सर क्रीक पर फिर बढ़ा तनाव: भारत और पाकिस्तान के बीच सर क्रीक को लेकर एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान ने इस विवादित इलाके में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं।
अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती, ड्रोन निगरानी में इजाफा, मिसाइल क्षमताओं को मजबूत करना और एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय करना ये सभी कदम इस क्षेत्र को फिर सुर्खियों में ले आए हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारत की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ा सकती है।
सर क्रीक पर फिर बढ़ा तनाव: कहां है सर क्रीक?
सर क्रीक गुजरात के कच्छ क्षेत्र और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच फैला लगभग 96 किलोमीटर लंबा दलदली क्षेत्र है।
यह इलाका समुद्र और जमीन के बीच स्थित संक्रमण क्षेत्र माना जाता है। यहां खारे पानी के दलदल, कीचड़ और संकरी जलधाराएं हैं।
पहली नजर में यह इलाका बंजर लग सकता है, लेकिन यही क्षेत्र भारत-पाकिस्तान की समुद्री सीमाओं को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
ब्रिटिश दौर से उलझा विवाद
सर क्रीक विवाद की शुरुआत ब्रिटिश शासन काल से मानी जाती है। वर्ष 1914 में सिंध और कच्छ के बीच सीमा निर्धारण को लेकर एक समझौता हुआ था।
पाकिस्तान का कहना है कि उस समझौते में सीमा को सर क्रीक के पूर्वी किनारे के साथ तय किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र सिंध के अधिकार में आता है।
भारत इस व्याख्या से असहमत है। भारत का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के “थलवेग सिद्धांत” के अनुसार नदी या जलधारा की सीमा उसकी मुख्य धारा के बीच से तय की जाती है।
भारत के अनुसार 1925 के नक्शे और क्रीक के बीच लगाए गए खंभे इस दावे को मजबूत करते हैं।
1968 में अधूरा रह गया समाधान
1968 में इस विवाद को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल का सहारा लिया गया था। उस दौरान कच्छ से जुड़े कई अन्य सीमा विवादों का समाधान हो गया,
लेकिन सर क्रीक का मामला जस का तस बना रहा। इसके बाद से दोनों देशों के बीच यह मुद्दा लगातार अविश्वास को बढ़ाता रहा है।
तेल, गैस और समुद्री सीमाएं
सर क्रीक का विवाद सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर अरब सागर में समुद्री सीमा और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) पर पड़ता है।
यदि सीमा भारत के पक्ष में तय होती है तो भारत को ज्यादा समुद्री क्षेत्र और संभावित तेल-गैस संसाधनों तक पहुंच मिल सकती है।
वहीं पाकिस्तान का दावा मानने पर भारत का EEZ क्षेत्र सिमट सकता है। यही आर्थिक हित इस विवाद को और जटिल बना देते हैं।
मछुआरों की जिंदगी पर असर
यह इलाका मछली उत्पादन के लिहाज से बेहद समृद्ध है। अरब सागर का यह हिस्सा उपमहाद्वीप के सबसे अच्छे मछली क्षेत्रों में गिना जाता है।
सीमा स्पष्ट न होने के कारण भारतीय और पाकिस्तानी मछुआरे अक्सर अनजाने में एक-दूसरे के पानी में चले जाते हैं और गिरफ्तार कर लिए जाते हैं।
दोनों देशों की जेलों में आज भी सैकड़ों मछुआरे बंद हैं। उनके परिवार वर्षों से उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं। इस वजह से यह विवाद अब मानवीय संकट का रूप भी ले चुका है।
सुरक्षा के नजरिये से अहम क्यों?
सुरक्षा की दृष्टि से सर क्रीक बेहद संवेदनशील माना जाता है। 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद भारत ने समुद्री सुरक्षा को लेकर अपनी निगरानी काफी बढ़ा दी थी।
इसके बाद से तटरक्षक बल और सुरक्षा एजेंसियों की गश्त इस क्षेत्र में लगातार तेज की गई है।
बीते कुछ वर्षों में कई बार संदिग्ध नावें और लावारिस जहाज मिलने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके चलते अलर्ट जारी करना पड़ा।
इससे साफ होता है कि यह इलाका आतंकवाद और तस्करी जैसी गतिविधियों के लिए भी संवेदनशील है।
क्यों बढ़ी ताजा चिंता?
हाल के दिनों में पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने इस इलाके को फिर रणनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस पर खास जोर यह संकेत देता है कि पाकिस्तान इस क्षेत्र को सैन्य दृष्टि से मजबूत करना चाहता है। इससे भारत की सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।

