Tuesday, March 10, 2026

हंसराज रघुवंशी बायोग्राफी: असफलता की राख से उपजा ‘बाबा जी’ का दिव्य संगीत

हंसराज रघुवंशी बायोग्राफी: हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों में एक साधारण सा लड़का था। पढ़ाई में वह बहुत अच्छा नहीं था। कॉलेज की परीक्षाओं में कई बार असफल हुआ। हालात ऐसे बने कि एक समय उसे उसी कॉलेज की कैंटीन में काम करना पड़ा जहाँ वह कभी पढ़ाई करता था।

वह उन छात्रों को खाना परोसता था जिनके साथ कभी क्लास में बैठा करता था। उस दौर में शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही लड़का आगे चलकर देश का जाना-पहचाना भक्ति गायक बनेगा।

आज वही युवक लाखों लोगों के दिलों में बसता है। उसकी आवाज हिमालय की घाटियों से लेकर बड़े शहरों तक गूंजती है। लोग उसे प्यार से “बाबा जी” कहकर बुलाते हैं।

यह कहानी है हंसराज रघुवंशी की — एक ऐसे गायक की जिसने भक्ति संगीत को नई पहचान दी।

व्यक्तिगत जानकारी

पूरा नाम हंसराज रघुवंशी
लोकप्रिय नामबाबा जी
जन्म 18 जुलाई 1992
आयु (2025) 33 वर्ष
जन्मस्थान बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश, भारत
पहचान गायक, संगीतकार और लेखक
प्रसिद्धि का आधार भगवान शिव के आधुनिक भक्ति गीत
शैली पहाड़ी लोक और भक्ति फ्यूजन
वादक हारमोनियम और गायन
कुल संपत्ति अनुमानित ₹10–₹15 करोड़
पिता प्रेम लाल
माता लीला देवी
पत्नी कोमल सकलानी
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिंदू धर्म

शुरुआती जीवन

हंसराज रघुवंशी का जन्म 18 जुलाई 1992 को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में हुआ। उनका परिवार साधारण मध्यमवर्गीय था। पिता का नाम प्रेम लाल और माता का नाम लीला देवी है। उनके भाई मनजीत रघुवंशी और बहन सीमा रघुवंशी हैं।

हालाँकि उनका जन्म बिलासपुर में हुआ, लेकिन उनका पैतृक गाँव सोलन जिले की अर्की तहसील में स्थित मंगल गाँव है। पहाड़ों के शांत वातावरण में पले-बढ़े हंसराज बचपन से ही लोकगीतों और भजनों से जुड़े रहे।

हिमाचल को अक्सर देवभूमि कहा जाता है। मंदिरों, मेलों और जागरणों का माहौल उनके बचपन का हिस्सा रहा। शायद यही वजह है कि बचपन से ही उनके मन में भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था पैदा हो गई।

बचपन से ही संगीत का शौक

हंसराज को बचपन से ही गाने का शौक था। गाँव के कार्यक्रमों, मंदिरों और जागरणों में वे अक्सर भजन गाया करते थे।

उनका संगीत किसी औपचारिक प्रशिक्षण से नहीं आया, बल्कि लोक संस्कृति और भक्ति से निकला।

पहाड़ों में गूंजने वाले पारंपरिक भजन और लोकधुनें उनके अंदर धीरे-धीरे बसती चली गईं।

पढ़ाई में संघर्ष

स्कूल के बाद उन्होंने सुंदरनगर के एमएलएसएम कॉलेज में बी.कॉम में दाखिला लिया। लेकिन पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता था।

वे दूसरे वर्ष की परीक्षा में कई बार असफल हो गए। यह समय उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था।

बहुत से लोग ऐसी स्थिति में हार मान लेते हैं, लेकिन हंसराज ने हार नहीं मानी।

कैंटीन के दिन

कैंटीन में काम करते हुए भी हंसराज का संगीत से रिश्ता कभी नहीं टूटा। काम करते समय वे अक्सर भजन गुनगुनाते रहते थे। कई बार बर्तन धोते हुए या चाय बनाते समय वे भगवान शिव के नाम के गीत लिखते और धुनें सोचते रहते थे।

उनका कहना है कि उस समय कैंटीन में बर्तनों की आवाज, लोगों की बातचीत और रोजमर्रा की हलचल ही उनके लिए पहला “संगीत स्टूडियो” थी। वहीं बैठकर वे अपने सपनों को आकार देने लगे थे।

उन दिनों भले ही उनके पास संसाधन नहीं थे, लेकिन उनके अंदर संगीत के लिए जुनून और भगवान शिव के प्रति गहरी श्रद्धा थी। यही जुनून उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता रहा।

मोबाइल से शुरू हुई रिकॉर्डिंग

शुरुआती दिनों में उनके पास प्रोफेशनल स्टूडियो में रिकॉर्डिंग कराने के लिए पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने अपने भजनों को साधारण मोबाइल फोन से रिकॉर्ड करना शुरू किया।

वे इन गानों को यूट्यूब पर अपलोड करते थे और धीरे-धीरे लोग उन्हें सुनने लगे। कैंटीन की नौकरी और छोटे-मोटे कामों से जो भी पैसे मिलते थे, वे उन्हें बचाकर अपने संगीत के लिए खर्च करते थे।

आखिरकार कई साल की मेहनत के बाद 2016 में उन्होंने अपना पहला आधिकारिक गीत “बाबा जी” रिलीज किया। यह गीत बहुत बड़ा हिट तो नहीं हुआ, लेकिन इससे उन्हें पहचान मिलने लगी और लोग उन्हें “बाबा जी” के नाम से जानने लगे।

सफलता का बड़ा मोड़

साल 2019 में उनका गीत “मेरा भोला है भंडारी” रिलीज हुआ और यही गीत उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। यह गाना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लाखों लोगों तक पहुँच गया।

इस गीत की खास बात उसकी सादगी और भक्ति थी। इसमें न तो ज्यादा चमक-दमक थी और न ही भारी-भरकम म्यूजिक। इसके बावजूद इस गाने की भावनाओं ने लोगों के दिलों को छू लिया।

इस गीत के बाद हंसराज रघुवंशी रातों-रात भक्ति संगीत की दुनिया में एक बड़ी पहचान बन गए।

बॉलीवुड में कदम

उनकी लोकप्रियता बढ़ने के बाद उन्हें फिल्म इंडस्ट्री से भी ऑफर मिलने लगे। उन्होंने फिल्म Pal Pal Dil Ke Paas में “आधा भी है ज्यादा” गीत गाकर बॉलीवुड में अपनी शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने फिल्म OMG 2 के लिए “ऊँची ऊँची वादी” गाया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया।

हालाँकि उन्होंने फिल्मी दुनिया में भी काम किया, लेकिन उनकी असली पहचान आज भी भगवान शिव के भक्ति गीतों से ही जुड़ी हुई है।

लोकप्रिय गाने

हंसराज रघुवंशी के कई भक्ति गीत बेहद लोकप्रिय हुए हैं, जैसे:

-मेरा भोला है भंडारी

-लागी लगन शंकरा

-डमरू वाला

-शिव कैलाशों के वासी

-भोले बाबा

इन गानों ने भक्ति संगीत को नई पहचान दी।

“बाबा जी” की पहचान और शैली

हंसराज रघुवंशी का व्यक्तित्व भी उतना ही अनोखा है जितना उनका संगीत। उनके लंबे प्राकृतिक ड्रेडलॉक बाल, पारंपरिक पहाड़ी कपड़े और मंच पर नंगे पैर गाने का अंदाज़ उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाता है।

उनके गानों में पहाड़ी लोक संगीत, आधुनिक संगीत और भक्ति का सुंदर मिश्रण दिखाई देता है। यही कारण है कि उनका संगीत युवाओं और बुजुर्गों दोनों को पसंद आता है। कई लोग उन्हें “स्पिरिचुअल रॉकस्टार” भी कहते हैं।

डिजिटल सफलता और लोकप्रियता

आज हंसराज रघुवंशी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बेहद लोकप्रिय हैं। उनके यूट्यूब चैनल पर करोड़ों सब्सक्राइबर हैं और उनके कई गानों को करोड़ों-अरबों बार देखा जा चुका है।

उनके गीत केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सुने जाते हैं। वे कई बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति दे चुके हैं। कई बार वे Isha Foundation के महाशिवरात्रि कार्यक्रम में भी गा चुके हैं, जिसे आध्यात्मिक गुरु Sadhguru आयोजित करते हैं।

यूट्यूब पर जबरदस्त सफलता

आज के डिजिटल दौर में Hansraj Raghuwanshi ने यूट्यूब के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है।

शुरुआत में उन्होंने साधारण मोबाइल फोन से अपने भजन रिकॉर्ड करके यूट्यूब पर अपलोड करने शुरू किए थे, लेकिन धीरे-धीरे लोगों को उनका संगीत पसंद आने लगा और उनका चैनल तेजी से लोकप्रिय होता गया। आज उनका यूट्यूब चैनल भक्ति संगीत के सबसे बड़े चैनलों में से एक माना जाता है।

वर्तमान समय में उनके चैनल पर 14 मिलियन से भी ज्यादा सब्सक्राइबर हैं और उनके गानों को कुल मिलाकर अरबों बार देखा जा चुका है।

“मेरा भोला है भंडारी”, “लागी लगन शंकरा”, “डमरू वाला” जैसे कई गीत ऐसे हैं जिन्हें करोड़ों लोगों ने बार-बार सुना और साझा किया।

यूट्यूब की वजह से उनका संगीत केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। आज उनके भक्ति गीत विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच भी काफी लोकप्रिय हैं।

अलग-अलग देशों में रहने वाले लोग भी उनके गानों के जरिए भगवान शिव की भक्ति से जुड़ते हैं।

यही कारण है कि हंसराज रघुवंशी को डिजिटल युग का एक सफल भक्ति गायक माना जाता है।

प्रमुख पुरस्कार

दादासाहेब फाल्के भारतीय टेलीविजन पुरस्कार (2022): यह उनके करियर के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है। उन्हें ‘भक्ति संगीत’ को आधुनिक रंग देने और उसे जन-जन तक पहुँचाने के लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया।

यूथ आइकॉन अवार्ड (2021): युवाओं के बीच आध्यात्मिक संगीत और पहाड़ी संस्कृति को लोकप्रिय बनाने के लिए उन्हें यह सम्मान दिया गया। उन्होंने साबित किया कि भक्ति भी “कूल” हो सकती है।

यूट्यूब डायमंड प्ले बटन: उनके चैनल की जबरदस्त लोकप्रियता और करोड़ों सब्सक्राइबर्स के चलते उन्हें यूट्यूब की ओर से ‘सिल्वर’, ‘गोल्ड’ और ‘डायमंड’ प्ले बटन मिल चुके हैं।

प्रमुख विवाद

साल 2019 में उनका बेहद लोकप्रिय गीत “मेरा भोला है भंडारी” रिलीज हुआ, जिसके बाद कुछ लोगों ने इसकी धुन की तुलना बैंड Indian Ocean के मशहूर गाने “मा रेवा” से की।

इस वजह से सोशल मीडिया पर काफी बहस भी हुई और कई लोगों ने इसे लेकर अलग-अलग राय दी।

हालांकि इसके बावजूद यह गीत बेहद लोकप्रिय रहा और लोगों के बीच आज भी खूब सुना जाता है। इसके अलावा 2024 में एक कार्यक्रम से जुड़े भुगतान को लेकर भी विवाद सामने आया था।

खबरों के अनुसार कार्यक्रम के आयोजन और भुगतान से जुड़ी कुछ गलतफहमियों के कारण मामला चर्चा में आया, हालांकि बाद में यह मुद्दा ज्यादा लंबा नहीं चला।

साल 2025 में एक और घटना सामने आई जब उन्हें कथित तौर पर धमकी और जबरन वसूली की साजिश में निशाना बनाया गया। इस मामले में पुलिस जांच भी हुई और उनकी सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई।

विरासत और प्रभाव

भक्ति का आधुनिकीकरण: उन्होंने भजन और लोक संगीत को गिटार और मॉडर्न बीट्स के साथ जोड़कर इसे ‘ओल्ड जनरेशन’ से निकालकर सीधे युवाओं की प्लेलिस्ट (Gym, Travel, Parties) में पहुँचा दिया।

सांस्कृतिक एंबेसडर: हिमाचल की पहाड़ियों और वहां की ‘पहाड़ी बोली’ को उन्होंने नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर एक नई पहचान दिलाई। आज लोग उनके गानों की वजह से हिमाचली संस्कृति पर गर्व करते हैं।

संघर्ष की मिसाल: एक फेल छात्र और कैंटीन वेटर से ‘नेशनल आइकन’ बनने तक का उनका सफर हर उस इंसान के लिए उम्मीद है जो खुद को हारा हुआ महसूस करता है।

इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट की ताकत: उन्होंने साबित किया कि बिना किसी बड़े म्यूजिक लेबल या बॉलीवुड के सहारे भी, सिर्फ एक मोबाइल और सच्ची श्रद्धा से दुनिया जीती जा सकती है।

कुछ रोचक बातें

  1. वो ड्रेडलॉक्स (जटाएं) असली हैं!

बहुत से लोगों को लगता है कि हंसराज ने फैशन के लिए पार्लर जाकर अपने बाल ऐसे बनवाए हैं, लेकिन सच यह है कि उनके ड्रेडलॉक्स पूरी तरह प्राकृतिक (Natural) हैं। वे इसे भगवान शिव का आशीर्वाद और अपनी पहाड़ी जड़ों (मलाना संस्कृति) का प्रतीक मानते हैं।

  1. जिस कॉलेज में फेल हुए, वहीं ‘चीफ गेस्ट’ बने

यह किसी फिल्मी सीन जैसा है! सुंदरनगर के जिस MLSM कॉलेज में हंसराज बी.कॉम में चार बार फेल हुए और जहाँ उन्होंने कैंटीन में बर्तन धोए, सफलता के बाद उसी कॉलेज ने उन्हें मुख्य अतिथि (Chief Guest) के रूप में आमंत्रित किया। उन्होंने उसी मंच पर परफॉर्म किया जहाँ कभी वे एक छात्र के रूप में संघर्ष कर रहे थे।

  1. ‘बर्तनों की खनक’ थी पहली म्यूजिक बीट

हंसराज बताते हैं कि जब वे कैंटीन में काम करते थे, तो बर्तन धोने या चाय बनाने के दौरान होने वाली आवाजों को वो ‘रिदम’ की तरह इस्तेमाल करते थे। उनके शुरुआती कई गानों की धुनें उन्हीं कैंटीन की रातों में गुनगुनाते हुए तैयार हुई थीं।

  1. मोबाइल से शुरू हुआ सफर

आज उनके पास हाई-टेक स्टूडियो हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं? उनका पहला गाना और कई शुरुआती भजन उन्होंने एक साधारण मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किए थे। उनके पास प्रोफेशनल माइक खरीदने तक के पैसे नहीं थे, बस महादेव पर भरोसा था।

  1. ‘अमली’ शब्द का असली मतलब समझाया

उनके गानों में अक्सर ‘अमली’ शब्द आता है। लोग इसे नशे से जोड़ते हैं, लेकिन हंसराज ने इसे एक नया अर्थ दिया। उनके अनुसार, ‘अमली’ वह है जो शिव की भक्ति के नशे में चूर हो, न कि किसी नशीले पदार्थ के।

  1. बॉलीवुड खुद चलकर आया

हंसराज कभी काम मांगने मुंबई नहीं गए। उनकी लोकप्रियता इतनी जबरदस्त थी कि सनी देओल ने खुद उन्हें फोन किया और अपने बेटे की फिल्म के लिए गाने का ऑफर दिया। उन्होंने साबित किया कि अगर आपकी कला में दम है, तो दुनिया आपको ढूंढ ही लेगी।

  1. सादगी आज भी बरकरार

इतनी शोहरत और करोड़ों की संपत्ति होने के बावजूद, हंसराज आज भी अक्सर नंगे पैर रहते हैं और पहाड़ों की सरल जीवनशैली पसंद करते हैं। उन्हें चकाचौंध वाली पार्टियों से ज्यादा शांति और ध्यान (Meditation) पसंद है।

By: Snigdha

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Karnika Pandey
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“This is Karnika Pandey, a Senior Journalist with over 3 years of experience in the media industry. She covers politics, lifestyle, entertainment, and compelling life stories with clarity and depth. Known for sharp analysis and impactful storytelling, she brings credibility, balance, and a strong editorial voice to every piece she writes.”
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