Gen-Z को पसंद आ रही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी: नेपाल की राजनीति में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) तेजी से एक प्रभावशाली ताकत के रूप में उभर रही है।
पारंपरिक राजनीतिक दलों से जनता की बढ़ती नाराजगी और नेपाली कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान के बीच आरएसपी मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ बना रही है।
वर्ष 2022 के संसदीय चुनाव में पार्टी ने महज 20 सीटें जीतकर चौथी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।
उस समय इसे एक नई और प्रयोगात्मक राजनीतिक शक्ति माना गया था, लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं।
मौजूदा राजनीतिक माहौल और सत्ताविरोधी लहर के बीच आरएसपी से लोगों की उम्मीदें कहीं ज्यादा बढ़ गई हैं।
आरएसपी क्या बनेगी किंगमेकर
Gen-Z को पसंद आ रही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी: 5 मार्च को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले कई सर्वेक्षणों में आरएसपी को निर्णायक भूमिका निभाने वाली पार्टी यानी ‘किंगमेकर’ की स्थिति में देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो आरएसपी सत्ता गठन में अहम भूमिका निभा सकती है।
खास बात यह है कि पार्टी को युवाओं और पहली बार मतदान करने वालों का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जो पारंपरिक दलों की राजनीति से निराश हैं।
78 लोगों की मौत को लेकर जनता में गुस्सा
दूसरी ओर, जेन-जी आंदोलन के दौरान 78 लोगों की मौत को लेकर जनता में भारी गुस्सा है,
इसके बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल के दूसरे स्थान पर रहने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
कई वर्गों का मानना है कि इस घटना ने ओली सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन फिर भी उनका पारंपरिक वोट बैंक पूरी तरह से खिसका नहीं है।
वैध नेपाली कांग्रेस बताते हुए किया आवेदन
नेपाली कांग्रेस इस समय गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रही है। पार्टी दो गुटों में बंटी नजर आ रही है।
एक ओर अध्यक्ष शेरबहादुर देउबा का गुट है, जबकि दूसरी ओर सुधारवादी धड़ा है, जिसकी अगुवाई गगन कुमार थापा और बिश्वप्रकाश शर्मा कर रहे हैं।
हाल ही में सुधारवादी गुट ने विशेष महाधिवेशन आयोजित कर अलग नेतृत्व और नई केंद्रीय कार्यकारिणी के गठन का दावा किया है।
इसके बाद दोनों गुटों ने चुनाव आयोग के समक्ष खुद को वैध नेपाली कांग्रेस बताते हुए आवेदन किया है। अब आयोग के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
इस गुटबाजी का सीधा असर पार्टी की चुनावी संभावनाओं पर पड़ रहा है और अनुमान लगाया जा रहा है कि नेपाली कांग्रेस तीसरे स्थान पर खिसक सकती है।
नेताओं की साफ-सुथरी छवि और प्रशासनिक अनुभव
आरएसपी की राजनीति ‘प्रो-नेपाल’ एजेंडे पर आधारित है। पार्टी राष्ट्रीय हित, संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
यही कारण है कि जेन-जी और शहरी मतदाताओं के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
हाल ही में काठमांडू के मेयर बालेन्द्र शाह और नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व प्रमुख कुलमन घिसिंग के आरएसपी में शामिल होने से पार्टी को नई ऊर्जा मिली है।
इन दोनों नेताओं की साफ-सुथरी छवि और प्रशासनिक अनुभव को पार्टी अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चेहरों का समर्थन चुनाव में आरएसपी को निर्णायक बढ़त दिला सकता है।
नेपाल की राजनीति में वाकई एक नया अध्याय शुरू होगा
वहीं राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) का जनाधार फिलहाल पहाड़ी और तराई के कुछ सीमित क्षेत्रों तक ही सिमटा हुआ है। पार्टी हिंदू राष्ट्र की बहाली और संघीय व्यवस्था के विरोध को अपने मुख्य मुद्दे के रूप में सामने रखती है।
हालांकि, राजशाही काल से जुड़ी उसकी छवि और पार्टी के भीतर जारी अंतर्कलह के कारण उसे व्यापक समर्थन नहीं मिल पा रहा है।
बीते कुछ वर्षों में आरपीपी ने आदिवासी और दलित वर्ग तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन इसका असर सीमित ही रहा है।
कुल मिलाकर नेपाल की राजनीति इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। जहां पारंपरिक दल अंदरूनी संघर्ष और जनता की नाराजगी से जूझ रहे हैं,
वहीं आरएसपी जैसी नई पार्टियां इस असंतोष को अपने पक्ष में बदलने की कोशिश कर रही हैं।
आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि क्या नेपाल की राजनीति में वाकई एक नया अध्याय शुरू होगा या फिर पुरानी राजनीतिक ताकतें ही सत्ता पर काबिज रहेंगी।

