ईरान से भारतीय नागरिकों को लाने की तैयारी: ईरान में लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए एक कंटीजेंसी प्लान तैयार कर लिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को पहला जत्था भारत लाया जा सकता है। अनुमान है कि इस समय ईरान में करीब 10,000 से ज्यादा भारतीय रह रहे हैं,
जिनमें बड़ी संख्या छात्रों की है। खासकर कश्मीर से गए मेडिकल छात्रों के परिवार काफी चिंतित हैं।
दूतावास कर रही छात्रों से संपर्क
ईरान से भारतीय नागरिकों को लाने की तैयारी: बता दें कि ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और सरकार की सख्ती के खिलाफ लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और हमले की धमकियों ने हालात और खराब कर दिए हैं।
तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने अलग-अलग शहरों में पढ़ रहे छात्रों से संपर्क करना शुरू कर दिया है। दूतावास यह जानने की कोशिश कर रहा है कि कौन-कौन भारत लौटना चाहता है।
हालांकि इंटरनेट सेवाएं बंद होने और फोन नेटवर्क कमजोर होने की वजह से यह काम दूतावास के कर्मचारी खुद मौके पर जाकर कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि अधिकारी सभी छात्रों और भारतीय नागरिकों के संपर्क में हैं और चार्टर्ड फ्लाइट्स की व्यवस्था की जा रही है।
सरकार ने हिंसा वाले इलाके को दी प्राथमिक
सरकार ने उन इलाकों को प्राथमिकता दी है जहां हिंसा सबसे ज्यादा है, ताकि वहां फंसे लोगों को पहले निकाला जा सके।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से इस मुद्दे पर बात की।
जयशंकर ने भरोसा दिलाया कि ईरान में मौजूद कश्मीरी छात्रों और अन्य भारतीयों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
भारतीय दूतावास ने एक एडवाइजरी जारी कर सभी भारतीय नागरिकों छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों से जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की अपील की है।
सरकार लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर और उड़ानों की व्यवस्था की जाएगी, ताकि सभी भारतीय सुरक्षित अपने देश लौट सकें।

