गोविंदा बायोग्राफी: सोचिये ज़रा कि कोई इंसान सिर्फ़ अपने चेहरे के भावों से लोगों को हंसा कैसे देता है?
कैसे बिना शब्द बोले भी एक कलाकार पूरी महफ़िल लूट लेता है और कैसे संघर्ष, गरीबी और असफलताओं की गलियों से निकलकर कोई व्यक्ति करोड़ों दिलों की धड़कन बन जाता है?
बॉलीवुड में कॉमेडी को नई पहचान देने वाला, बॉलीवुड में जिसने हंसी को पहचान दी, आम आदमी के किरदार को हीरो बनाया और अपनी अदाओं से हर उम्र के दर्शकों के दिल जीत लिए।
जिसका नाम आते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और याद आ जाते हैं सुपरहिट गाने, ज़बरदस्त कॉमेडी और यादगार फिल्में।
अपने अनोखे डांस स्टाइल, बेफिक्र अंदाज़ और देसी रंग से दर्शकों को दीवाना बनाने वाला, वो सितारा आख़िर कौन है, जो साधारण सा दिखते हुए भी असाधारण बन गया?
जी हां, हम बात कर रहे हैं गोविंदा की! गोविंदा ने 1990 के दशक में हिंदी सिनेमा पर राज किया और भारतीय फिल्म इतिहास के सबसे प्रिय मनोरंजनकर्ताओं में से एक बन गए।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
गोविंदा अरुण आहूजा का जन्म 21 दिसंबर 1963 को मुंबई में हुआ था, गोविंदा का सफर कभी भी सुगम नहीं रहा।
हालांकि उनका शुरुआती बचपन मुंबई के पॉश इलाके ‘कार्टर रोड’ के एक बंगले में बीता था,
लेकिन किस्मत के पलटने के कारण उन्हें अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा मुंबई के सुदूर इलाके विरार (Virar) की एक चॉल में बिताना पड़ा।
इसी वजह से उन्हें प्यार से ‘विरार का छोकरा’ भी कहा जाता है। बॉलीवुड के कॉमेडी किंग बनने से बहुत पहले,
गोविंदा एक छोटा लड़का था जो बड़े सपने देखता था लेकिन उसमें भविष्य को लेकर बहुत कम निश्चितता थी।
व्यक्तिगत जानकारी
| पूरा नाम | गोविंद अरुण आहूजा |
| मंच नाम | गोविंदा |
| जन्म तिथि | 21 दिसंबर 1963 |
| आयु | 62 वर्ष (2026) |
| जन्म स्थान | विरार, महाराष्ट्र, भारत |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| जाति | पंजाबी-सिंधी |
| ऊंचाई | 1.63 मीटर (5 फीट 4 इंच) |
| पेशा | अभिनेता, नर्तक, गायक, राजनीतिज्ञ |
| पत्नी | सुनीता आहूजा (विवाह 1987 में हुआ) |
| बच्चे | टीना आहूजा (बेटी), यशवर्धन आहूजा (बेटा) |
| पिता | अरुण कुमार आहूजा (अभिनेता) |
| माता | निर्मला देवी (गायिका-अभिनेत्री) |
| शिक्षा | वर्तक कॉलेज, वसई से बी.कॉम |
| राजनीतिक दल | शिवसेना (2024 से) |
| नेटवर्थ | ₹170 करोड़ (लगभग $18 मिलियन) |
पारिवारिक पृष्टभूमि
गोविंदा का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जिसकी जड़ें मनोरंजन जगत में गहरी थीं। उनके पिता अरुण कुमार आहूजा ने 1939 से 1954 तक 15 वर्षों के सफल अभिनय करियर का आनंद लिया, जिसमें उन्होंने 30 फिल्मों में अभिनय किया।
उनकी मां, निर्मला देवी, एक प्रसिद्ध गायिका और अभिनेत्री थीं, जिन्होंने महबूब खान की क्लासिक फिल्म ‘औरत’ (1940) में अभिनय किया था।
परिवार पहले मुंबई के कार्टर रोड स्थित एक बंगले में रहता था। जब गोविंदा के पिता ने एक फिल्म बनाई जो व्यावसायिक रूप से असफल रही,
तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ और वे विरार चले गए, जहां गोविंदा का जन्म पांच बच्चों में सबसे छोटे के रूप में हुआ।
13 साल की उम्र में उन्होंने विरार में एक रेस्तरां शुरू करने की कोशिश की, हालांकि यह उद्यम असफल रहा।
शैक्षिक पृष्टभूमि
स्कूली शिक्षा (Schooling)
गोविंदा की शुरुआती पढ़ाई मुंबई के उपनगरीय इलाके विरार (Virar) में हुई।
माहौल: एक फिल्मी परिवार से होने के बावजूद, घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्होंने एक सामान्य स्कूल से पढ़ाई की।
खास बात: स्कूल के दिनों में वे बहुत शर्मीले थे, लेकिन जब भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्टेज पर आते थे, तो उनका आत्मविश्वास देखने लायक होता था।
कॉलेज की शिक्षा (College)
गोविंदा ने अपनी उच्च शिक्षा वसई (मुंबई के पास) के एक नामी कॉलेज से पूरी की।
कॉलेज का नाम: अण्णासाहेब वर्तक कॉलेज (Annasaheb Vartak College), वसई।
डिग्री: उन्होंने कॉमर्स (B.Com) में स्नातक की डिग्री हासिल की।
संघर्ष: कॉलेज के दिनों में वे विरार से वसई तक लोकल ट्रेन से सफर करते थे। उनके पिता चाहते थे कि वे एक सुरक्षित सफेदपोश (White-collar) नौकरी करें, इसीलिए उन्होंने कॉमर्स विषय को चुना था।
विशेष प्रशिक्षण (Special Training)
भले ही गोविंदा ने अभिनय की कोई किताबी पढ़ाई नहीं की थी, लेकिन उन्होंने अपनी कला को निखारने के लिए कड़ी मेहनत की थी:
*शास्त्रीय संगीत (Classical Music):8 अपनी माँ, निर्मला देवी (जो एक महान शास्त्रीय गायिका थीं) से उन्होंने संगीत की बारीकियां सीखीं।
यही कारण है कि गोविंदा के अंदर सुर और ताल की गजब की समझ है, जो उनके डांस में साफ झलकती है।
नृत्य (Dance): गोविंदा ने किसी प्रोफेशनल डांस एकेडमी से ट्रेनिंग नहीं ली थी। वे मिथुन चक्रवर्ती और एल्विस प्रेस्ली के बहुत बड़े प्रशंसक थे।
वे घंटों शीशे के सामने खुद ही प्रैक्टिस करते थे। उन्होंने डिस्को और फ्रीस्टाइल डांस खुद ही सीखा, जिसे बाद में ‘गोविंदा स्टाइल’ के नाम से जाना गया।
अभिनय (Acting): उन्होंने मशहूर फिल्म मेकर रोशन तनेजा के एक्टिंग स्कूल से अभिनय की कुछ बारीकियां सीखी थीं। इसके अलावा, उन्होंने स्टंट और एक्शन के लिए भी शुरुआती ट्रेनिंग ली थी।
करियर की शुरुआत
- शुरुआती संघर्ष: जब चप्पलें घिस गईं, पर उम्मीद नहीं
गोविंदा का संघर्ष इतना आसान नहीं था। कॉमर्स में ग्रेजुएट होने के बाद भी जब उन्हें ताज होटल में वेटर तक की नौकरी नहीं मिली, तो उन्होंने हार मानने के बजाय अपने हुनर पर दांव लगाया।
लोकल ट्रेन का सफर: वे हर रोज विरार से लोकल ट्रेन पकड़कर दादर और बांद्रा के स्टूडियो जाते थे। अक्सर उनके पास इतने पैसे भी नहीं होते थे कि वे बाहर खाना खा सकें।
अनोखा ‘डेमो’ वीडियो: उस दौर में जब पोर्टफोलियो का चलन नहीं था, गोविंदा ने अपने उधार के पैसों से एक वीडियो टेप (VHS) बनवाया।
इसमें उन्होंने डांस और फाइटिंग के सीन रिकॉर्ड किए और इसे लेकर हर डायरेक्टर के दरवाजे पर दस्तक दी।
रिजेक्शन: कई लोगों ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि उनका लुक बहुत ‘देसी’ है या वे बहुत दुबले-पतले हैं।
करियर की पहली बड़ी उपलब्धि: ‘इल्जाम’ का धमाका
आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और साल 1986 में उन्हें अपनी पहली फिल्म मिली , ‘इल्जाम’।
रातों-रात स्टार: फिल्म का गाना ‘Street Dancer’ इतना बड़ा हिट हुआ कि गोविंदा रातों-रात पूरे भारत के ‘डांसिंग सुपरस्टार’ बन गए।
लोग सिनेमाघरों में उनके डांस पर पर्दे की ओर पैसे फेंकने लगे थे।
रिकॉर्ड तोड़ शुरुआत: आपको जानकर हैरानी होगी कि अपनी पहली फिल्म की सफलता के बाद, गोविंदा ने महज कुछ ही महीनों के अंदर 40 से 50 फिल्में साइन कर ली थीं!
यह बॉलीवुड के इतिहास में एक अनूठा रिकॉर्ड है।
- सफलता का सफर: एक साल में 50 फिल्में!
‘इल्जाम’ (1986) की सफलता के बाद गोविंदा की मांग इतनी बढ़ गई कि उन्होंने एक नया रिकॉर्ड बना दिया।
अतुलनीय रिकॉर्ड: उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में महज कुछ ही हफ्तों में 40 से 50 फिल्में साइन की थीं।
कई बार वे एक ही दिन में तीन-तीन अलग-अलग फिल्मों की शूटिंग करते थे।
90 के दशक का दबदबा: जहाँ शाहरुख, सलमान और आमिर खान अपनी जगह बना रहे थे, वहीं गोविंदा की कॉमेडी का एक अलग ही साम्राज्य था।
लोग उनकी फिल्में सिर्फ उनके डांस और कॉमिक टाइमिंग के लिए देखते थे।
महत्वपूर्ण मोड़ (Turning Points)
गोविंदा के करियर को तीन बड़ी फिल्मों ने नई दिशा दी:
‘स्वर्ग’ (1990): इस फिल्म ने साबित किया कि गोविंदा सिर्फ नाच-गाना ही नहीं, बल्कि गंभीर और भावुक अभिनय (Emotional Acting) में भी माहिर हैं।
‘आंखें’ (1993): डेविड धवन के साथ उनकी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। यहाँ से गोविंदा और डेविड धवन की वो जोड़ी बनी जिसने आगे चलकर ‘नंबर 1’ सीरीज की झड़ी लगा दी।
‘बडे मियाँ छोटे मियाँ’ (1998): इस फिल्म में गोविंदा ने सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ स्क्रीन शेयर की और कई दृश्यों में अपनी एनर्जी से उन्हें भी कड़ी टक्कर दी।
बड़ी उपलब्धियाँ (Major Achievements)
कॉमेडी के बादशाह: गोविंदा को 12 बार फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए नामांकित किया गया और उन्होंने ‘हसीना मान जाएगी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का पुरस्कार जीता।
ग्लोबल स्टार: 1999 में, एक बीबीसी ऑनलाइन पोल में गोविंदा को पिछले एक हजार वर्षों के दुनिया के 10 सबसे बड़े सितारों में जगह दी गई थी।
डांसिंग आइकन: वे बॉलीवुड के उन चंद अभिनेताओं में से हैं जिनका अपना एक अलग ‘डांसिंग स्टाइल’ है। आज भी रियलिटी शोज में प्रतियोगी उन्हें अपना गुरु मानते हैं।
प्रमुख कार्य और उपलब्धियाँ: मनोरंजन का ‘नंबर 1’ ब्रांड
यादगार फिल्में (Iconic Movies)
गोविंदा ने 165 से अधिक फिल्मों में काम किया है।
कॉमेडी किंग सीरीज: कुली नं. 1, राजा बाबू, हीरो नं. 1, दूल्हे राजा, बड़े मियाँ छोटे मियाँ, साजन चले ससुराल, हसीना मान जाएगी।
इमोशनल और ड्रामा: स्वर्ग (जिसने हर किसी को रुला दिया), खुदगर्ज, और हत्या।
धमाकेदार कमबैक: पार्टनर (2007), जिसमें उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से नए दौर के दर्शकों को भी अपना मुरीद बना लिया।
सदाबहार गाने (Evergreen Songs)
गोविंदा के गाने सिर्फ सुनने के लिए नहीं, बल्कि झूमने के लिए होते हैं। उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध गाने हैं:
डांस एंथम: ‘यूपी वाला ठुमका’, ‘हुस्न है सुहाना’, ‘किसी डिस्को में जाएँ’, ‘सोना कितना सोना है’।
मस्ती भरे गाने: ‘अंखियों से गोली मारे’, ‘व्हाट इज मोबाइल नंबर’, ‘मैं तो रस्ते से जा रहा था’।
इमोशनल: ‘तुमसा कोई प्यारा कोई मासूम नहीं है’।
पुरस्कार और सम्मान (Major Awards)
गोविंदा की अलमारी पुरस्कारों से भरी है, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
Filmfare अवार्ड्स: ‘हसीना मान जाएगी’ के लिए Best Comedian का अवॉर्ड। उन्हें ‘साजन चले ससुराल’ के लिए स्पेशल अवॉर्ड भी मिला।
BBC Poll (1999): एक ऑनलाइन पोल में उन्हें पिछले हजार वर्षों के दुनिया के 10 सबसे महान सितारों में चुना गया था।
IIFA Awards: फिल्म ‘पार्टनर’ के लिए उन्हें बेस्ट कॉमेडियन का पुरस्कार मिला।
टीवी शो और अन्य (TV Shows & More)
जीतो छप्पर फाड़ के (2001): गोविंदा ने इस गेम शो के जरिए छोटे पर्दे पर अपनी मेजबानी (Hosting) का जादू बिखेरा।
डांस इंडिया डांस (DID): वे ‘DID सुपर मॉम्स’ में जज के रूप में नजर आए, जहाँ उन्होंने नए टैलेंट को प्रोत्साहित किया।
राजनीति: वे 2004 में मुंबई उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से सांसद (MP) भी चुने गए थे।
‘गोविंदा स्टाइल’ डांस
बॉलीवुड में ‘एक्सप्रेशन’ के साथ डांस करने की शुरुआत गोविंदा ने ही की थी।
उनके बारे में कहा जाता है कि वे पैर से ज्यादा अपने चेहरे के हाव-भाव (Facial Expressions) से नाचते हैं। आज भी हर शादी और पार्टी उनके गानों के बिना अधूरी है।
पुरस्कार और विशेष सम्मान (Awards & Honors)
वर्ष पुरस्कार का नाम श्रेणी / उपलब्धि फिल्म / संदर्भ
1997 फिल्मफेयर (Filmfare) स्पेशल परफॉर्मेंस अवार्ड साजन चले ससुराल
1998 ज़ी सिने अवार्ड्स बेस्ट एक्टर (कॉमेडी) दूल्हे राजा
1999 बीबीसी (BBC) दुनिया के 10वें सबसे महान स्टार ग्लोबल ऑनलाइन पोल
1999 ज़ी सिने अवार्ड्स बेस्ट एक्टर (कॉमेडी) बड़े मियाँ छोटे मियाँ
2000 फिल्मफेयर (Filmfare) बेस्ट कॉमेडियन हसीना मान जाएगी
2002 IIFA अवार्ड्स बेस्ट कॉमेडियन जोड़ी नं. 1
2008 IIFA अवार्ड्स बेस्ट कॉमेडियन पार्टनर
2016 इंडिया लीडरशिप कॉन्क्लेव एक्टर ऑफ द डिकेड भारतीय सिनेमा में योगदान
2020 फिल्मफेयर (Filmfare) एक्सीलेंस इन सिनेमा अवार्ड लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान
प्रमुख विवाद: जब चर्चा में आए ‘चीची’
- सेट पर थप्पड़ मारने का मामला (2008)
गोविंदा के करियर का सबसे चर्चित विवाद फिल्म ‘मनी है तो हनी है’ के सेट पर हुआ।
क्या हुआ था: शूटिंग के दौरान गोविंदा ने संतोष राय नाम के एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया था।
नतीजा: यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा। अंततः, गोविंदा ने कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए उस व्यक्ति से बिना शर्त माफी मांगी और मुआवजे के रूप में 5 लाख रुपये दिए।
शूटिंग में देरी और अनुशासन (Late Arrival)
90 के दशक के अंत और 2000 की शुरुआत में गोविंदा पर अक्सर सेट पर देर से आने के आरोप लगे।
असर: कई निर्देशकों और सह-कलाकारों ने शिकायत की कि गोविंदा के देरी से आने के कारण फिल्मों के बजट और शेड्यूल पर असर पड़ता था।
हालांकि उनके प्रशंसकों और करीबियों का मानना था कि उनकी बेमिसाल परफॉरमेंस उन सारी देरी की भरपाई कर देती थी।
डेविड धवन के साथ अनबन
एक समय था जब गोविंदा और निर्देशक डेविड धवन की जोड़ी को ‘अजेय’ माना जाता था (दोनों ने साथ में 17 फिल्में कीं)।
विवाद: बाद के वर्षों में दोनों के बीच दूरियां बढ़ गईं। गोविंदा ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जाहिर की थी कि जब उनका बुरा वक्त चल रहा था,
तब उनके सबसे करीबी दोस्त डेविड ने उनका साथ नहीं दिया और उन्हें अपनी फिल्मों में लेने से मना कर दिया।
कृष्णा अभिषेक के साथ पारिवारिक विवाद
- पिछले कुछ वर्षों में गोविंदा और उनके भांजे, मशहूर कॉमेडियन कृष्णा अभिषेक के बीच का मनमुटाव मीडिया की हेडलाइंस बना रहा।
कारण: यह विवाद मुख्य रूप से पारिवारिक गलतफहमियों और सार्वजनिक बयानों के कारण बढ़ा।
इसके चलते दोनों परिवारों ने लंबे समय तक एक-दूसरे से बात नहीं की और कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी भी हुई।
समाज में योगदान: पर्दे के पीछे के ‘हीरो’
स्वास्थ्य और चिकित्सा सहायता
गोविंदा ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में चुपचाप बहुत काम किया है।
कैंसर पीड़ितों की मदद: वे कई वर्षों से कैंसर से जूझ रहे बच्चों और परिवारों की आर्थिक सहायता करते रहे हैं।
वे अक्सर कैंसर अस्पतालों का दौरा करते हैं और वहां फंड जुटाने वाले कार्यक्रमों का हिस्सा बनते हैं।
मुफ्त चिकित्सा कैंप: उन्होंने अपने गृहनगर और मुंबई के उपनगरीय इलाकों में कई बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर (Health Camps) आयोजित करने में मदद की है।
शिक्षा के लिए पहल
एक मध्यमवर्गीय परिवार से आने के कारण गोविंदा शिक्षा की कीमत समझते हैं।
छात्रवृत्ति (Scholarships): उन्होंने कई गरीब मेधावी छात्रों की कॉलेज फीस और किताबों का खर्च उठाया है।
स्कूलों को समर्थन: विरार और उसके आसपास के कुछ स्थानीय स्कूलों को उन्होंने बुनियादी ढाँचा (Infrastructure) सुधारने के लिए गुप्त दान दिया है।
‘गोविंदा फाउंडेशन’ और चैरिटी
गोविंदा ने अपनी एक निजी संस्था के माध्यम से जरूरतमंदों की मदद करना शुरू किया।
भोजन वितरण: त्यौहारों और विशेष अवसरों पर उनके परिवार की ओर से बड़े पैमाने पर अन्न दान किया जाता है।
प्राकृतिक आपदा में मदद: चाहे वह मुंबई की बाढ़ हो या अन्य राष्ट्रीय आपदाएं, गोविंदा ने हमेशा मुख्यमंत्री राहत कोष (CM Relief Fund) में उदारतापूर्वक योगदान दिया है।
प्रेरणादायक पहल: युवाओं के लिए मार्गदर्शक
कलाकारों को प्रोत्साहन: गोविंदा ने अनगिनत छोटे शहरों के डांसर्स और कलाकारों को प्लेटफॉर्म दिलाने में मदद की है।
वे अक्सर रियलिटी शोज में गरीब पृष्ठभूमि से आए प्रतिभागियों को न केवल आर्थिक मदद देते हैं, बल्कि उन्हें करियर के गुर भी सिखाते हैं।
विरार का गौरव: उन्होंने विरार जैसे सुदूर इलाके को पहचान दिलाई।
उनकी सफलता आज भी लाखों छोटे शहर के युवाओं के लिए प्रेरणा है कि “अगर विरार का एक लड़का सुपरस्टार बन सकता है, तो कोई भी बन सकता है।”
- राजनीतिक कार्यकाल (2004-2009)
सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाने की कोशिश की।
उन्होंने रेलवे सुविधाओं में सुधार और स्थानीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवाज उठाई।
हालांकि बाद में उन्होंने राजनीति छोड़कर वापस कला को ही सेवा का माध्यम बनाया।
कुल संपत्ति और वित्तीय प्रोफ़ाइल
गोविंदा की अनुमानित कुल संपत्ति ₹170 करोड़ (18 मिलियन डॉलर) है, जो उन्हें बॉलीवुड के सबसे धनी अभिनेताओं में से एक बनाती है।
उनका मुख्य निवास जुहू में स्थित आलीशान “जय दर्शन” बंगला है, और उनके पास माढ द्वीप, कोलकाता, लखनऊ और रायगढ़ में भी अतिरिक्त संपत्तियां हैं।
उनके पास मर्सिडीज, टोयोटा फॉर्च्यूनर और फोर्ड एंडेवर सहित कारों का एक बहुमूल्य संग्रह है।
गोविंदा एक फिल्म के लिए 5-6 करोड़ रुपये और ब्रांड एंडोर्समेंट के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये लेते हैं, जिससे उनकी वार्षिक आय 11-17 करोड़ रुपये होती है।
अपनी संपत्ति के बावजूद, वे एक सरल और परिवार-उन्मुख जीवन शैली के लिए जाने जाते हैं।
श्रेणी अनुमान
कुल संपत्ति: ₹170 करोड़ (18 मिलियन डॉलर)
मुख्य निवास: “जय दर्शन” बंगला, जुहू (₹16 करोड़)
अन्य संपत्तियां: माढ द्वीप, कोलकाता, लखनऊ में 90,000 वर्ग फुट का कृषि क्षेत्र, रायगढ़ में फार्महाउस
कारों का संग्रह: मर्सिडीज C220D, मर्सिडीज बेंज़ GLC, टोयोटा फॉर्च्यूनर, फोर्ड एंडेवर
प्रति फिल्म शुल्क: ₹5–6 करोड़
ब्रांड एंडोर्समेंट: ₹2 करोड़
वार्षिक आय: ₹11–17 करोड़
गोविंदा के बारे में 5 रोचक तथ्य :
1 गुप्त विवाह: गोविंदा ने 1987 में सुनीता मुंजल से शादी की, लेकिन इस शादी को चार साल तक जनता से छिपाकर रखा गया।
2 प्रारंभिक संघर्ष: फिल्मी परिवार से आने के बावजूद, उनके पिता के करियर में आई गिरावट के कारण उनका बचपन आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहा।
3 फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए मामूली चूक: उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए 12 बार नामांकित किया गया था, लेकिन उन्होंने केवल 3 पुरस्कार जीते,
जिससे पता चलता है कि सितारों को भी कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
4 राजनीतिक विकल्प: उन्होंने अभिनय के बजाय राजनीति को चुना और 2004 में सांसद के रूप में कार्य किया, लेकिन एक कार्यकाल के बाद फिल्मों में लौटने के लिए पद छोड़ दिया।
5 उदार स्वभाव: धनवान होने के बावजूद, गोविंदा संघर्षरत अभिनेताओं और तकनीशियनों की चुपचाप और बिना प्रचार की चाह के मदद करने के लिए जाने जाते हैं।
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