Wednesday, March 11, 2026

देव दीपावली 2025: जब काशी की गंगा रोशनी में नहा उठती है,जानते है क्यों मनाई जाती है देव दीवाली

देव दीपावली 2025: हमारे भारत वर्ष में हर त्यौहार और हर दिन अपने आप में एक विशेष महत्व रखता है। वाराणसी में तो हर घाट, हर गली, हर मंदिर दीपों की सुनहरी रौशनी से ऐसे चमक जाता है कि मानो रोशनी में हर नदी नहा रही हो। हवा में मंत्रों की मधुर ध्वनि और गंगा की लहरों पर तैरते हजारों दीये — यह दृश्य किसी सपने जैसा लगता है।

देव दीपावली 2025: देव दीवाली क्यों कहा जाता है ?

देव दीपावली 2025: कहा जाता है कि देव दीपावली के दिन देवता स्वयं धरती पर उतरकर भगवान शिव की त्रिपुरासुर पर विजय का उत्सव मनाते हैं।
इस दिन को “देवों की दिवाली” भी कहा जाता है। दीपावली के पंद्रह दिन बाद आने वाला यह पर्व काशी में बड़े ही श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाता है।

जाने क्या किया जाता है इस दिन विशेष

सुबह गंगा स्नान, फिर मंदिरों में पूजा और शाम को घाटों पर दीपदान — हर कदम भक्ति से भरा होता है।
जब अस्सी घाट से लेकर दशाश्वमेध घाट तक लाखों दीये एक साथ जलते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे गंगा खुद रोशनी की चादर ओढ़ लेती है।

इस दिन का संदेश बहुत गहरा है

देव दीपावली 2025: जैसे एक छोटा दीप भी अंधकार को मिटा देता है, वैसे ही इंसान का एक अच्छा कर्म उसके अंदर की नकारात्मकता को दूर कर सकता है। देव दीपावली हमें यही सिखाती है
कि असली रोशनी हमारे भीतर है, बाहर नहीं।

आज यह पर्व सिर्फ़ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीक भी बन गया है। लोग इसे स्वच्छता, सद्भाव और एकता के रूप में भी मनाते हैं।
काशी की यह देव दीपावली न केवल आँखों को चकाचौंध करती है, बल्कि दिल को यह याद दिलाती है — “जहाँ दीप जलता है, वहीं आशा है, वहीं जीवन है।”

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Karnika Pandey
Karnika Pandeyhttps://reportbharathindi.com/
“This is Karnika Pandey, a Senior Journalist with over 3 years of experience in the media industry. She covers politics, lifestyle, entertainment, and compelling life stories with clarity and depth. Known for sharp analysis and impactful storytelling, she brings credibility, balance, and a strong editorial voice to every piece she writes.”
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