Monday, March 23, 2026

एलपीजी एटीएम: गुरुग्राम में शुरू हुआ देश का पहला एलपीजी एटीएम

एलपीजी एटीएम

मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, इसलिए सप्लाई चेन में रुकावट, शिपमेंट में देरी और पैनिक बुकिंग के कारण गैस सिलेंडरों की मांग तेजी से बढ़ गई है।

इसी बढ़ती परेशानी के बीच गुरुग्राम में देश का पहला एलपीजी एटीएम शुरू किया गया है। यह स्मार्ट वेंडिंग मशीन एटीएम की तरह काम करती है और लोगों को सिर्फ 2 से 3 मिनट में भरा हुआ गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का दावा करती है।

बीपीसीएल ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाई मशीन

यह एलपीजी एटीएम गुरुग्राम के सोहना इलाके के सेक्टर 33 स्थित सेंट्रल पार्क फ्लावर वैली में लगाया गया है। भारत पेट्रोलियम यानी बीपीसीएल ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में स्थापित किया है, ताकि घरेलू गैस वितरण को तेज, सरल और ज्यादा भरोसेमंद बनाया जा सके।

भारतगैस इंस्टा एलपीजी नाम से इस स्मार्ट मशीन की आधिकारिक लॉन्चिंग करीब दो महीने पहले की गई थी, लेकिन अब इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए खोल दिया गया है। यह सुविधा चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है, इसलिए डिलीवरी का इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती।

यह मशीन बिना फोन कॉल, बुकिंग स्लॉट और डिलीवरी विंडो के झंझट के सिलेंडर देने की सुविधा देती है। उपभोक्ता को सिर्फ एक आसान डिजिटल प्रक्रिया पूरी करनी होती है, जिसके बाद वह खुद मशीन से भरा हुआ सिलेंडर लेकर तुरंत घर जा सकता है।

मशीन से सिलेंडर लेने की पूरी प्रक्रिया

सिलेंडर लेने के लिए उपभोक्ता को सबसे पहले मशीन की स्क्रीन पर अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर दर्ज करना होता है। इसके बाद मोबाइल पर आया ओटीपी डालकर पहचान सत्यापित करनी पड़ती है, ताकि सिस्टम यह सुनिश्चित कर सके कि सिलेंडर अधिकृत ग्राहक को ही दिया जाए।

इसके बाद उपभोक्ता को अपने खाली सिलेंडर पर लगा क्यूआर कोड या बारकोड मशीन के स्कैनर के सामने दिखाना होता है। मशीन जांच करती है कि सिलेंडर वैध है या नहीं। सत्यापन सफल होते ही मशीन का एक विंडो अपने आप खुल जाता है।

खुली हुई स्लॉट में ग्राहक को अपना खाली सिलेंडर रखना होता है। मशीन उसकी शुद्धता, वैधता और वजन जैसी जरूरी जांच करती है, फिर सिलेंडर को अंदर खींच लेती है। इसके बाद स्क्रीन पर दिखाई गई कीमत का भुगतान यूपीआई के माध्यम से करना पड़ता है।

भुगतान सफल होने के तुरंत बाद मशीन के दूसरे हिस्से, यानी डिलीवरी विंडो से सीलबंद भरा हुआ सिलेंडर बाहर आ जाता है। पूरी प्रक्रिया सामान्यतः 2 से 3 मिनट में पूरी हो जाती है, जिससे गैस लेने का काम काफी तेज और सुविधाजनक बन जाता है।

मशीन की खास बातें और स्टॉक सिस्टम

इस एलपीजी एटीएम से 10 किलो वाले कंपोजिट सिलेंडर मिलते हैं, जो पारंपरिक लोहे के सिलेंडरों की तुलना में हल्के होते हैं और उठाने ले जाने में ज्यादा आसान माने जाते हैं। मशीन में एक बार में अधिकतम 10 सिलेंडर ही लोड किए जा सकते हैं।

मशीन में जैसे ही स्टॉक घटकर केवल 2 सिलेंडर रह जाता है, सिस्टम अपने नजदीकी गैस एजेंसी को अपने आप रिफिल के लिए अलर्ट भेज देता है। इसका मकसद यह है कि मशीन लंबे समय तक खाली न रहे और आपूर्ति लगातार बनी रहे।

लोहे के सिलेंडर से कंपोजिट सिलेंडर में बदलाव कैसे होगा

जो ग्राहक अभी 14.2 किलो वाले लोहे के सिलेंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें पहले अपने गैस कागजात, जैसे पासबुक आदि लेकर भारत गैस एजेंसी जाना होगा। वहां पुराना सिलेंडर जमा कर 10 किलो वाले कंपोजिट सिलेंडर में बदलने का अनुरोध करना पड़ेगा।

इस बदलाव के लिए पुराने सिलेंडर की सिक्योरिटी डिपॉजिट करीब 1450 रुपये और नए कंपोजिट सिलेंडर की सिक्योरिटी लगभग 3350 रुपये के बीच का अंतर जमा करना होगा। यानी ग्राहक को करीब 1990 रुपये अतिरिक्त देने होंगे, जिसके बाद नया हल्का सिलेंडर मिल जाएगा।

एजेंसी से कंपोजिट सिलेंडर मिलने के बाद उपभोक्ता भविष्य में कभी भी एलपीजी एटीएम पर जाकर इसे सिर्फ 2 मिनट के आसपास के समय में रिफिल करा सकता है। इससे बार बार बुकिंग और डिलीवरी का इंतजार खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है।

कीमत और उपभोक्ताओं पर असर

हालांकि कंपोजिट सिलेंडर सुविधा और वजन के लिहाज से बेहतर माना जा रहा है, लेकिन यह उपभोक्ता को कुछ महंगा पड़ सकता है। जहां 14.2 किलो वाले लोहे के सिलेंडर की कीमत लगभग 1450 रुपये बताई जा रही है, वहीं कंपोजिट सिलेंडर करीब 3350 रुपये का पड़ता है।

यानी तेज सुविधा, हल्का सिलेंडर और चौबीसों घंटे उपलब्धता जैसी विशेषताओं के साथ यह नई व्यवस्था घरेलू गैस वितरण में बदलाव का संकेत दे रही है, लेकिन इसकी लागत पारंपरिक विकल्प से अधिक होने के कारण उपभोक्ताओं को फैसला सोच समझकर लेना होगा।

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Samudra
Samudra
लेखक भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्येता हैं। वे पिछले एक दशक से सार्वजनिक विमर्श पर लेखन कर रहे हैं। समाज, राजनीति, विचारधारा, शिक्षा, धर्म और इतिहास पर रिसर्च बेस्ड विश्लेषण में वे पारंगत हैं। वे 'द पैम्फलेट' में दो वर्ष कार्य कर चुके हैं। उनके शोधपरक लेख अनेक मौकों पर राष्ट्रीय विमर्श की दिशा में परिवर्तनकारी सिद्ध हुए हैं।
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