Friday, February 27, 2026

Donald Trump: भारत सहित कई देशों पर लागू होगा रेसिप्रोकल टैरिफ, भारत को क्या होगा नुकसान

Donald Trump: 2 अप्रैल 2025, वह तारीख है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रेसिप्रोकल टैरिफ कई देशों की धड़कनें बढ़ाने वाला है। जिसमें भारत का नाम भी शामिल है। ट्रंप पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि वह अप्रैल से भारत सहित कई देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करेंगे। उन्होंने इस दिन को “लिबरेशन डे” के तौर पर मनाने की बात भी कही है। उनका मानना है कि इस कदम से अमेरिकी व्यापार का घाटा कम होगा, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या इससे अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी?

Donald Trump: क्या है रेसिप्रोकल टैरिफ

रेसिप्रोकल टैरिफ का मतलब है “जैसे को तैसा“, यानी जो देश अमेरिकी आयात पर जितना टैरिफ लगाता है, अमेरिका भी उसके आयात पर उतना ही टैरिफ लगाएगा। ट्रंप का लक्ष्य इस नीति के जरिए अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करना है। व्यापार घाटा वह स्थिति है जब कोई देश दूसरे देश से ज्यादा आयात करता है, लेकिन निर्यात कम करता है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए विदेशी सामानों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई का खतरा पैदा हो सकता है। ट्रंप पहले ही अमेरिका में आयात होने वाली कारों और ऑटो पार्ट्स पर 25 फीसदी टैरिफ लगा चुके हैं। इससे विदेशी कारों की कीमतें बढ़ने की संभावना है। अब रेसिप्रोकल टैरिफ के जरिए वे उन देशों को निशाना बना रहे हैं जो अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ लगाते हैं।

दवाओं पर लगाएगा टैरिफ

यह टैरिफ भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, खासकर दवा उद्योग के लिए। भारत अमेरिका को 12 अरब डॉलर से ज्यादा की दवाएं और फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स निर्यात करता है। अभी अमेरिका में फार्मा प्रोडक्ट्स पर 1.06 फीसदी टैरिफ लगता है, जबकि भारत में यह दर 9.68 फीसदी है।

रेसिप्रोकल टैरिफ लागू होने के बाद अमेरिका भारत से आने वाली सस्ती दवाओं पर भी ऊंचा टैरिफ लगा सकता है। इससे अमेरिकी बाजार में दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जो दोनों देशों के व्यापार संबंधों को प्रभावित करेगा।

व्यापारिक घाटा कम

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार घाटा भी इस नीति का एक बड़ा कारण है। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, भारत से अमेरिका को 73.7 अरब डॉलर का निर्यात होता है, जबकि अमेरिका से 39.1 अरब डॉलर का आयात होता है। लेकिन अमेरिकी सरकार के आंकड़े कुछ अलग कहानी बताते हैं।

उनके अनुसार भारत से 91.2 अरब डॉलर का निर्यात और अमेरिका से 34.3 अरब डॉलर का आयात होता है। दोनों देशों के बीच करीब 45 अरब डॉलर का व्यापारिक घाटा है, जिसे ट्रंप कम करना चाहते हैं।

अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ

रेसिप्रोकल टैरिफ से वे देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जो अमेरिकी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाते हैं। अमेरिका अब इन देशों से आयात होने वाले सामानों पर समान शुल्क लगाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार संतुलन बिगड़ सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन भी बाधित हो सकती है, जिसका असर विभिन्न उद्योगों में उत्पादन और वितरण पर पड़ेगा। ऑटोमोबाइल से लेकर फार्मास्युटिकल तक के कई सेक्टर इस नीति से प्रभावित हो सकते हैं।

अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत

ट्रंप का दावा है कि टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और व्यापार में घाटा कम होगा। लेकिन आलोचकों का मानना है कि इससे न केवल अमेरिका में महंगाई बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक व्यापार में तनाव भी पैदा होगा। पहले से ही कारों और ऑटो पार्ट्स पर लगे 25 फीसदी टैरिफ ने विदेशी वाहनों की कीमतें बढ़ा दी हैं। अब रेसिप्रोकल टैरिफ लागू होने से यह प्रभाव और व्यापक हो सकता है।

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Madhuri
Madhurihttps://reportbharathindi.com/
पत्रकारिता में 6 वर्षों का अनुभव है। पिछले 3 वर्षों से Report Bharat से जुड़ी हुई हैं। इससे पहले Raftaar Media में कंटेंट राइटर और वॉइस ओवर आर्टिस्ट के रूप में कार्य किया। Daily Hunt के साथ रिपोर्टर रहीं और ETV Bharat में एक वर्ष तक कंटेंट एडिटर के तौर पर काम किया। लाइफस्टाइल, इंटरनेशनल और एंटरटेनमेंट न्यूज पर मजबूत पकड़ है।
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