Thursday, February 5, 2026

Border 2 Review: Border की विरासत पर कलंक

Review Border 2: कुछ फ़िल्में सिर्फ़ देखी नहीं जातीं, वे ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती हैं। जेपी दत्ता की बॉर्डर (1997) ऐसी ही फ़िल्म थी।

डर, दोस्ती, बलिदान और ख़ामोशी को इस तरह दिखाती थी कि दर्शक पर्दे के भीतर जीने लगता था। करीब तीन दशक बाद आई बॉर्डर 2 उसी याद को दोबारा छूने की कोशिश करती है, लेकिन उसी विरासत के बोझ तले दबती हुई नज़र आती है।

बॉर्डर 2 बड़े पैमाने पर बनी है, लेकिन फिर भी वह उस एहसास को पैदा नहीं कर पाती, जिसने बॉर्डर को इतिहास बना दिया था।

दिल तक पहुंचने में नाकामियाब Border 2

Review Border 2: बॉर्डर 2 में नीयत की कमी नहीं है। फ़िल्म महत्वाकांक्षी है और गंभीर भी, लेकिन सिनेमा सिर्फ़ कोशिशों से नहीं चलता, उसे दर्शक के दिल तक पहुँचना होता है। बॉर्डर युद्ध की रणनीति नहीं, बल्कि सैनिकों की भावनाएँ दिखाती थी, खाइयों में बैठा डर, बिना शब्दों की दोस्ती और वह क़ुर्बानी जो आख़िरी सीन के बाद भी याद रहती थी।

इसके उलट, बॉर्डर 2 1971 के भारत-पाक युद्ध की चार बड़ी सैन्य घटनाओं को एक ही फ़िल्म में समेटने की कोशिश करती है। ऑपरेशन चंगेज़ ख़ान से लेकर INS खुखरी तक, हर घटना ऐतिहासिक रूप से अहम है, लेकिन फ़िल्म उन्हें इतनी तेज़ी से पार करती है कि भावनाएँ गहराई पकड़ ही नहीं पातीं। नतीजा यह होता है कि दर्शक प्रभावित तो होता है, लेकिन जुड़ नहीं पाता।

बॉर्डर बनाम बॉर्डर 2, जब पैमाना कहानी से बड़ा हो जाए

Review Border 2: बॉर्डर की सबसे बड़ी ताक़त उसका सामूहिक स्वर था। हर सैनिक कहानी का हिस्सा लगता था, हर चेहरा याद रह जाता था।

युद्धभूमि व्यक्तिगत महसूस होती थी। बॉर्डर 2 में वह एहसास टूट जाता है। सनी देओल अब भी फ़िल्म की सबसे मज़बूत कड़ी हैं।

68 साल की उम्र में भी उनकी मौजूदगी दमदार है और कई बार वह अकेले ही पूरी फ़िल्म को संभालते दिखते हैं।

दिलजीत दोसांझ संयम और गंभीरता के साथ अपना किरदार निभाते हैं, लेकिन वरुण धवन और अहान शेट्टी के किरदार ठीक होने के बावजूद यादगार नहीं बन पाते।]

जहाँ बॉर्डर एक साथ लड़ती हुई पलटन लगती थी, वहीं बॉर्डर 2 कई अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई फ़िल्म महसूस होती है।

पुरानी यादों के सहारे खड़ी फ़िल्म

Review Border 2: अगर बॉर्डर 2 सबसे ज़्यादा कहीं कमज़ोर पड़ती है, तो वह उसका नया संगीत है।

कोई भी नया गीत दर्शकों के ज़ेहन में जगह नहीं बना पाता। भावनात्मक असर लगभग पूरी तरह बॉर्डर के पुराने गीतों पर टिका रहता है, जो पहले से ही लोगों की यादों में बसे हुए हैं।

संवादों में भी वही समस्या दिखती है। पुराने संवादों की गूँज सुनाई देती है, जो भावनाएँ जगाने की कोशिश तो करती है, लेकिन साथ ही यह भी साबित कर देती है कि फ़िल्म अपनी अलग आवाज़ नहीं खोज पाई।

ठहराव की कमी

Review Border 2: निर्देशन के स्तर पर बॉर्डर 2 गहराई की जगह भव्यता को चुनती है। युद्ध दृश्य बड़े हैं, तकनीक आधुनिक है और प्रस्तुति चमकदार है। इसके बावजूद तीन घंटे से ज़्यादा की फ़िल्म में युद्ध के दृश्य जल्दी निपटते हुए लगते हैं।

जहाँ बॉर्डर दर्शक को युद्ध के भीतर रहने देती थी, वहीं बॉर्डर 2 उसे दूर से दिखाकर आगे बढ़ जाती है। फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों और लेफ्टिनेंट कमांडर एम.एस. रावत जैसे किरदारों की कहानियाँ और समय माँगती थीं, लेकिन फ़िल्म उन्हें वह स्पेस नहीं देती।

अगर यह फ़िल्म बॉर्डर नाम के बिना रिलीज़ होती, तो शायद इसे ज़्यादा नरमी से देखा जाता। लेकिन जब कोई फ़िल्म विरासत का दावा करती है, तो उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं।

लेकिन जिन लोगों ने बॉर्डर को महसूस किया था, जिनके लिए उसके गीत और ख़ामोशियाँ यादें बन चुकी हैं, उनके लिए यह फ़िल्म एक सच्चाई याद दिलाती है।

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now
Muskaan Gupta
Muskaan Guptahttps://reportbharathindi.com/
मुस्कान डिजिटल जर्नलिस्ट / कंटेंट क्रिएटर मुस्कान एक डिजिटल जर्नलिस्ट और कंटेंट क्रिएटर हैं, जो न्यूज़ और करंट अफेयर्स की रिपोर्टिंग में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 2 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने राजनीति, सामाजिक मुद्दे, प्रशासन, क्राइम, धर्म, फैक्ट चेक और रिसर्च बेस्ड स्टोरीज़ पर लगातार काम किया है। मुस्कान ने जमीनी रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रभावशाली कंटेंट तैयार किया है। उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों की कवरेज की है और जनता की राय को प्राथमिकता देते हुए रिपोर्टिंग की है। वर्तमान में वह डिजिटल मीडिया के लिए न्यूज़ स्टोरीज़, वीडियो स्क्रिप्ट्स और विश्लेषणात्मक कंटेंट पर काम कर रही हैं। इसके साथ ही वे इंटरव्यू, फील्ड रिपोर्टिंग और सोशल मीडिया जर्नलिज़्म में भी दक्ष हैं। मुस्कान का फोकस तथ्यात्मक, प्रभावशाली और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाने पर रहता है।
- Advertisement -
- Advertisement -

Latest article