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कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस के भीतर विरोधाभास सामने आया है। राज्य सरकार के मंत्री सतीश जारकीहोली ने इस प्रक्रिया का खुलकर समर्थन करते हुए स्वीकार किया है कि कर्नाटक में मतदाता सूची का पुनरीक्षण सही तरीके से हुआ था।
कांग्रेस मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राहुल गांधी सहित पार्टी के कई नेता मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर सवाल उठाते रहे हैं। जारकीहोली ने करीब एक करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने को भी उचित ठहराया है।
एक करोड़ नाम हटाना सही, कांग्रेस मंत्री ने बताई वजह
कर्नाटक में मतदाता सूची से लगभग एक करोड़ नाम हटाए जाने के सवाल पर सतीश जारकीहोली ने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई के पीछे ठोस कारण थे। सूची से ऐसे लोगों के नाम हटाए गए, जो मतदान के पात्र नहीं रह गए थे।
उन्होंने बताया कि हटाए गए नामों में ऐसे मतदाता शामिल थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। इसके अतिरिक्त कई लोग अपना निवास स्थान बदलकर दूसरी जगह जा चुके थे, जबकि कुछ मतदाताओं के नाम एक से अधिक बार दर्ज पाए गए थे।
जारकीहोली ने कहा कि मृत व्यक्तियों, स्थानांतरित मतदाताओं और एक से अधिक बार दर्ज नामों को हटाना मतदाता सूची की शुद्धता के लिए आवश्यक है। उनके अनुसार कर्नाटक में इसी उद्देश्य से जांच की गई और पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुई।
बिहार, बंगाल और महाराष्ट्र में SIR के विरोध पर दी सफाई
कांग्रेस मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति विशेष गहन पुनरीक्षण की व्यवस्था से नहीं थी। उन्होंने कर्नाटक में इस प्रक्रिया का कभी विरोध नहीं किया। उनकी आपत्ति बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इसके क्रियान्वयन के तरीके को लेकर थी।
जारकीहोली के अनुसार कर्नाटक में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान उठाई गई आपत्तियों और संबंधित लोगों को दिए गए प्रशिक्षण का सकारात्मक प्रभाव पड़ा। इससे गलतियों को दूर करने में मदद मिली और मतदाता सूची की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरी हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस प्रकार कर्नाटक में मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया, वैसी ही व्यवस्था अन्य राज्यों में लागू की जानी चाहिए थी। उनके बयान से स्पष्ट है कि कांग्रेस मंत्री SIR की आवश्यकता और उसके उचित क्रियान्वयन के पक्ष में हैं।
भाजपा ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, कांग्रेस के भीतर उठे सवाल
कांग्रेस मंत्री के इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस के नेता स्वयं SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी के विरोध की वास्तविकता सामने ला रहे हैं।
प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर भी ऐसे नेता मौजूद हैं, जो मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की आवश्यकता समझते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध है और कांग्रेस के नेता इसे स्वीकार करने लगे हैं।
कर्नाटक सरकार के मंत्री द्वारा करीब एक करोड़ नाम हटाए जाने का समर्थन किए जाने से राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा इस बयान को राहुल गांधी के रुख के विरुद्ध इस्तेमाल कर रही है, जबकि जारकीहोली ने दोनों स्थितियों में अंतर स्पष्ट किया है।
कर्नाटक में वोटर आईडी विवाद के बीच आया बड़ा बयान
कर्नाटक में मतदाता सूची को लेकर पहले से राजनीतिक विवाद चल रहा है। भाजपा ने हाल ही में आरोप लगाया था कि राज्य में 59 लाख मतदाताओं के मुकाबले करीब 90 लाख मतदाता पहचान पत्र छापे गए। पार्टी ने 20 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है।
इस मामले में भाजपा ने सीबीआई जांच की मांग भी उठाई है। ऐसे राजनीतिक माहौल में कांग्रेस मंत्री द्वारा मतदाता सूची से करीब एक करोड़ नाम हटाने को सही ठहराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे SIR की प्रक्रिया पर चल रही बहस को नया आधार मिला है।
दिल्ली में 47.5 लाख नाम हटाने पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल
मतदाता सूची से नाम हटाने का विवाद कर्नाटक तक सीमित नहीं है। दिल्ली में SIR के दौरान करीब 47.5 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मामला भी सामने आया है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित आंकड़ों और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मतदाता सूची से हटाए गए मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के आंकड़ों पर स्पष्ट जानकारी मांगी है। इस घटनाक्रम ने बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के आधार और उनकी जांच की पारदर्शिता को लेकर सवाल पैदा किए हैं।
कर्नाटक के मंत्री सतीश जारकीहोली का बयान इसी व्यापक विवाद के बीच सामने आया है। उन्होंने एक तरफ अपने राज्य में एक करोड़ नाम हटाने का समर्थन किया है, तो दूसरी तरफ अन्य राज्यों में पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर अपनी आपत्तियां बरकरार रखी हैं।

