KGMU के डॉक्टर रमीज का ‘जन्नत’ फोल्डर: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े लव जिहाद और कथित धर्मांतरण मामले में पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
इस मामले में गिरफ्तार डॉक्टर रमीज के मोबाइल फोन और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
पुलिस का दावा है कि बरामद डिजिटल सबूत यह संकेत देते हैं कि आरोपी लंबे समय से सुनियोजित तरीके से अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।
लैपटॉप में ‘जन्नत’ नाम का फोल्डर
KGMU के डॉक्टर रमीज का ‘जन्नत’ फोल्डर: पुलिस के अनुसार, रमीज के लैपटॉप में ‘जन्नत’ नाम का एक विशेष फोल्डर मिला है।
इस फोल्डर में कई हिंदू युवतियों की निजी जानकारी, फोटो, मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया डिटेल्स और कथित आपत्तिजनक वीडियो सेव पाए गए हैं।
जांचकर्ताओं का कहना है कि यह डेटा हाल-फिलहाल में इकट्ठा नहीं किया गया, बल्कि आरोपी पिछले करीब 13 वर्षों से अपने संपर्कों और गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड संभालकर रखता आ रहा था।
इससे यह आशंका और मजबूत हुई है कि पूरा मामला किसी अचानक की गई हरकत का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
KGMU में छात्रों के बीच बनाता था दबाव
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी का प्रभाव KGMU के मेडिकोज ग्रुप और मेडिकल छात्रों के बीच था। पुलिस का कहना है कि इसी नेटवर्क के जरिए वह नए संपर्क बनाता था।
बताया जा रहा है कि जैसे ही कोई नई लड़की उसके संपर्क में आती थी, वह उसकी पूरी जानकारी जुटा लेता था और उसे अलग-अलग फाइलों में सेव करता था। इन फाइलों में फोटो, चैट स्क्रीनशॉट और कॉल डिटेल्स तक शामिल हैं।
कॉल गर्ल्स से जुड़ा डेटा
जांच के दौरान एक और गंभीर पहलू सामने आया है। पुलिस को रमीज के लैपटॉप में एक अलग फोल्डर मिला है, जिसमें कथित तौर पर कॉल गर्ल्स से जुड़ा डेटा रखा गया था।
इसमें नाम, मोबाइल नंबर और अन्य जानकारियां शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि इन संपर्कों का इस्तेमाल मुस्लिम युवाओं को कथित धर्मांतरण नेटवर्क में फंसाने और उन पर दबाव बनाने के लिए किया जाता था।
इस एंगल से भी मामले की गहन जांच की जा रही है।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी से पहले आरोपी ने अपने मोबाइल से कई चैट, नंबर और अन्य डिजिटल सबूत डिलीट कर दिए थे।
फिलहाल फॉरेंसिक टीम डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने में जुटी हुई है। अधिकारियों को उम्मीद है कि डेटा रिकवरी के बाद नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।
फरारी के दौरान किन राज्यों में गया
इसके अलावा पूछताछ के दौरान रमीज से नेपाल बॉर्डर कनेक्शन, फरारी के दौरान किन-किन राज्यों में गया और किन लोगों की मदद ली,
इन सभी बिंदुओं पर सवाल किए गए हैं। हालांकि, कई अहम सवालों पर आरोपी ने चुप्पी साध रखी है।
चौक थाना पुलिस के साथ-साथ STF भी इस मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी,
वैसे-वैसे इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
KGMU से जुड़ा यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका की भी आशंका जताई जा रही है।

