कनाडा
द पीपल्स वॉइस की एक रिपोर्ट में यह मुद्दा उठाया गया कि कनाडा में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग, एमएआइडी यानि इच्छामृत्यु, के दायरे को नवजात शिशुओं तक ले जाने की मांग आगे बढ़ रही है।
इसमें गरीबी और गंभीर रोग स्थितियों से जुड़े संदर्भ शामिल किए गए। यदि ऐसा होता है तो कनाडा में गरीब वर्ग अपने 1 साल तक के गंभीर बीमारी से ग्रस्त बच्चों को मेडिकली इच्छामृत्यु दे सकेगा, जिस पर मानवाधिकार की बहस उठ खड़ी हुई है।
क्यूबेक कॉलेज ऑफ फिजिशियंस का तर्क
क्यूबेक कॉलेज ऑफ फिजिशियंस के भीतर एमएआइडी को ऐसे शिशुओं के लिए एक हस्तक्षेप की तरह देखने का विचार रखा गया, जो अत्यधिक पीड़ा झेल रहे हों।
इस दृष्टि में माता पिता को अपने बच्चे की ओर से विकल्प चुनने का अधिकार देने की बात रखी गई।
2022 की संसदीय समिति में उठी बात
2022 में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग पर विशेष संयुक्त समिति के सामने क्यूबेक कॉलेज ऑफ फिजिशियंस के सदस्य लुई रॉय ने जन्म से एक वर्ष तक के बच्चों के लिए यूथेनेशिया की अनुमति का दायरा सुझाया। गंभीर विकृतियों और अक्षमताओं वाले शिशुओं के लिए इच्छामृत्यु मांगी गई।
मंत्री कार्ला क्वाल्ट्रूघ की आपत्ति
उसी समय तत्कालीन लिबरल डिसएबिलिटीज मंत्री कार्ला क्वाल्ट्रूघ ने इस दिशा को अस्वीकार्य बताया था।
बयान में उन्होंने यह संकेत दिया था कि ऐसी स्थिति को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं है। इस प्रतिक्रिया को रिपोर्ट में सरकारी स्तर की स्पष्ट आपत्ति के रूप में रखा।
हेल्थ कनाडा फंडिंग और युवाओं के विचार
हेल्थ कनाडा द्वारा फंड किए गए एक विश्वविद्यालय शोध प्रोजेक्ट का उल्लेख भी जोड़ा, जिसमें यूथेनेशिया पर युवाओं के विचारों का अध्ययन था।
इसी चर्चा में गंभीर ऑटिज्म वाले बच्चों की संभावित पात्रता जैसा प्रश्न भी शामिल था।
2016 से कानून और वर्तमान प्रतिबंध
2016 में जस्टिन ट्रूडो की लिबरल सरकार ने असिस्टेड सुसाइड को वैध किया। मौजूदा कानून में नाबालिगों और केवल मानसिक बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए इच्छामृत्यु निषिद्ध रखा गया। इसके बावजूद नीति विस्तार के लिए दबाव समूह लगातार बदलाव की कोशिशें करते रहे।
2021 का बिल सी सेवन और पात्रता का विस्तार
2021 में बिल सी सेवन के पारित होने के बाद एमएआइडी की पात्रता को टर्मिनल बीमारी तक सीमित रखने की शर्त बदली और क्रॉनिक बीमारियों को भी शामिल किया गया।
इसके बाद सरकार ने केवल मानसिक बीमारी वाले मामलों को जोड़ने की दिशा में भी कदम बढ़ाए।
2024 में टाल, 2027 में लागू करने की समयसीमा
फरवरी 2024 में प्रो लाइफ, चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य समूहों के विरोध तथा अधिकांश प्रांतों की असहमति के बाद फेडरल सरकार ने मानसिक बीमारी वाले विस्तार को 2027 तक टाल दिया। इसी समयसीमा के अनुसार यह विस्तार 2027 में कानून बनने की ओर बढ़ाया गया।
संसद में कंजर्वेटिव बिल और चर्च की भूमिका
कंजर्वेटिव सांसद गार्नेट जेनुइस ने बिल सी टू सिक्स जीरो पेश किया, जिसमें बिना मांगे यूथेनेशिया सुझाने जैसी coercion स्थिति पर रोक का प्रावधान रखा गया। कनाडा के कैथोलिक बिशप्स ने मानसिक बीमारी पर विस्तार रोकने वाले कंजर्वेटिव प्रयासों के समर्थन की बात कही।
बिल सी टू वन एटीन और मृत्यु आंकड़ों पर बहस
कंजर्वेटिव सांसद तमारा जैनसन का बिल सी टू वन एटीन 20 जून 2025 को पहली रीडिंग में आगे बढ़ा और इसमें मानसिक बीमारी के आधार पर एमएआइडी विस्तार रोकने का लक्ष्य रखा गया। इसी बहस में यूथेनेशिया को कनाडा में मृत्यु का छठा कारण बताया गया, जबकि 2019 से 2022 की टॉप टेन सूची में यह दर्ज नहीं था।

