असम SIT पर भड़के गोगोई: कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने खुद पर लगे पाकिस्तानी एजेंट से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपनी सफाई पेश की है।
उन्होंने कहा है कि उनकी पत्नी एलिजाबेथ के पाकिस्तान प्रवास को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
गोगोई के अनुसार वर्ष 2013 में उनकी पत्नी पेशेवर कारणों से पाकिस्तान गई थीं और उस दौरान वह भी करीब दस महीने तक उनके साथ वहां रहे थे।
उन्होंने यह भी दावा किया कि असम एसआईटी ने अपनी जांच के दौरान कभी उनसे 2013 में पाकिस्तान में रहने को लेकर कोई सवाल नहीं किया।
असम SIT रिपोर्ट ने बढ़ाया सियासी तूफान
असम SIT पर भड़के गोगोई: यह पूरा मामला तब और गंभीर हो गया, जब असम सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट सार्वजनिक की गई।
इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सामने रखते हुए कई चौंकाने वाले दावे किए।
रिपोर्ट में गौरव गोगोई और उनकी पत्नी एलिजाबेथ के पाकिस्तानी एजेंट तौकीर शेख से कथित करीबी संबंधों की बात कही गई है।
SIT के अनुसार, इन संबंधों की प्रकृति सामान्य पेशेवर दायरे से आगे जाती दिखती है।
तौकीर शेख की भारत यात्राओं पर सवाल
SIT रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि तौकीर शेख ने 2010 से 2013 के बीच कम से कम 13 बार भारत की यात्रा की।
इन यात्राओं को लेकर जांच एजेंसियों ने आशंका जताई है कि शेख भारत विरोधी गतिविधियों में किसी न किसी रूप में शामिल हो सकता है।
मुख्यमंत्री सरमा ने सवाल उठाया कि उस समय की UPA सरकार ने शेख के भारत आने पर कोई रोक क्यों नहीं लगाई,
जबकि उनके भारत विरोधी बयानों और गतिविधियों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थी।
एलिजाबेथ की नौकरी
SIT रिपोर्ट में एलिजाबेथ की नौकरी से जुड़े कई वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, एलिजाबेथ का आधिकारिक ट्रांसफर भारत में दिखाया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पाकिस्तान स्थित एक फर्म से सैलरी मिलती रही।
इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि भारत ट्रांसफर से करीब एक साल पहले ही उन्हें भारत में नियुक्ति का पत्र जारी कर दिया गया था,
जो सामान्य प्रक्रिया से अलग माना जा रहा है।
LEAD इंडिया
जांच में यह भी दावा किया गया है कि एलिजाबेथ की सैलरी को वैध तरीके से भारत भेजने के लिए एक संस्थागत ढांचा तैयार किया गया।
SIT के अनुसार, LEAD इंडिया को LEAD पाकिस्तान के अधीन लाया गया ताकि पाकिस्तान से भारत फंड ट्रांसफर किया जा सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (FCRA) के तहत किसी विदेशी नागरिक को सीधे फंड ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।
FCRA नियमों का हवाला
सीएम सरमा के मुताबिक, चूंकि एलिजाबेथ भारतीय नागरिक नहीं हैं, इसलिए LEAD पाकिस्तान सीधे उन्हें भुगतान नहीं कर सकता था।
इसी कारण एक भारतीय संस्था LEAD इंडिया के जरिए फंड भेजे जाने की व्यवस्था की गई।
सरकार का दावा है कि यह पूरा मॉडल FCRA के नियमों को दरकिनार करने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है, जिसकी गहराई से जांच जरूरी है।
राजनीतिक घमासान
इस पूरे मामले ने असम से लेकर दिल्ली तक सियासी माहौल गर्म कर दिया है। कांग्रेस जहां इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, व
हीं असम सरकार का कहना है कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
आने वाले दिनों में SIT की आगे की कार्रवाई और इस पर केंद्र की प्रतिक्रिया से इस विवाद की दिशा तय होगी।

