टेक्सास
अमेरिका के टेक्सास राज्य में साइबर ठगी का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें 78 वर्षीय बुजुर्ग की जीवन भर की जमा पूंजी पूरी तरह समाप्त हो गई। भारत में बैठे साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट की साजिश रचते हुए बुजुर्ग को मानसिक दबाव में लिया और उसकी पेंशन सहित सभी खातों की रकम गोल्ड बार में परिवर्तित करवा ली।
इस पूरी प्रक्रिया के बाद अमेरिका में मौजूद भारतीय मूल के स्थानीय कैरियर के माध्यम से बुजुर्ग के घर से गोल्ड बार उठवा लिए गए। प्रारंभिक जांच में इस ठगी की राशि लगभग दो मिलियन डॉलर आंकी गई है। यह घटना टेक्सास में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय साइबर रैकेट की निरंतरता को दर्शाती है।
टेक्सास में बार बार सामने आ रहे गोल्ड बार आधारित स्कैम
टेक्सास राज्य में गोल्ड बार के माध्यम से बुजुर्गों को ठगने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले महीने राज्य पुलिस ने ऐसे ही मामलों में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिन्होंने अनेक बुजुर्ग अमेरिकियों से मिलियन डॉलर मूल्य का सोना ठगा था।
पुलिस जांच के दौरान यह भी सामने आया कि यह नेटवर्क केवल कॉल सेंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ स्थानीय स्तर पर संगठित सप्लाई चेन भी सक्रिय है। यही कारण है कि इन मामलों की गंभीरता लगातार बढ़ती जा रही है।
चोरी के सोने की खरीद फरोख्त में ज्वेलरी नेटवर्क सक्रिय
जांच के दौरान दो सराफा दुकानों पर छापेमारी की गई, जहां चोरी के सोने की खरीद फरोख्त की पुष्टि हुई। इन दुकानों के माध्यम से ठगे गए गोल्ड बार को वैध आभूषणों में बदला जा रहा था।
चार दुकानदारों को हिरासत में लिया गया, जिनमें पंजाब, गुजरात और आंध्र प्रदेश मूल के भारतीय ज्वेलर शामिल हैं। इनके बड़े बड़े शोरूम थे, जो भारतीय नामों से संचालित हो रहे थे और एनआरआई ग्राहकों को नियमित रूप से आभूषण बेचे जा रहे थे।
फिर सामने आए नए पीड़ित बुजुर्ग
ताजा मामले में केवल एक ही बुजुर्ग नहीं, बल्कि कई अन्य वृद्ध अमेरिकी भी सामने आए हैं, जिनकी जीवन भर की बचत इसी तरह के स्कैम में नष्ट हो गई। पीड़ितों का कहना है कि उन्हें सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में रखा गया।
इन मामलों ने बुजुर्ग समुदाय में भय का माहौल पैदा कर दिया है। विशेष रूप से वृद्ध नागरिकों को निशाना बनाए जाने से यह अपराध और अधिक संवेदनशील तथा गंभीर बन गया है।
टेक्सास, एच वन वीजा और बढ़ता तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब टेक्सास राज्य में एच वन वीजा से जुड़े विवाद पहले से चर्चा में हैं। राज्य में भारतीय मूल के लोगों की आर्थिक समृद्धि और बड़े आवासीय परिसरों को लेकर भी लंबे समय से सामाजिक असंतोष मौजूद रहा है।
टेक्सास उन राज्यों में शामिल है जहां सबसे अधिक बुजुर्ग अमेरिकियों के साथ भारतीय स्कैम नेटवर्क द्वारा ठगी के मामले दर्ज किए गए हैं। इन तथ्यों को व्यापक सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
एच वन वीजा को लेकर टेक्सास सरकार के सख्त निर्णय
हाल ही में टेक्सास में कानून पारित किया गया, जिसके तहत एच वन वीजा धारकों को राज्य सरकार की नौकरियों से बाहर रखा गया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि राज्य की सरकारी वैकेंसी एच वन वीजा धारकों के लिए मान्य नहीं होंगी।
इन निर्णयों को राज्य में बढ़ते जनाक्रोश और रोजगार से जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। इससे भारतीय मूल के प्रवासियों को लेकर बहस और तेज हो गई है।
भारत से संचालित साइबर ठगी और वैश्विक छवि
भारत के गुरुग्राम, कोलकाता, झारखंड और अन्य क्षेत्रों से संचालित साइबर स्कैम नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय बताए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है।
अमेरिका में ठगे गए बुजुर्गों के परिवार, पड़ोसी और सामाजिक दायरे में भारतीय समुदाय को लेकर अविश्वास और नाराजगी बढ़ती दिख रही है, जो सामाजिक रिश्तों पर भी असर डाल रही है।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठते सवाल
इन मामलों को लेकर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि स्थानीय प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका कितनी प्रभावी है। इतने बड़े पैमाने पर कॉल सेंटर और अंतरराष्ट्रीय रैकेट का संचालन बिना स्थानीय सहयोग के संभव नहीं माना जा रहा।
डिजिटल इंडिया और तकनीकी निगरानी के दावों के बीच यह भी चर्चा में है कि इंटरनेट आधारित इन अपराधों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है।
भारत को लेकर बदलती वैश्विक धारणा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर ठगी को लेकर भारत की पहचान को लेकर चिंता बढ़ रही है। जहां पहले नाइजीरिया जैसे देशों को स्कैम से जोड़ा जाता था, वहीं अब भारत का नाम भी इसी संदर्भ में लिया जाने लगा है।
यह धारणा पूरे देश और प्रवासी भारतीय समुदाय पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है, जबकि अधिकांश भारतीयों का इन अपराधों से कोई संबंध नहीं है।
गणेश चतुर्थी वीडियो और सामाजिक प्रतिक्रिया
पिछले साल टेक्सास में गणेश चतुर्थी के सार्वजनिक आयोजन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में सड़क पर ढोल ताशों के साथ उत्सव मनाया जा रहा था, जिस पर स्थानीय नागरिकों ने असंतोष व्यक्त किया था।
कई स्थानीय लोगों ने भारतीय समुदाय को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां कीं और स्कैम से जुड़े आरोपों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ दिया। इस घटना ने सामाजिक तनाव को और उजागर कर दिया था।
गूगल रिव्यू विवाद से बढ़ा था टकराव
वीडियो पोस्ट करने वाला व्यक्ति एक कॉफी शॉप का मालिक था। इसके बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया स्वरूप उसकी दुकान पर बड़ी संख्या में नकारात्मक गूगल रिव्यू डाले गए।
इसके जवाब में स्थानीय समुदाय ने उसी कॉफी शॉप को समर्थन देते हुए सकारात्मक रिव्यू देने शुरू किए। इस पूरे घटनाक्रम ने दिखाया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म किस तरह सामाजिक संघर्ष का माध्यम बनते जा रहे हैं।
सार्वजनिक त्योहारों और अनुमति का सवाल
कनाडा और अमेरिका में भारतीय त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन को लेकर हाल के महीनों में विरोध के स्वर तेज हुए हैं। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि सड़कों पर प्रोसेशन निकालने की अनुमति कैसे दी जाती है।
वास्तविकता यह है कि ऐसे आयोजनों के लिए प्रशासन से अनुमति ली जाती है और कई बार भारी शुल्क भी अदा करना पड़ता है। न्यूयॉर्क सिटी में बारात निकालने के लिए बड़ी राशि चुकाने के उदाहरण भी सामने आ चुके हैं।
ट्रैफिक, सड़क अवरोध और स्थानीय असुविधा
स्थानीय नागरिकों को अचानक सड़क बंद होने और ट्रैफिक बाधित होने की स्थिति से परेशानी होती है। इसी कारण धार्मिक प्रोसेशन और सामूहिक गतिविधियों पर आपत्ति जताई जा रही है।
बड़े शहरों में सामूहिक नमाज के दौरान सड़क अवरोध को लेकर भी इसी तरह की प्रतिक्रिया देखी गई है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था का सवाल उठता है।
भारतीय समुदाय के प्रति बढ़ती नाराजगी के कारण
अमेरिका में भारतीयों की संख्या में तेजी से वृद्धि एक प्रमुख कारण के रूप में सामने आ रही है। कई शहरों और इलाकों में भारतीय आबादी का घनत्व अचानक बढ़ने से स्थानीय समाज में असहजता देखी जा रही है।
इसके साथ ही आईटी सेक्टर में भारतीयों का वर्चस्व भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कई कंपनियों और टीमों में भारतीय कर्मचारियों की अत्यधिक संख्या स्थानीय लोगों को रोजगार असंतुलन का संकेत देती है।
मेडिकल और कॉरपोरेट सेक्टर की छवि पर असर
भारतीय डॉक्टरों से जुड़े कुछ मेडिकल घोटालों ने भी नकारात्मक धारणा को बल दिया है। गलत दवाएं लिखने और किकबैक से जुड़े मामलों ने विश्वास को कमजोर किया है।
कॉरपोरेट जगत में भारतीय मूल के शीर्ष अधिकारियों द्वारा अपनाए गए कठोर प्रबंधन तरीकों ने भी कार्य संस्कृति और नैतिकता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
साइबर ठगी सबसे बड़ा ट्रिगर फैक्टर
इन सभी कारणों में सबसे गंभीर मुद्दा भारत से संचालित साइबर ठगी को माना जा रहा है। बुजुर्ग अमेरिकियों को निशाना बनाने वाले इन अपराधों ने व्यापक आक्रोश को जन्म दिया है।
सरकारी स्तर पर सख्त और निर्णायक कार्रवाई की कमी से यह आक्रोश और गहराता जा रहा है, जिसका असर पूरे भारतीय समुदाय पर पड़ रहा है।
उत्सवधर्मिता और शक्ति प्रदर्शन पर बहस
सार्वजनिक स्थानों पर बड़े पैमाने पर धार्मिक आयोजनों को संख्या और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जाने लगा है। इससे स्थानीय समाज में असंतुलन की भावना पैदा हो रही है।
त्योहारों के आयोजन पर कोई रोक नहीं है, लेकिन सार्वजनिक असुविधा और सामाजिक संतुलन को लेकर गंभीर विमर्श की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
टेक्सास में सामने आए ये घटनाक्रम केवल साइबर अपराध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक स्तर पर गहराते तनाव की ओर संकेत करते हैं।
यह मुद्दा अब केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय छवि, प्रवासी संबंधों और सामाजिक सामंजस्य से जुड़ा व्यापक प्रश्न बन चुका है।

