इजरायल ने ऐसे किया खामेनेई को ट्रैक: ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई की कथित हत्या को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस पूरे ऑपरेशन के पीछे इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद की लंबे समय से चल रही गुप्त जासूसी थी।
बताया जा रहा है कि यह मिशन अचानक नहीं, बल्कि कई सालों की तैयारी और तकनीकी निगरानी के बाद अंजाम दिया गया।
ट्रैफिक कैमरों और मोबाइल सिस्टम में सेंध
इजरायल ने ऐसे किया खामेनेई को ट्रैक: रिपोर्ट के अनुसार, मोसाद ने तेहरान शहर के ट्रैफिक कैमरा नेटवर्क को हैक कर लिया था।
शहर की सड़कों पर लगे कैमरों से मिलने वाला डेटा कथित तौर पर इजरायल के सर्वर तक पहुंच रहा था।
इसके साथ ही मोबाइल फोन सिस्टम में भी सेंध लगाने का दावा किया गया है।
इससे खामेनेई की लोकेशन, उनके सुरक्षा घेरे और आने-जाने के रास्तों की जानकारी रियल टाइम में मिलती रही।
बताया जा रहा है कि खामेनेई के काफिले की गतिविधियों से लेकर उनके करीबी अधिकारियों की मौजूदगी तक हर छोटी-बड़ी जानकारी पर नजर रखी जा रही थी।
इस निगरानी के कारण हमले की सटीक योजना बनाना आसान हो गया।
दिन के उजाले में ‘सरप्राइज’ हमला
ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हमले की योजना पहले रात में बनाई गई थी, लेकिन अंतिम समय पर इसे बदल दिया गया।
इजरायल ने सुबह करीब 6 बजे ‘सरप्राइज अटैक’ करने का फैसला किया।
बताया गया है कि उस समय खामेनेई लगभग 40 वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक कर रहे थे।
इजरायली फाइटर जेट्स ने कथित तौर पर सिर्फ 60 सेकंड के अंदर तीन सटीक हमले किए, जिससे पूरा कंपाउंड तबाह हो गया।
यह हमला बेहद तेज और योजनाबद्ध बताया जा रहा है।
अमेरिका की कथित भूमिका
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस ऑपरेशन में अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने भी सहयोग दिया।
जमीन पर मौजूद एक जासूस से सिग्नल मिलने के बाद हमला शुरू किया गया। यह हमला अमेरिका और इजरायल के बीच समन्वय के साथ किया गया बताया जा रहा है।
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि तकनीकी और सैटेलाइट इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हुआ।
पहले भी हो चुके हैं गुप्त ऑपरेशन
रिपोर्ट में यह भी जिक्र है कि मोसाद पहले भी दुश्मन संगठनों के खिलाफ जटिल ऑपरेशन कर चुका है।
उदाहरण के तौर पर हिजबुल्लाह के खिलाफ कथित ‘पेजर अटैक’ के दौरान फर्जी यूट्यूब विज्ञापनों और शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया था।
इस तरह की रणनीतियां दिखाती हैं कि जासूसी सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि डिजिटल और आर्थिक तरीकों से भी की जाती है।
ईरान की सुरक्षा पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद ईरान की आंतरिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अगर रिपोर्ट के दावे सही हैं, तो इसका मतलब है कि सुरक्षा व्यवस्था में काफी गहरी सेंध लगी थी।
टॉप कमांडरों की गतिविधियों, मीटिंग की जानकारी और निजी वाहनों की पार्किंग तक की सूचना लीक होना सुरक्षा तंत्र के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

