क्या है रोल बॉल: रोल बॉल एक ऐसा खेल है, जिसकी शुरुआत महज़ एक संयोग से हुई। कहते हैं न, कई बार गलती से हुई घटनाएँ इतिहास रच देती हैं।
कुछ ऐसा ही हुआ जब बास्केटबॉल गलती से रोलर स्केटिंग की प्रैक्टिस वाली जगह गिर गई। उसी पल एक नई सोच ने जन्म लिया और वहीं से रोल बॉल का सफर शुरू हुआ।
अगर आप भी सोच रहे हैं कि आखिर यह रोल बॉल है क्या और इसे कैसे खेला जाता है, तो आइए आपको इसकी दिलचस्प कहानी बताते हैं।
रोल बॉल का अविष्कार
साल 2003 में पुणे के MES बाल शिक्षण मंदिर स्कूल में फिजिकल एजुकेशन टीचर राजू दाभाडे ने इस खेल का आविष्कार किया।
उन्होंने रोलर स्केटिंग और बॉल गेम्स को मिलाकर कुछ अलग करने की ठानी।
चूंकि भारत में पहले से ही रोलर स्केटिंग और बॉल से जुड़े खेल लोकप्रिय थे, इसलिए यह नया खेल लोगों को तुरंत पसंद आने लगा।
देखते ही देखते रोल बॉल देशभर में फैल गया और आज इसे इंटरनेशनल रोल बॉल फेडरेशन यानी IRBF द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि हाल ही में भारतीय टीम ने केन्या को हराकर विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है।
मिक्सअप है कई खेलों का
रोल बॉल एक बेहद रोमांचक खेल है, जिसे खिलाड़ी रोलर स्केट्स पहनकर खेलते हैं।
इन स्केट्स में स्टॉपर नहीं होते, जिससे खिलाड़ी तेज़ रफ्तार में बेहतर संतुलन और नियंत्रण के साथ खेल पाते हैं।
यह खेल रोलर स्केटिंग, बास्केटबॉल, हैंडबॉल और थ्रोबॉल का अनोखा मिश्रण है। इसमें टीमवर्क, ताकत, संतुलन और रणनीति की बड़ी भूमिका होती है।
मैदान पर हर खिलाड़ी को अपने साथी खिलाड़ियों के साथ तालमेल बनाकर चलना पड़ता है।
12 प्लयेर खिलाड़ी
हर टीम में कुल 12 खिलाड़ी होते हैं, जिनमें से 6 खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं और बाकी 6 सब्स्टीट्यूशन के लिए तैयार रहते हैं।
टीम में एक गोलकीपर भी होता है, जो चेस्ट गार्ड, हेलमेट, ग्लव्स और नी पैड पहनकर गोल की रक्षा करता है।
बाकी खिलाड़ी भी हेलमेट और नी पैड के साथ खेलते हैं ताकि किसी भी तरह की चोट से बचा जा सके।
दो रंगों में होती है गेंद
रोल बॉल की गेंद आधी लाल और आधी नीली होती है, जिस पर रोल बॉल का लोगो बना रहता है।
जूनियर वर्ग में गेंद का वजन 450 से 500 ग्राम के बीच होता है और उसकी परिधि 60 से 70 सेंटीमीटर होती है।
वहीं सीनियर वर्ग में गेंद का वजन 570 से 650 ग्राम और परिधि 75 से 78 सेंटीमीटर तक होती है। कोर्ट की लंबाई 28 मीटर और चौड़ाई 15 मीटर होती है।
गोल लाइन से 2.5 मीटर की दूरी पर डी-एरिया बना होता है और पेनल्टी लाइन 4 मीटर दूर होती है।
गोल पोस्ट की ऊँचाई 1.75 मीटर और चौड़ाई 2 मीटर होती है। सब्स्टीट्यूशन ज़ोन साइडलाइन से 2 मीटर की दूरी पर निर्धारित होता है।
खेल के नियम
खेल की शुरुआत सेंटर लाइन से पास देकर की जाती है। अगर शुरुआती पास सही नहीं जाता और बॉल शॉर्ट रह जाती है, तो खेल को राइट कॉर्नर से शुरू किया जाता है।
सीनियर वर्ग में मैच दो हाफ में खेला जाता है, जिनमें से हर हाफ 25 मिनट का होता है। दोनों हाफ के बीच खिलाड़ियों को 10 मिनट का ब्रेक दिया जाता है।
रोल बॉल में पासिंग, टैपिंग, शूटिंग और स्केट्स पर कंट्रोल सबसे अहम स्किल्स मानी जाती हैं। खिलाड़ी बॉल को डायरेक्ट पास भी कर सकते हैं और बाउंस पास भी।
ड्रिब्लिंग करते हुए भी पास देना संभव होता है। पास और शूटिंग के लिए खिलाड़ी एक या दोनों हाथों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि खिलाड़ी को डी-एरिया में जाने से पहले ही शॉट लेना होता है।
कार्ड सिस्टम
अगर कोई खिलाड़ी फाउल करता है तो दूसरी टीम को बॉल दे दी जाती है। यदि कोई खिलाड़ी लगातार 3 सेकंड तक बॉल को बाउंस नहीं करता, तो इसे नियम उल्लंघन माना जाता है।
डबल ड्रिब्लिंग, 3 सेकंड तक बॉल पकड़े रखना और ट्रैवलिंग जैसे नियम तोड़ने पर टर्नओवर हो जाता है।
कार्ड सिस्टम के तहत छोटे उल्लंघनों पर खिलाड़ी को पीला कार्ड दिया जाता है, जो चेतावनी के रूप में होता है।
वहीं गंभीर अपराध करने पर लाल कार्ड दिया जाता है, जिसके बाद खिलाड़ी को मैदान से बाहर कर दिया जाता है और उसकी जगह सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी मैदान में उतरता है।
जब बॉल विरोधी टीम के गोल में चली जाती है, तो उसे गोल माना जाता है। अगर मैच टाई हो जाए, तो अतिरिक्त समय दिया जाता है।
इसमें कभी-कभी “ग्रैंड गोल” का नियम लागू होता है या फिर स्कोर होने तक धीरे-धीरे मैदान में खिलाड़ियों की संख्या कम की जाती है।
गोल के सामने बना अर्धवृत्ताकार हिस्सा डी-एरिया कहलाता है, जहाँ गोलकीपर बचाव करता है।
अगर बॉल बाउंड्री के बाहर चली जाए, तो खेल साइडलाइन से थ्रो-इन के जरिए दोबारा शुरू किया जाता है।

