Ganesh Chaturthi: गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन दक्षिण भारत के मंदिर इस त्योहार को और भी खास बना देते हैं।
यहां भगवान गणेश के कई प्राचीन और भव्य मंदिर हैं, जिनकी सुंदरता और परंपराएं भक्तों को गहराई से आकर्षित करती हैं। पत्थर और सोने से बनी प्रतिमाएं, अद्भुत स्थापत्य कला और भव्य सजावट इस समय देखने लायक होती है।
भक्त दूर-दूर से आकर भजन-कीर्तन, पूजा और आरती में हिस्सा लेते हैं और भगवान गणेश से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
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Ganesh Chaturthi: कनिपकम विनायक मंदिर
दक्षिण भारत में कुछ मंदिर ऐसे हैं जो अपनी मान्यताओं और विशेषताओं की वजह से बेहद प्रसिद्ध हैं। इनमें सबसे पहले आता है आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले का कनिपकम विनायक मंदिर।
यहां की गणेश प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है, यानी यह प्रतिमा किसी इंसान ने नहीं बनाई, बल्कि अपने आप प्रकट हुई है। मंदिर परिसर में एक विशेष कुआं भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका पानी पापों को धो देता है।
यहां झूठ बोलने पर रोक है और मंदिर में शपथ भी सच बोलकर ही ली जाती है। काले पत्थर से बनी यह प्रतिमा भक्तों के लिए आस्था का अद्भुत केंद्र है।
मदनंतेश्वर सिद्धिविनायक मंदिर
दूसरा प्रमुख मंदिर है केरल के कासरगोड का श्री मदनंतेश्वर सिद्धिविनायक मंदिर। इसकी मान्यता यह है कि भगवान गणेश यहां दीवार से प्रकट हुए थे।
इस मंदिर की खूबसूरती इसके तीन विशाल गुंबदों में झलकती है। खासकर गणेश चतुर्थी पर यहां विशेष पूजा और अनुष्ठान होते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
अरुल्मिगु मुंथी विनयगर मंदिर
तीसरा मंदिर है तमिलनाडु के कोयंबटूर का अरुल्मिगु मुंथी विनयगर मंदिर। यह मंदिर अपनी विशाल गणेश प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। लगभग 19 फीट ऊंची और करीब 190 टन वजनी यह मूर्ति काले पत्थर से बनाई गई है।
प्रतिदिन इस प्रतिमा का श्रृंगार अलग-अलग तरीकों से किया जाता है, जिससे भक्त हर दिन एक नया रूप देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
ये तीनों मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से खास हैं, बल्कि वास्तुकला और मान्यताओं के कारण भी अनोखी पहचान रखते हैं।
गणेश चतुर्थी पर यहाँ उमड़ने वाली भीड़ और भक्तों की आस्था इस बात का प्रमाण है कि भगवान गणेश दक्षिण भारत की संस्कृति और परंपरा में कितने गहराई से जुड़े हुए हैं।