KGMU परिसर में अवैध मजारों पर कार्रवाई: लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है।
हाल ही में सामने आए कथित धर्मांतरण रैकेट के बाद अब परिसर में बनी अवैध मजारों को हटाने की कार्रवाई ने सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी है।
KGMU प्रशासन ने सोमवार 9 फरवरी को अवैध मजारों को हटाने के लिए दूसरा नोटिस जारी करने का फैसला लिया है, जो सुबह 11 बजे चस्पा किया जाएगा।
अब सख्ती के मूड में प्रशासन
KGMU परिसर में अवैध मजारों पर कार्रवाई: KGMU प्रशासन इससे पहले 23 जनवरी 2026 को मजारों को हटाने के लिए पहला नोटिस जारी कर चुका है।
उस नोटिस में संबंधित पक्षों को 15 दिनों का समय दिया गया था, ताकि वे स्वयं मजारों को हटा लें।
हालांकि, तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद प्रशासन ने नियमों के तहत दूसरा नोटिस जारी करने का निर्णय लिया है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी है और परिसर को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए जरूरी है।
कैंपस में कहां-कहां बनी हैं मजारें
जानकारी के अनुसार KGMU परिसर के अलग-अलग हिस्सों में कुल पांच मजारें बनी हुई हैं।
इनमें क्वीन मेरी गेट के पास, ट्रॉमा सेंटर क्षेत्र, माइक्रोबायोलॉजी और रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के आसपास स्थित मजारें शामिल हैं।
इसके अलावा आर्थोपेडिक सुपर स्पेशियलिटी भवन और टीजी हॉस्टल क्षेत्र में भी मजारों का निर्माण किया गया है।
प्रशासन का तर्क है कि ये सभी संरचनाएं बिना अनुमति के बनाई गई हैं और संस्थान के नियमों का उल्लंघन करती हैं।
राजनीतिक और धार्मिक विरोध तेज
मजारों पर नोटिस चस्पा होने के बाद इसका विरोध भी शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं और कई मुस्लिम मौलानाओं ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है।
उनका कहना है कि किसी भी धार्मिक स्थल को हटाने से पहले सभी पक्षों से बातचीत और सहमति जरूरी है।
विरोध करने वालों का आरोप है कि प्रशासन एकतरफा कार्रवाई कर रहा है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं।
नियम और कानून से कोई समझौता नहीं
वहीं KGMU प्रशासन ने साफ किया है कि यह कदम किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है।
अधिकारियों का कहना है कि संस्थान परिसर में किसी भी तरह का अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है, चाहे वह किसी भी प्रकृति का क्यों न हो।
प्रशासन के अनुसार, विश्वविद्यालय की जमीन पर नियमों के विपरीत बनी संरचनाओं को हटाना उनकी जिम्मेदारी है।
धर्मांतरण गैंग का सरगना रमीज़!
गौरतलब है कि KGMU पहले ही कथित धर्मांतरण रैकेट को लेकर सुर्खियों में रहा है।
इस मामले में डॉक्टर रमीज़ का नाम सामने आया था, जिन पर धर्मांतरण की “गैंग” से जुड़े होने के गंभीर आरोप लगे हैं।
आरोप है कि यह नेटवर्क सुनियोजित तरीके से युवाओं को निशाना बनाकर धर्म परिवर्तन करा रहा था।
अब मजारों को लेकर की जा रही कार्रवाई को लोग धर्मांतरण के “गैंग” पर शिकंजा कसने के तौर पर भी देख रहे हैं।
छवि सुधारने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि KGMU प्रशासन इस समय अपनी साख और छवि को लेकर बेहद सतर्क है।
धर्मांतरण विवाद में नाम आने के बाद विश्वविद्यालय पर लगातार सवाल उठे हैं।
ऐसे में अवैध मजारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाकर प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि परिसर में किसी भी तरह की गैरकानूनी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह कार्रवाई किस दिशा में जाती है और विरोध के बीच प्रशासन अपने फैसले पर कितना अडिग रहता है।

