जानें कितना कच्चा तेल पहुंचा गुजरात: भारतीय ध्वज वाला कच्चा तेल टैंकर “जग लाड़की” बुधवार को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर सुरक्षित पहुँच गया।
यह बंदरगाह देश के प्रमुख व्यापारिक पोर्ट्स में गिना जाता है और इसका संचालन अडानी पोर्ट्स करता है।
टैंकर के पहुँचते ही बंदरगाह पर कामकाज तेज़ हो गया और तेल उतारने की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी गई। यह खेप भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम मानी जा रही है।
यूएई से लाया गया कच्चा तेल
अधिकारियों के मुताबिक, यह टैंकर लगभग 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत पहुँचा है। यह तेल संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख समुद्री केंद्र फुजेराह पोर्ट से लोड किया गया था।
फुजेराह पोर्ट खाड़ी क्षेत्र का एक बड़ा तेल निर्यात केंद्र है, जहाँ से कई देशों को कच्चा तेल भेजा जाता है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है।
देश में पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधनों की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए इस तरह के बड़े टैंकरों का आना बेहद जरूरी हो जाता है।
सुरक्षित तरीके से शुरू हुआ अनलोडिंग
टैंकर के बंदरगाह पर पहुँचते ही सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए तेल उतारने का काम शुरू कर दिया गया।
कच्चे तेल को पाइपलाइनों की मदद से बड़े भंडारण टैंकों तक पहुँचाया जा रहा है। इसके बाद तेल को रिफाइनरियों में भेजा जाएगा, जहाँ से पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन तैयार किए जाते हैं।
बंदरगाह प्रशासन के अनुसार, अनलोडिंग की पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में हो रही है।
तेल रिसाव जैसी किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है। पर्यावरण सुरक्षा का भी खास ध्यान रखा जा रहा है।
पहले भी आ चुके हैं बड़े गैस टैंकर
यह पहली बार नहीं है जब गुजरात के बंदरगाहों पर बड़े ऊर्जा टैंकर पहुँचे हों। इससे पहले “शिवालिक” टैंकर लगभग 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर मुंद्रा बंदरगाह पहुँच चुका है।
वहीं “नंदा देवी” टैंकर भी गुजरात के वाडिनार बंदरगाह पर 46,500 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर पहुँचा था।
इन टैंकरों के आने से देश में रसोई गैस की सप्लाई बेहतर हुई है और आम लोगों को राहत मिली है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है तेल आयात
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत तेजी से विकास कर रहा है, जिसके कारण ईंधन की खपत भी बढ़ रही है। परिवहन, उद्योग, बिजली उत्पादन और घरेलू जरूरतों के लिए पेट्रोलियम उत्पाद बेहद जरूरी हैं।
ऐसे में कच्चे तेल और गैस का नियमित आयात देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। बड़े बंदरगाह जैसे मुंद्रा और वाडिनार भारत की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं।
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