना देना और प्रशासन से अनुमति लेना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन हो सकता है।

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और वकीलों का मानना है कि इस कानून का इस्तेमाल महिलाओं को अपनी पसंद के साथी से शादी करने से रोकने के लिए किया जा सकता है।

समर्थकों का तर्क: सुरक्षा के लिए जरूरी कानून

दूसरी ओर कानून के समर्थकों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति सच में अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो 60 दिन पहले सूचना देने या बाद में पंजीकरण कराने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

उनका मानना है कि यह कानून उन मामलों को रोकने के लिए जरूरी है, जहाँ झूठी पहचान, प्रेम संबंधों या आर्थिक लालच के जरिए धर्म परिवर्तन कराया जाता है।

समर्थकों के अनुसार ऐसे कानून समाज में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता का दुरुपयोग न हो सके।

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Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
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