जमुई गैंगरेप मामला: बिहार के जमुई जिले से न्याय की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने न केवल अपराधियों के मन में भय पैदा किया है बल्कि त्वरित न्याय की अवधारणा को भी कायम किया है।
15 वर्षीय नाबालिग के साथ हुई सामूहिक दरिंदगी के मामले में जमुई पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश महेश्वर दुबे ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
उन्होंने तीनों आरोपियों मोहम्मद इमरान उर्फ चांद, मोहम्मद आफताब अंसारी और मोहम्मद सद्दाम हुसैन को अंतिम सांस तक कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
यह फैसला महज दो महीने के स्पीडी ट्रायल के बाद आया है, जो बिहार की न्याय प्रक्रिया में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
हैवानियत की हदें की पार
घटना की शुरुआत 1 दिसंबर 2025 को हुई, जब जमुई के अलीगंज बाजार से एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की अचानक लापता हो गई।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने उसे अगवा कर कटिहार के एक बंद कमरे में बंधक बना लिया था।
पीड़िता ने कोर्ट में दिए अपने बयान में बताया कि उसे मूर्छित अवस्था में रखा गया और लगातार 23 दिनों तक तीनों आरोपियों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
उस मासूम को दिन भर में केवल दो रोटियां दी जाती थीं और विरोध करने पर उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती थी।
दरिंदों ने उसकी पहचान मिटाने के उद्देश्य से उसके कपड़े तक फाड़ दिए और जबरन धर्म परिवर्तन के इरादे से निकाह का ढोंग रचाकर उसे प्रतिबंधित मांस खाने पर मजबूर किया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
जब पीड़िता की मां अपनी बेटी की तलाश में दर-दर भटक रही थी, तभी उसके मोबाइल पर एक अज्ञात कॉल आया।
फोन करने वाले शख्स ने घमंड और धौंस के साथ कहा कि अपनी बेटी को मत खोजो, वह अब वापस नहीं आएगी।
इसी एक सुराग ने पुलिस के लिए रास्ता खोल दिया। जमुई पुलिस ने बिना समय गंवाए तकनीकी सर्विलांस की मदद ली और कटिहार के मोफरगंज इलाके में छापेमारी की।
24 दिसंबर 2025 को जब पुलिस उस बंद कमरे में पहुंची, तो वहां की स्थिति देखकर अनुभवी पुलिसकर्मी भी कांप उठे।
लड़की अत्यंत कमजोर, बेहोश और मानसिक रूप से टूटी हुई हालत में मिली। पुलिस ने मौके से ही इमरान, आफताब और सद्दाम को गिरफ्तार कर लिया।
60 दिनों में न्याय का सफर
जमुई गैंगरेप मामला: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएम और एसपी ने न्यायालय से स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) का आग्रह किया।
कानून की मशीनरी इतनी तेजी से घूमी कि 17 जनवरी 2026 को पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और 22 जनवरी को कोर्ट ने मामले पर संज्ञान ले लिया।
पीड़िता, उसकी मां, डॉक्टर नम्रता सिन्हा और स्कूल के प्रधानाध्यापक सहित कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
विशेष लोक अभियोजक (Special PP) मनोज शर्मा ने दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी।
सभी साक्ष्यों और दलीलों को सुनने के बाद 16 मार्च को उन्हें दोषी करार दिया गया और 24 मार्च 2026 को सजा का ऐलान हुआ।
विशेष पॉक्सो अदालत ने सुनाई कड़ी सजा
विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2), 96 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 व 17 के तहत दंडित किया है।
इन नई धाराओं के तहत सामूहिक दुष्कर्म और नाबालिग के साथ क्रूरता के लिए मृत्युदंड या आजीवन कारावास का प्रावधान है। कोर्ट ने तीनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
न्यायाधीश ने अपने 37 पन्नों के विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि ऐसे घृणित और राक्षसी कृत्य के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है और दोषियों को अंतिम सांस तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।
सतर्कता ही सुरक्षा का आधार
जमुई गैंगरेप मामला: यह मामला जहां एक ओर पुलिस और न्यायपालिका की तत्परता की सराहना करता है, वहीं दूसरी ओर समाज को एक चेतावनी भी देता है।
नाबालिग बच्चों की सुरक्षा के प्रति अभिभावकों और आम नागरिकों को सदैव सतर्क रहने की आवश्यकता है।
जमुई की इस बहादुर बेटी ने जिस नर्क को सहा, उससे वह जिंदा लौट आई, लेकिन यह घटना हमें याद दिलाती है कि अपराधियों के मंसूबों को कुचलने के लिए कानून का सख्त और त्वरित होना कितना अनिवार्य है।
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