लोबान धूप
लोबान एक ऐसा सुगंधित राल है जिसे इतिहास में सबसे मूल्यवान वस्तुओं में गिना जाता रहा है। मिस्र के फराओ तूतनखामन की कब्र में यह दफनाया गया था। हिन्दू धर्म में लोबान को पूजा में धूप में इस्तेमाल किया जाता है। ईसाई धर्म ग्रंथों में इसे शिशु यीशु को उपहार में दिए जाने का उल्लेख है। सदियों से दुनिया भर के मंदिरों और गिरजाघरों में इसे जलाया जाता रहा है।
अब यही प्राचीन वस्तु अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े आधुनिक सैन्य संघर्ष की चपेट में आ गई है। होरमुज जलसंधि से गुजरने वाले तेल टैंकरों की तरह लोबान के जहाज भी युद्ध की बाधाओं में फंस गए हैं और वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर इसका गंभीर असर पड़ रहा है।
लोबान क्या है और कहाँ से आता है
लोबान बोसवेलिया पेड़ों की छाल से निकाला जाने वाला सुगंधित राल है। ये पेड़ मुख्य रूप से उत्तरी अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप में उगते हैं। इस राल का व्यापार इतिहास में कच्चे तेल से भी बहुत पहले से इस क्षेत्र की प्रमुख निर्यात गतिविधि रही है।
वर्मोंट विश्वविद्यालय की प्रोफेसर अंजनेट डिकार्लो के अनुसार लोबान का व्यापार 6,000 वर्षों से भी अधिक पुराना है। यह सिल्क रूट के रास्ते चीन तक और यूरोप तक पहुँचाया जाता था। प्राचीन काल से लेकर आज तक यह दुनिया भर में उपयोग होता आ रहा है।
वर्तमान में लोबान का उपयोग
आज लोबान मुख्य रूप से स्वास्थ्य सप्लीमेंट, एंटी एजिंग क्रीम और इत्र में इस्तेमाल होता है। हर साल हजारों टन लोबान ओमान, यमन और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र से निर्यात किया जाता है। यह वैश्विक व्यापार अब युद्ध की छाया में आ गया है।
युद्ध का असर और आपूर्ति में रुकावट
इंस्टिट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट ने इस संकट को सामने लाया। यह संस्था अमेरिकी व्यापारिक प्रतिष्ठानों के नियमित सर्वेक्षण करती है और उनकी प्रतिक्रियाओं को प्रकाशित करती है। इस रिपोर्ट में एक अज्ञात थोक व्यापारी की टिप्पणी ने ध्यान खींचा।
उस व्यापारी ने लिखा कि अमेरिका और इजरायल की ईरान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाई ने ओमान से होने वाले लोबान आयात के लिए भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। होरमुज जलसंधि को बंद करने की धमकियों और युद्ध जोखिम से जुड़े अतिरिक्त शुल्क ने परिवहन लागत को बढ़ा दिया है। हवाई माल परिवहन भी इससे अछूता नहीं रहा।
आईएसएम सर्वेक्षण के प्रमुख स्टीव मिलर ने कहा कि यह घटना युद्ध के अनेक अप्रत्याशित दुष्परिणामों का प्रतीक है। जब आप आपूर्ति शृंखला की गहराई में उतरते हैं तो वहाँ ऐसी चीजें मिलती हैं जिनकी उम्मीद नहीं होती। लोबान आयातक पर इसका प्रभाव उल्लेखनीय रूप से गहरा पाया गया।
तेल और अन्य वस्तुओं पर भी संकट
मिलर ने स्पष्ट किया कि तेल भले ही सबसे ज्यादा चर्चा में हो लेकिन इस क्षेत्र से व्यापार करने वाली अनेक कंपनियों पर इसके व्यापक प्रभाव पड़ रहे हैं। कई उत्पादों के लिए यह क्षेत्र एकमात्र स्रोत है और कंपनियाँ कहीं और से आयात करने की स्थिति में नहीं हैं। यह समस्या केवल आर्थिक नहीं बल्कि भूगोल से जुड़ी भी है।
लोबान आयातक पहले से ही ट्रंप प्रशासन के व्यापार युद्ध के कारण बढ़े हुए टैरिफ की मार झेल रहे थे। अब असली युद्ध की वजह से उपजी आपूर्ति संकट ने उन शिकायतों को पीछे छोड़ दिया है। दोहरे संकट ने व्यापारियों की कमर तोड़ कर रख दी है।

युद्ध के अलावा और भी हैं खतरे
लोबान की आपूर्ति के सामने केवल युद्ध ही चुनौती नहीं है। बोसवेलिया के अधिकांश पेड़ जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगते हैं और बहुत कम पेड़ ही खेती के रूप में उगाए जाते हैं। इसी कारण ये पेड़ वनों की कटाई और अत्यधिक दोहन के खतरे से भी जूझ रहे हैं।
डिकार्लो ने इसकी तुलना मेपल सीरप उत्पादन से की। जिस तरह मेपल पेड़ों को एक निश्चित मौसम और परिस्थितियों में ही टैप किया जाता है ताकि पेड़ स्वस्थ रहें, उसी तरह लोबान के पेड़ों के साथ भी सावधानी बरतना जरूरी है। असीमित दोहन पेड़ों को नष्ट कर देता है।
सेव फ्रैंकिंसेंस पहल और भविष्य की चिंता
डिकार्लो सेव फ्रैंकिंसेंस इनिशिएटिव की संस्थापक हैं जो गिरजाघरों और लोबान उपयोग करने वाली कंपनियों के साथ मिलकर टिकाऊ कटाई तकनीकों को बढ़ावा देने का काम करती है। युद्ध ने एक बार फिर यह दिखाया है कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ कितनी नाजुक हो सकती हैं।
डिकार्लो का कहना है कि लोगों को यह समझना जरूरी है कि लोबान हजारों साल से मानवता के लिए कितना महत्वपूर्ण और पूजनीय रहा है। इस व्यापार में अनेक बार बाधाएँ आई हैं और हर बार मनुष्यों ने इसे आगे बढ़ाने का रास्ता खोजा है। यह राल मानव सभ्यता के इतिहास में गहराई से जुड़ा हुआ है।

