Friday, February 6, 2026

कंगना रनौत बायोग्राफी: फिल्मी पर्दे की क्वीन से राजनीतिक तक का सफर

कंगना रनौत बायोग्राफी: क्या आप जानते हैं कि एक लड़की सिर्फ ₹1500 लेकर घर से निकल जाए और एक दिन वही लड़की भारत की संसद में बैठी दिखाई दे?

क्या आपको पता है कि बॉलीवुड की सबसे बेबाक आवाज़ बनने से पहले वह डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन एक फेल हुआ एग्ज़ाम उसकी ज़िंदगी की दिशा बदल गया?

क्या आप जानते हैं कि जिस अभिनेत्री को कभी “आउटसाइडर” कहा गया, वह आज चार नेशनल अवॉर्ड, पद्म श्री और एक सांसद की कुर्सी तक पहुंच चुकी है,

क्या यह जानकर हैरानी होगी कि फैशन और ग्लैमर की दुनिया में रहने वाली यह महिला अक्सर हैंडलूम साड़ी पहनकर संसद पहुंचती है।

हां हम बात कर रहे हैं कंगना रनौत की। एक ऐसी महिला की, जिसने न तो हार मानना सीखा, न चुप रहना।

कंगना रनौत सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं हैं, वह एक सोच हैं—जो सवाल पूछती है, सिस्टम से टकराती है और अपने फैसलों पर डटी रहती है।

हिमाचल के एक छोटे से गाँव से लेकर बॉलीवुड के शिखर और फिर राजनीति की सबसे बड़ी ज़मीन तक, उनका सफर आसान नहीं रहा, लेकिन यही संघर्ष उनकी पहचान बन गया।

पर्सनल प्रोफाइल

पूरा नामकंगना अमरदीप रनौत
जन्म तिथि23 मार्च 1987
जन्म स्थानभांबला, मंडी ज़िला, हिमाचल प्रदेश
वर्तमान पेशासांसद, अभिनेत्री, फ़िल्ममेकर
राजनीतिक दलभारतीय जनता पार्टी (BJP)
संसदीय क्षेत्रमंडी, हिमाचल प्रदेश
शिक्षाडीएवी स्कूल, चंडीगढ़ (बाद में दिल्ली में थिएटर प्रशिक्षण)
वैवाहिक स्थितिअविवाहित
निवासमनाली और मुंबई
कदलगभग 5 फ़ुट 5 इंच
प्रोडक्शन हाउसमणिकर्णिका फ़िल्म्स

प्रारंभिक वर्ष और रंगमंच का सफर

कंगना रनौत बायोग्राफी: कंगना रनौत का जन्म 23 मार्च 1987 को हिमाचल प्रदेश के मंडी ज़िले के छोटे से गांव भांबला में हुआ था।

उनका बचपन एक सामान्य पहाड़ी परिवार में बीता। उनके पिता अमनदीप रनौत एक व्यवसायी हैं और उनकी मां आशा रनौत स्कूल में शिक्षिका थीं।

जैसे ज़्यादातर मध्यमवर्गीय परिवारों में होता है, वैसे ही उनके माता-पिता भी चाहते थे कि कंगना पढ़-लिखकर डॉक्टर बने और एक सुरक्षित ज़िंदगी जिए, लेकिन पढ़ाई में उनका मन नहीं लगा।

कक्षा 12वीं में केमिस्ट्री की परीक्षा मे फ़ैल होने के बाद यह साफ हो गया कि विज्ञान उनके लिए सही रास्ता नहीं है। यह वह मोड़ था, जहां से उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल गई।

निराश होने या हार मानने के बजाय, कंगना ने एक बड़ा और साहसी फैसला लिया।

उन्होंने घर छोड़ने का निर्णय किया और अपने सपनों के पीछे दिल्ली चली गईं। वहाँ उन्होंने मशहूर थिएटर निर्देशक अरविंद गौड़ के मार्गदर्शन में अस्मिता थिएटर ग्रुप जॉइन किया।

थिएटर के ये शुरुआती साल कंगना के लिए बहुत अहम रहे। यहीं उन्होंने अभिनय का असली मतलब समझा अनुशासन, भावनाओं की गहराई और मंच पर आत्मविश्वास।

यही अनुभव आगे चलकर उनकी पहचान बना। बाद में जिन निर्देशकों ने उनके साथ काम किया, उन्होंने अक्सर उन्हें “वन-टेक एक्टर” कहा।

बॉलीवुड में प्रवेश

कंगना का बॉलीवुड में आना किसी प्लान के तहत नहीं हुआ, बल्कि यह एक संयोग था। निर्देशक अनुराग बसु ने उन्हें मुंबई के एक कैफे में देखा और अपनी फिल्म गैंगस्टर के लिए ऑडिशन देने को कहा।

शुरुआत में कंगना को यह कहकर मना कर दिया गया कि वह उम्र में बहुत छोटी हैं, लेकिन किस्मत ने करवट ली जब फिल्म की मुख्य अभिनेत्री ने यह प्रोजेक्ट छोड़ दिया। इसके बाद अनुराग बसु ने कंगना को दोबारा बुलाया।

साल 2006 में रिलीज़ हुई गैंगस्टर से कंगना ने बॉलीवुड में कदम रखा। उनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया और इसी फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला।

इसके बाद 2008 में आई फिल्म फैशन ने उनके करियर को एक नई दिशा दी। इस फिल्म में उन्होंने नशे की लत से जूझ रही एक सुपरमॉडल का किरदार निभाया।

यह रोल आसान नहीं था, लेकिन कंगना ने इसे पूरी सच्चाई और गहराई के साथ निभाया।

महज़ 22 साल की उम्र में इस भूमिका के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड (बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस) मिला। इससे यह साबित हो गया कि कंगना सिर्फ ग्लैमर की अभिनेत्री नहीं,

बल्कि एक गंभीर कलाकार हैं, जो चुनौतीपूर्ण रोल करने से डरती नहीं हैं।

इसके बाद क्वीन (2014) और तनु वेड्स मनु रिटर्न्स (2015) जैसी फिल्मों ने उनके करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।

खासतौर पर क्वीन ने दर्शकों के दिल को छू लिया। यह फिल्म एक ऐसी लड़की की कहानी थी, जो टूटे हुए रिश्ते के बाद खुद को खोजने निकलती है।

अभिनय से परे एक ब्रांड का निर्माण

जैसे-जैसे कंगना का अभिनय करियर आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे वह अपने काम पर ज़्यादा नियंत्रण चाहने लगीं।

वह सिर्फ दूसरों की फिल्मों में काम करने तक सीमित नहीं रहना चाहती थीं, बल्कि अपनी पसंद और सोच के अनुसार फिल्में बनाना चाहती थीं।

इसी सोच के साथ साल 2020 में उन्होंने अपना खुद का प्रोडक्शन हाउस मणिकर्णिका फिल्म्स शुरू किया। इस बैनर के तहत कंगना ने ऐसी फिल्मों पर काम किया, जिनसे वह खुद जुड़ाव महसूस करती थीं।

उनकी सबसे चर्चित निर्देशित फिल्म ‘इमरजेंसी’ रही, जो 2025 में रिलीज़ हुई। इस फिल्म में उन्होंने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभाया।

यह फिल्म उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, क्योंकि इसमें उन्होंने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन की ज़िम्मेदारी भी संभाली।

इससे पहले 2019 में आई फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ का उन्होंने सह-निर्देशन किया था।

रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका निभाने के लिए कंगना ने एक साल से ज़्यादा समय तक तलवारबाज़ी और घुड़सवारी की कड़ी ट्रेनिंग ली।

उन्होंने इस किरदार के लिए बॉडी डबल का इस्तेमाल करने से भी इनकार कर दिया। फिल्मों के अलावा कंगना ने बिज़नेस की दुनिया में भी कदम रखा।

उन्होंने मनाली में ‘हिमालयन ब्रू’ नाम की एक कॉफी शॉप में निवेश किया, जो स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देती है।

इसकी अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये बताई जाती है। 2024 के चुनावी शपथपत्र के अनुसार, कंगना की कुल संपत्ति लगभग 91.66 करोड़ रुपये थी।

वहीं 2025 के अनुमान बताते हैं कि उनकी संपत्ति 115 से 120 करोड़ रुपये के बीच हो सकती है।

उनकी संपत्तियों में मनाली में स्थित 7,600 वर्ग फुट का एक शानदार घर शामिल है, जिसकी कीमत 30 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। इसके अलावा मुंबई में भी उनके पास कई संपत्तियां हैं।

साल 2024 में उन्होंने मुंबई का अपना चर्चित और विवादों में रहा पाली हिल बंगला 32 करोड़ रुपये में बेच दिया।

साथ ही उन्होंने अपने शपथपत्र में लगभग 17.38 करोड़ रुपये के कर्ज की जानकारी भी दी।

राजनीतिक मोड़

कंगना रनौत का राजनीति में आना अचानक नहीं हुआ। वह कई सालों से देश से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं और अक्सर उनके विचार राष्ट्रवादी सोच से जुड़े नजर आए।

साल 2020 में एक बयान के बाद बड़ा विवाद खड़ा हुआ, जब उन्होंने मुंबई की तुलना पाकिस्तान ओक्कुपेद कश्मीर से कर दी।

इसके कुछ समय बाद बृहन्मुंबई नगर निगम ने अवैध निर्माण का हवाला देते हुए मुंबई के पाली हिल में स्थित उनके ऑफिस के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया।

यह घटना कंगना की ज़िंदगी का एक अहम मोड़ बन गई। इसके बाद वह खुद को उस व्यवस्था के खिलाफ खड़ा करने लगीं, जिसे उन्होंने “माफिया सिस्टम” कहा।

इस विवाद ने उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में सामने रखा, जो बिना डरे सिस्टम से टकराने को तैयार है। इसके बाद कंगना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुली समर्थक बन गईं।

उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून और किसानों के आंदोलन जैसे मुद्दों पर भी लगातार अपनी राय रखी।

हालांकि उनका बेबाक अंदाज़ कई बार विवादों का कारण भी बना। साल 2021 में ट्विटर ने उनके अकाउंट को घृणास्पद आचरण से जुड़ी नीतियों के उल्लंघन के कारण सस्पेंड कर दिया था।

बाद में 2023 में उनका अकाउंट दोबारा बहाल कर दिया गया। 24 मार्च 2024 को भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया।

कंगना ने खुद को “मंडी की बेटी” बताते हुए चुनाव प्रचार किया और कांग्रेस उम्मीदवार विक्रमादित्य सिंह को कड़ी चुनौती दी।

चुनाव के नतीजों में कंगना रनौत ने 74,755 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 5,37,022 वोट मिले और इसी के साथ उन्होंने संसद में कदम रखा।

सांसद के रूप में जीवन

राजनीति में कंगना रनौत का सफर आसान नहीं रहा। चुनाव जीतने के कुछ ही समय बाद उन्हें एक गंभीर घटना का सामना करना पड़ा। चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर एक सीआईएसएफ अधिकारी ने उन्हें थप्पड़ मार दिया।

उस अधिकारी का कहना था कि यह उसकी तरफ से किसानों के आंदोलन पर कंगना द्वारा पहले दिए गए बयानों की प्रतिक्रिया थी।

यह घटना काफी चर्चा में रही। संसद में कंगना की मौजूदगी को लेकर आंकड़े बताते हैं कि उनकी उपस्थिति लगभग 85 प्रतिशत रही है।

उन्होंने संसद की 10 से ज़्यादा बहसों में हिस्सा लिया है और 103 से अधिक सवाल पूछे हैं। उनके सवाल ज़्यादातर आवास, पर्यटन और डिजिटल कंटेंट से जुड़े नियमों पर रहे हैं।

संसद में दिया गया उनका पहला भाषण हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित था। उन्होंने खास तौर पर काठ-कुनी वास्तुकला, स्पीति और किन्नौर के आदिवासी संगीत और पारंपरिक कलाओं को बचाने की बात कही।

विकास के मुद्दों पर भी कंगना काफी सक्रिय रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण इलाकों की सड़कों के लिए ₹1,240.53 करोड़ की राशि मंज़ूर करवाने में भूमिका निभाई।

इसके साथ ही वह मंडी क्षेत्र के लिए बेहतर रेलवे सुविधाओं और हवाई अड्डे के विकास की मांग भी लगातार उठाती रही हैं।

राजनीतिक लड़ाई

हिमाचल प्रदेश की राजनीति में कंगना रनौत का सफर आसान नहीं रहा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के साथ उनके रिश्ते लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।

राज्य मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कई बार कंगना को “अदृश्य सांसद” कहा है। उनका आरोप रहा है कि कंगना अपने संसदीय क्षेत्र मंडी में बहुत कम समय बिताती हैं।

इस आरोप पर कंगना ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि वह कोई “मिस्टर इंडिया” नहीं हैं जो दिखाई न दें, बल्कि असल में विक्रमादित्य सिंह 2024 के चुनाव में अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

साल 2025 में आई बाढ़ के दौरान भी दोनों के बीच टकराव देखने को मिला। कंगना ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि राहत सामग्री और मदद बांटने में पक्षपात किया गया।

इसके बाद बिजली बिल को लेकर एक और विवाद सामने आया। बिजली विभाग ने बताया कि कंगना पर करीब 90,384 रुपये का बकाया है। इस मुद्दे को उठाकर विक्रमादित्य सिंह ने सरकार पर उनके हमलों को लेकर सवाल खड़े किए।

संसद के भीतर भी कंगना कई बार तीखी बहसों में शामिल हुई हैं। उन्होंने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को “खतरनाक” बताया और उन पर भारत के खिलाफ नकारात्मक बातें फैलाने का आरोप लगाया।

दिसंबर 2025 में कंगना ने “एक राष्ट्र, एक चुनाव” के प्रस्ताव का खुलकर समर्थन किया। उनका कहना था कि बार-बार चुनाव होने से देश की व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव पड़ता है।

कॉन्ट्रोवर्सी

कंगना रनौत का करियर जितना कामयाब रहा है, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा है। वह अक्सर अपनी बेबाक राय के कारण सुर्खियों में रहती हैं।

साल 2017 में टीवी शो कॉफी विद करण में दिए गए उनके एक बयान ने पूरे बॉलीवुड में हलचल मचा दी थी।

इस शो में उन्होंने करण जौहर को नेपोटिसिम समर्थक बताया और उन्हें “फिल्म माफिया” का हिस्सा कहा। इसके बाद फिल्म इंडस्ट्री में अंदरूनी और बाहरी कलाकारों को लेकर देशभर में बहस शुरू हो गई।

इससे पहले वह अभिनेता ऋतिक रोशन के साथ एक बड़े कानूनी विवाद में भी फंस चुकी थीं। जब उन्होंने उन्हें अपना “बेवकूफ एक्स” कहा, तो मामला अदालत तक पहुंचा।

इस विवाद में ईमेल लीक हुए और साइबर क्राइम से जुड़ी शिकायतें भी दर्ज कराई गईं, जिससे यह मामला काफी समय तक चर्चा में रहा।

साल 2021 में किसानों के आंदोलन को लेकर दिए गए उनके कुछ बयानों और एक बुज़ुर्ग महिला की गलत पहचान से जुड़ी पोस्ट के बाद ट्विटर ने उनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया।

ट्विटर का कहना था कि उनके पोस्ट नफरत फैलाने वाली नीतियों का उल्लंघन करते हैं। हालांकि, 2023 में उनका अकाउंट फिर से बहाल कर दिया गया। इसी साल उन्होंने भारत की 1947 की आज़ादी को “भीख” कह दिया था।

इस बयान के बाद देशभर में नाराज़गी देखने को मिली और उनसे पद्म श्री सम्मान वापस लेने की मांग तक उठ गई। हाल के वर्षों में उनकी फिल्म इमरजेंसी भी विवादों में घिर गई।

सिख संगठनों ने फिल्म पर आपत्ति जताई, जिसके बाद इसे सेंसर से जुड़ी कई मुश्किलों और देरी का सामना करना पड़ा। आखिरकार 2025 में रिलीज़ से पहले फिल्म में कुछ बदलाव करने पड़े।

इंटरेस्टिंग फैक्ट्स

फिल्म ‘फैशन’ के लिए कंगना रनौत ने सिर्फ 22 साल की उम्र में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता था। इसके साथ ही वह इस पुरस्कार को पाने वाली सबसे कम उम्र की अभिनेत्रियों में से एक बन गईं।

आज वह शबाना आज़मी के बाद भारत की दूसरी सबसे ज़्यादा राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली अभिनेत्री मानी जाती हैं। जब 2014 में पूरी फिल्म इंडस्ट्री ‘क्वीन’ की सफलता का जश्न मना रही थी,

उसी समय कंगना ने बिना ज़्यादा शोर किए न्यूयॉर्क फिल्म अकादमी में पटकथा लेखन (स्क्रीनराइटिंग) की पढ़ाई शुरू कर दी थी।

उनके लिए सीखना और खुद को बेहतर बनाना हमेशा प्राथमिकता रहा है। कंगना अपने काम में सच्चाई और मेहनत पर खास ज़ोर देती हैं।

फिल्म ‘मणिकर्णिका’ के लिए उन्होंने पूरे एक साल तक तलवारबाज़ी और घुड़सवारी की कड़ी ट्रेनिंग ली। स्टंट सीन के लिए उन्होंने बॉडी डबल लेने से साफ इनकार कर दिया और खुद ही सारे सीन किए।

हालांकि कंगना को एक फैशन आइकन माना जाता है, फिर भी वह अक्सर ₹600 की हथकरघा साड़ियां पहनती हैं, स्थानीय बुनकरों को समर्थन मिल सके।

पशु कल्याण के प्रति उनकी सोच भी साफ दिखाई देती है। पहले वह शाकाहारी थीं और 2013 में उन्हें PETA की “हॉटेस्ट वेजिटेरियन” का खिताब भी मिला था। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह सख्त वीगन लाइफस्टाइल अपना ली।

पुरस्कार और सम्मान

कंगना रनौत को भारतीय सिनेमा और कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए साल 2020 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान भारत सरकार द्वारा दिया जाता है और उनके फिल्मी सफर की एक बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

नेशनल फिल्म अवार्ड्स

कंगना रनौत को अब तक फाइव नेशनल फिल्म अवार्ड्स मिल चुके हैं। ये अवार्ड्स उनकी अलग-अलग और दमदार भूमिकाओं के लिए दिए गए हैं:
फैशन (2008) – बेस्ट सुपोर्टिंग एक्ट्रेस
क्वीन (2014) – बेस्ट एक्ट्रेस
तनु वेड्स मनु रिटर्न्स (2015) – बेस्ट एक्ट्रेस
मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी (2019) – बेस्ट एक्ट्रेस
पंगा (2020) – बेस्ट एक्ट्रेस
फिल्मफेयर अवार्ड्स (चयनित)
कंगना को कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स भी मिल चुके हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
गैंगस्टर (2006) – बेस्ट फीमेल डेब्यू
फैशन (2008) – बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस
क्वीन (2014) – बेस्ट एक्ट्रेस
ये सभी अवार्ड्स इस बात का प्रमाण हैं कि कंगना रनौत न केवल लोकप्रिय अभिनेत्री हैं, बल्कि अभिनय की गहराई और मेहनत के लिए भी जानी जाती हैं।

आगे की ओर देखते हुए

हाल के इंटरव्यू में कंगना रनौत ने माना है कि राजनीति एक बहुत ज़्यादा मेहनत और ज़िम्मेदारी वाला काम है। उन्होंने इसकी तुलना एक फिल्म स्टार की “स्वार्थी ज़िंदगी” से की, जहां इंसान ज़्यादातर अपने बारे में ही सोचता है।

इस बयान के बाद उनकी राजनीति में लंबी पारी को लेकर बहस भी छिड़ गई। हालांकि, इसके बावजूद कंगना ने सिनेमा से दूरी नहीं बनाई है और वह फिल्मों में लगातार सक्रिय बनी हुई हैं।

उनकी आने वाली फिल्मों में ‘भारत भाग्य विद्धाता’ (2026), ‘क्वीन 2’, ‘तनु वेड्स मनु 3’, ‘द इनकार्नेशन: सीता’, उनकी हॉलीवुड डेब्यू फिल्म ‘ब्लेस्ड बी द एविल’,

मनोवैज्ञानिक थ्रिलर ‘सर्कल’ (दशहरा 2025) और ‘मणिकर्णिका रिटर्न्स: द लीजेंड ऑफ डिड्डा’ शामिल हैं।

कंगना रनौत का यह सफर आज के भारत की तस्वीर पेश करता है, जहां सिनेमा और राजनीति एक-दूसरे से लगातार जुड़ते जा रहे हैं।

उनकी सोच और फैसलों को लेकर उन्हें सराहना भी मिलती है और आलोचना भी, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि वह चर्चा के केंद्र में बनी रहती हैं।

यह भी पढ़ें- यामी गौतम बायोग्राफी: फेयर एंड लवली ऐड से लेकर बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा तक

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article