बृज भूषण शरण सिंह बायोग्राफी: एक पहलवान जो सिर्फ़ अखाड़े तक सीमित नहीं रहा, वह सत्ता की गलियों तक कैसे पहुंचा?
राम जन्मभूमि आंदोलन में उसकी भूमिका क्या थी और उसने उस दौर की राजनीति में कैसे अपना नाम बनाया।
जिस नेता को बार-बार घेरने की कोशिश की गई, जिस पर आरोप लगे, विरोध हुए, आंदोलन खड़े हुए, वह हर बार बाहुबली की तरह खड़ा रह।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुछ नाम ऐसे हैं जिन्हें लोग पसंद करें या न करें, लेकिन नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते।
आज हम बात कर रहे हैं बृज भूषण शरण सिंह की। एक ऐसे नाम की, जो दशकों से सवालों, सत्ता और संघर्षों के बीच चर्चा में बना हुआ है।
व्यक्तिगत जानकारी
| पूरा नाम | बृज भूषण शरण सिंह |
| जन्म तिथि | 8 जनवरी 1957 |
| जन्म स्थान | बिश्नोहरपुर, गोंडा, उत्तर प्रदेश |
| पिता का नाम | स्व. श्री जगदंबा शरण सिंह |
| माता का नाम | स्व. श्रीमती प्यारी देवी सिंह |
| धर्म | हिंदू |
| जाति | राजपूत (ठाकुर/क्षत्रिय) |
| पत्नी | केतकी देवी सिंह (पूर्व सांसद व जिला पंचायत अध्यक्ष) |
| संतान | पुत्र- करण भूषण सिंह सांसद, कैसरगंज, पुत्र- प्रतीक भूषण सिंह, विधायक, गोंडा सदर, पुत्र- शक्ति सिंह (दिवंगत), एक पुत्री |
| शिक्षा | एम.ए., एलएल.बी. (डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय) |
| राजनीतिक दल | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) |
| मुख्य पद | 6 बार सांसद; भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष |
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
बृज भूषण शरण सिंह बायोग्राफी: बृज भूषण शरण सिंह का जन्म 8 जनवरी 1957 को उत्तर प्रदेश के गोंडा ज़िले में एक राजपूत परिवार में हुआ।
उन्होंने कानून की पढ़ाई की और वर्ष 1985 में अवध विश्वविद्यालय, फ़ैज़ाबाद से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की।
उनकी राजनीति में रुचि छात्र जीवन से ही शुरू हो गई थी। राजनीति में आने से पहले वे खुद भी कुश्ती से जुड़े रहे, जिससे इस खेल के प्रति उनका लगाव गहरा होता गया।
1980 के दशक का उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल उनके शुरुआती राजनीतिक सफ़र की नींव बना।
बृज भूषण शरण सिंह का राजनीतिक करियर
बृज भूषण शरण सिंह का सक्रिय राजनीतिक सफ़र 1990 के दशक की शुरुआत में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान शुरू हुआ।
वर्ष 1991 में उन्होंने पहली बार गोंडा से भाजपा प्रत्याशी के रूप में लोकसभा चुनाव जीता।
इसके बाद उन्होंने लगभग तीन दशकों तक संसद में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। वे गोंडा, बलरामपुर और कैसरगंज जैसे क्षेत्रों से सांसद रहे।
उन्होंने पाँच बार भाजपा और एक बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर यह दिखाया कि उनकी राजनीतिक पकड़ सिर्फ पार्टी पर निर्भर नहीं थी।
राजनीतिक
1980 के दशक के अंत में – छात्र राजनीति और स्थानीय आंदोलनों से सार्वजनिक जीवन में प्रवेश
1991 – गोंडा से 10वीं लोकसभा के लिए भाजपा सांसद चुने गए
1992 – राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय भूमिका
1996 – टाडा के तहत हिरासत में होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सके; पत्नी केतकी देवी सिंह ने गोंडा सीट जीती
1999 – गोंडा से दोबारा लोकसभा सांसद बने
2004 – बलरामपुर से सांसद चुने गए
2008 – क्रॉस वोटिंग के आरोप में भाजपा से निष्कासित
2009 – समाजवादी पार्टी में शामिल होकर कैसरगंज से चुनाव जीता
2012 – भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बने
2014 – भाजपा में वापसी; कैसरगंज से सांसद
2019 – कैसरगंज से फिर सांसद चुने गए
2023 – पहलवानों के विरोध और कानूनी मामलों के बाद WFI अध्यक्ष पद छोड़ा
2024 – भाजपा ने टिकट नहीं दिया; बेटे करण भूषण सिंह ने चुनाव जीता
2025 – नाबालिग पहलवान से जुड़ा POCSO मामला वापस होने पर बंद
2026 – क्षेत्रीय राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय
पार्टी बदलने का सफ़र
बृज भूषण शरण सिंह उन चुनिंदा नेताओं में हैं जिन्होंने भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों के टिकट पर चुनाव जीता।
2009 में भाजपा से मतभेद के बाद उन्होंने सपा जॉइन की और चुनाव जीत लिया। इससे यह साफ़ हुआ कि उनकी लोकप्रियता व्यक्ति के रूप में थी,
न कि सिर्फ पार्टी की वजह से। बाद में वे फिर भाजपा में लौट आए।
राजनीति में परिवार की भूमिका
सिंह परिवार की राजनीति में गहरी पकड़ रही है। उनकी पत्नी केतकी देवी सिंह खुद सांसद रह चुकी हैं।
1996 में जब बृज भूषण शरण सिंह टिहाड़ जेल में थे और चुनाव नहीं लड़ सके, तब उनकी पत्नी ने गोंडा सीट से जीत दर्ज की।
उनके बेटे करण भूषण सिंह वर्तमान में कैसरगंज से सांसद हैं और उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के अध्यक्ष भी हैं।
दूसरे बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर से दो बार विधायक रह चुके हैं।
भारतीय कुश्ती महासंघ में भूमिका
वर्ष 2012 से 2023 तक, बृज भूषण शरण सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे। इस दौरान कुश्ती को ज़्यादा पहचान और फंडिंग मिली।
कई लोग मानते हैं कि उनके समय में कुश्ती को देशभर में लोकप्रियता मिली।
हालाँकि 2023 में उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ दिया, लेकिन 2026 तक भी वे कुश्ती से जुड़े आयोजनों में दिखाई देते रहे।
शैक्षणिक संस्थान और संपत्ति
बृज भूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल में 50 से अधिक शैक्षणिक संस्थान संचालित करते हैं। ये संस्थान शिक्षा के साथ-साथ रोज़गार और खेल गतिविधियों का भी केंद्र हैं।
2019 के चुनावी हलफ़नामे के अनुसार, उनकी घोषित संपत्ति लगभग ₹10–11 करोड़ थी। रिपोर्ट्स में हेलिकॉप्टर और बड़ी संपत्तियों का भी ज़िक्र मिलता है।
चुनावी शैली और सार्वजनिक छवि
वे चुनावों के दौरान हेलिकॉप्टर से प्रचार के लिए जाने जाते रहे हैं। इससे उनकी छवि एक ताक़तवर क्षेत्रीय नेता की बनी। कई बार समर्थक उनके हेलिकॉप्टर आने का इंतज़ार घंटों तक करते थे।
विवाद और कानूनी मामले
1990 के दशक में उन पर टाडा के तहत आरोप लगे और वे कुछ समय तक टिहाड़ जेल में रहे। बाद में वे इन मामलों में बरी हो गए।
बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में भी उन पर आरोप लगे थे, लेकिन 2020 में विशेष अदालत ने उन्हें साज़िश के आरोप से मुक्त कर दिया।
रिकॉर्ड्स के अनुसार, उनके ख़िलाफ़ करीब 38–40 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं।
पुराने बयानों पर विवाद
2022 में एक इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि युवावस्था में उन्होंने अपने दोस्त की हत्या का बदला लेने के लिए एक व्यक्ति को मार दिया था। यह बयान काफ़ी चर्चा में रहा।
यौन उत्पीड़न के आरोप
2023 में कई महिला पहलवानों ने उन पर यौन शोषण के आरोप लगाए, जिनमें विनेश फोगाट और साक्षी मलिक जैसी नामी खिलाड़ी शामिल थीं। इस मुद्दे पर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए।
मई 2024 में दिल्ली की अदालत ने पाँच महिला पहलवानों से जुड़े मामले में आरोप तय किए। जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार किया।
अगली सुनवाई 21 अप्रैल 2026 तय है।
नाबालिग पहलवान से जुड़ा एक अलग POCSO मामला 2025 में शिकायत वापस लेने के बाद बंद हो गया।
हाल की गतिविधियां
2024 के बाद सांसद न होने के बावजूद, बृज भूषण शरण सिंह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं।
जनवरी 2026 में उन्होंने UGC की नई नीतियों का विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का समर्थन किया।
वे आज भी उत्तर प्रदेश में सामाजिक, राजनीतिक और खेल आयोजनों में दिखाई देते हैं और क्षेत्रीय राजनीति में उनकी मौजूदगी बनी हुई है।

