ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बिछाए बम: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना ने कुछ ही घंटों के भीतर ईरान के 10 जहाजों या नावों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है।
उन्होंने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर शेयर किया।
ट्रंप के अनुसार ये नावें समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने के काम में लगी हुई थीं, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और तेल ले जाने वाले जहाजों के लिए गंभीर खतरा बन सकती थीं।
उन्होंने अपने संदेश में चेतावनी भरे अंदाज में लिखा कि यह कार्रवाई अभी समाप्त नहीं हुई है और आने वाले समय में और भी हमले हो सकते हैं।
उनका कहना है कि अमेरिका किसी भी ऐसी गतिविधि को स्वीकार नहीं करेगा जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार या ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो।
अमेरिकी सेना के मध्य-पूर्व कमान यूनाइटेड स्टेट सेंट्रल कंमाड ने भी इस कार्रवाई की पुष्टि की है।
कमान की ओर से जारी एक वीडियो में दिखाया गया कि अमेरिकी बल खाड़ी क्षेत्र में ईरान की समुद्री ताकत को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे।
विवाद की जड़ क्या है
अमेरिकी समाचार संस्था CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी,
कि ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामी रिवोल्यूशन गॉर्ड क्रॉप यानी आईआरजीसी होर्मुज की खाड़ी में बड़ी संख्या में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि इन सुरंगों का उद्देश्य उन जहाजों को निशाना बनाना हो सकता है जो इस रास्ते से गुजरते हैं,
खासकर अमेरिकी और इजरायली तेल टैंकरों को। आईआरजीसी पहले भी चेतावनी दे चुका है कि अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो वह अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हमला कर सकता है।
हालांकि ईरान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका झूठे आरोप लगाकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
ईरानी अधिकारियों ने इस खबर को “फर्जी प्रचार” बताते हुए कहा कि उनका देश समुद्री व्यापार में बाधा डालने की नीति नहीं रखता।
होर्मुज की खाड़ी का महत्व
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।
वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही बाधित होती है तो तेल की कीमतों में अचानक तेजी आ सकती है और कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर संकट पैदा हो सकता है।
यही कारण है कि इस क्षेत्र में होने वाली हर सैन्य गतिविधि पर दुनिया की नजर रहती है।
ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ और आगे की योजना
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान में जमीनी सेना भेजने के विकल्प को अभी पूरी तरह से खारिज नहीं किया है।
उनका कहना है कि अमेरिकी सैन्य अभियान, जिसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया है, तब तक जारी रहेगा जब तक इसके सभी उद्देश्य पूरे नहीं हो जाते।
इसी बीच पश्चिम एशिया के कई देशों में स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।
रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और कुछ नागरिक ढांचों को निशाना बनाने की कोशिश की है।
नई तकनीक का इस्तेमाल
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना उन नौकाओं को नष्ट करने के लिए विशेष मिसाइल और निगरानी तकनीक का उपयोग कर रही है,
जिसका इस्तेमाल पहले मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोहों के खिलाफ किया जाता था।
यह तकनीक समुद्र में तेज गति से चलने वाली छोटी नावों को भी सटीक तरीके से निशाना बनाने में सक्षम है।
ट्रंप ने ईरान को साफ संदेश देते हुए कहा कि यदि वह खाड़ी क्षेत्र से बारूदी सुरंगें हटा लेता है तो यह शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा,
लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका “तेज और कठोर” कार्रवाई करने के लिए तैयार है।

