इस्लामाबाद की मस्जिद में धमाका: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बार फिर भीषण आतंकी हिंसा से दहल उठी।
शहर के व्यस्त इलाके में स्थित इमाम बारगाह खदीजत-उल-कुबरा मस्जिद में हुए ज़ोरदार विस्फोट में अब तक 15 से 20 लोगों की मौत की पुष्टि की जा रही है,
जबकि लगभग 80 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। धमाके के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और चारों ओर चीख-पुकार का माहौल बन गया।
मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट की सूचना मिलते ही पुलिस, रेस्क्यू टीमों और सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।
घायलों को तुरंत नज़दीकी अस्पतालों में पहुँचाया गया, जबकि पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) में आपातकाल घोषित कर दिया गया है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, कई घायलों की हालत नाज़ुक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हमलावर ने विस्फोटक से खुद को उड़ाया
हमले के तरीक़े को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धमाका आत्मघाती था या पहले से लगाए गए किसी विस्फोटक उपकरण के ज़रिये अंजाम दिया गया।
हालांकि कुछ मीडिया संस्थानों ने दावा किया है कि हमलावर ने शिया मस्जिद में प्रवेश करने के बाद गेट के पास खुद को विस्फोट से उड़ा लिया।
घटना के बाद पूरे इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है,
जबकि खुफिया एजेंसियाँ हर पहलू से जाँच में जुटी हुई हैं। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और चश्मदीदों से पूछताछ की जा रही है।
विस्फोट में 12 लोगों की मौत
यह हमला ऐसे समय पर हुआ है जब पाकिस्तान पहले से ही आंतरिक सुरक्षा संकट से जूझ रहा है।
हाल ही में बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के बीच हुई हिंसक मुठभेड़ में दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
इसके अलावा, पिछले नवंबर में भी इस्लामाबाद में हुए एक आत्मघाती विस्फोट में 12 लोगों की मौत ने देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना पाकिस्तान में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा की ओर इशारा करता है।
इस हमले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आतंकवाद पाकिस्तान के लिए अब भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

