अमेरिका में जन्मदर गिरावट
अमेरिका में पिछले साल जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या वर्ष 2007 की तुलना में करीब सात लाख दस हजार कम रही। यह आंकड़ा सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन द्वारा जारी प्रारंभिक आंकड़ों से सामने आया है। देश की कुल आबादी बढ़ने के बावजूद नवजात शिशुओं की संख्या में यह गिरावट चिंताजनक मानी जा रही है।
वर्ष 2007 में अमेरिका में कुल 43 लाख 16 हजार 233 शिशु पैदा हुए थे जो अब तक का सर्वोच्च आंकड़ा था। पिछले साल यानी 2025 में यह संख्या घटकर महज 36 लाख 6 हजार 400 रह गई। सीडीसी के नेशनल सेंटर फॉर हेल्थ स्टैटिस्टिक्स के डेमोग्राफर ब्रैडी हैमिल्टन के अनुसार 2024 से 2025 के बीच सामान्य प्रजनन दर में एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
2007 से अब तक 23 प्रतिशत की गिरावट
हैमिल्टन के मुताबिक वर्ष 2007 से लेकर अब तक अमेरिका की सामान्य प्रजनन दर में कुल 23 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। यह गिरावट किसी एक साल की नहीं बल्कि लंबे समय से चली आ रही एक निरंतर प्रवृत्ति का हिस्सा है। विशेषज्ञों के बीच इस बदलाव की वजहों पर कोई एकमत राय नहीं बन पाई है।
कुछ विशेषज्ञ इस बदलाव के पीछे आर्थिक कारण बताते हैं तो कुछ सांस्कृतिक प्रभाव को जिम्मेदार मानते हैं। महिलाओं की शिक्षा में बढ़ोतरी और गर्भनिरोधक साधनों तक बेहतर पहुंच को भी इस बदलाव की प्रमुख वजहों में गिना जाता है। हैमिल्टन ने स्पष्ट किया कि यह अध्ययन परिवार शुरू करने से जुड़े व्यक्तिगत निर्णयों के कारणों की जानकारी नहीं देता।
श्रम बल और जनसंख्या पर गहरा असर
देश में घटती जन्मदर और साथ में ट्रंप प्रशासन के दौर में तेजी से कम हुई आप्रवासन दर को मिलाकर देखें तो जनसंख्या विशेषज्ञ और अर्थशास्त्री इसे श्रम बल के लिए एक गंभीर संकट बता रहे हैं। छोटे परिवारों की ओर बढ़ता यह रुझान अमेरिका की दीर्घकालिक आर्थिक संरचना पर असर डाल सकता है।
कांग्रेशनल बजट ऑफिस की इस साल की शुरुआत में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार इन दोनों प्रवृत्तियों के मिले जुले असर से देश की आबादी तेजी से बुजुर्ग होती जाएगी। अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2055 तक अमेरिका में पहले की भविष्यवाणियों की तुलना में करीब 80 लाख कम लोग होंगे।
सीबीओ के आकलन के मुताबिक 24 साल और उससे कम उम्र की आबादी अगले 30 साल तक हर साल घटती रहेगी। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि आने वाले दशकों में काम करने वाली पीढ़ी का अनुपात तेजी से सिकुड़ सकता है। यह स्थिति सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी भारी दबाव डाल सकती है।
वैश्विक स्तर पर भी प्रजनन दर में तेज गिरावट
अमेरिका में आई यह गिरावट वैश्विक स्तर पर हो रहे एक बड़े बदलाव का हिस्सा है। पूर्वी एशिया, यूरोप और दक्षिण अमेरिका के कई देशों में कुल प्रजनन दर उस न्यूनतम स्तर से काफी नीचे जा चुकी है जिसे जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है।
इस स्तर को रिप्लेसमेंट लेवल कहा जाता है और इससे नीचे प्रजनन दर होने का अर्थ है कि बिना बड़े पैमाने पर आप्रवासन के आबादी को बनाए रखना संभव नहीं होगा। अमेरिका में भी कुल प्रजनन दर अब रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे आ चुकी है। यह स्थिति नीति निर्माताओं के सामने एक जटिल चुनौती खड़ी करती है।
मातृत्व में देरी की संभावना पर चर्चा
कुछ अर्थशास्त्री यह भी मानते हैं कि अमेरिका में जन्मदर में आई गिरावट जरूरी नहीं कि एक स्थायी बदलाव हो। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लॉस एंजेलेस में कैलिफोर्निया सेंटर फॉर पॉपुलेशन रिसर्च की प्रमुख अर्थशास्त्री मार्था बेली का मानना है कि हो सकता है अमेरिकी महिलाएं मातृत्व को बाद की उम्र के लिए टाल रही हों।
बेली के अनुसार युवा महिलाओं, किशोरियों और बीस की उम्र की महिलाओं में प्रजनन दर में बड़ी गिरावट देखी जा रही है लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वही महिलाएं आगे चलकर बच्चे पैदा करेंगी या नहीं। यह सवाल नीति निर्माताओं के लिए अहम है।
पिछले साल मार्च में सीडीसी द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में यह पाया गया कि 30 और 40 साल की उम्र की महिलाओं में प्रजनन दर बढ़ रही है। हालांकि यह बढ़ोतरी इतनी पर्याप्त नहीं है कि युवा महिलाओं में आई गिरावट की भरपाई हो सके। इस असंतुलन को लेकर जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं।
परिवार नियोजन पर नीतिगत बहस जरूरी
बेली का कहना है कि इस पर नीतिगत चर्चा जरूरी है जिसमें उन उपायों पर विचार हो जो दंपतियों के लिए बच्चे पैदा करना या परिवार बड़ा करना आसान बनाएं। उनके अनुसार लोग उतने ही बच्चे चाहते हैं जितने वे चाहते हैं और जिनका वे खर्च उठा सकते हैं।
हालांकि बेली इस बात पर भी जोर देती हैं कि कोई भी ऐसी नीति स्वीकार्य नहीं होगी जो परिवारों पर दबाव डाले कि वे ऐसे बच्चे पैदा करें जो वे नहीं चाहते। उनके अनुसार नीति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना इस बहस का केंद्रीय पहलू होना चाहिए।
किशोर जन्मदर में गिरावट एक सकारात्मक संकेत
इस पूरी तस्वीर में एक राहत की बात यह रही कि वर्ष 2025 में किशोर उम्र की लड़कियों में जन्मदर सात प्रतिशत घटी। जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानते हैं क्योंकि बच्चों और किशोरों में गर्भधारण की दर में कमी समाज के लिए एक सकारात्मक बदलाव है।
यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना स्कूल ऑफ मेडिसिन में बाल रोग विशेषज्ञ और एसोसिएट प्रोफेसर बियांका एलिसन के मुताबिक किशोर जन्मदर में आई यह गिरावट मुख्यतः किशोरों में गर्भनिरोधक के बढ़ते उपयोग, यौन सक्रियता में कमी और गर्भपात सेवाओं तक निरंतर पहुंच के कारण संभव हुई है।

