नितिन नबीन: विश्व की सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने अपना सबसे युवा कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन को नियुक्त किया है। वे बिहार सरकार में पथ निर्माण मंत्री हैं।
इस फैसले के साथ ही वे पार्टी के सबसे युवा अध्यक्षीय पदों में शामिल हो गए हैं। भाजपा नेतृत्व के इस कदम ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है,
क्योंकि नितिन नवीन कम उम्र में संगठन और सत्ता दोनों में मजबूत पकड़ रखने वाले नेता माने जाते हैं। हैरानी की बात ये है कि बीजेपी भी 45 साल की हो रही और नितिन भी।
नितिन नबीन: 2005 में पिता का आकस्मिक निधन
राजनीति नितिन नवीन को विरासत में मिली, लेकिन इस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें कम उम्र में ही बड़ी जिम्मेदारियां संभालनी पड़ीं।
उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा बिहार भाजपा के बड़े नेताओं में गिने जाते थे और जेपी आंदोलन से निकले हुए नेता थे।
वर्ष 2005 में पिता के आकस्मिक निधन के समय नितिन की उम्र केवल 26 साल थी। यह उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला किया।
एक भी चुनाव नहीं हारे
नितिन ने पिता के निधन के बाद पटना पश्चिम विधानसभा सीट से 2006 उन्होंने उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल कर पहली बार विधानसभा पहुंचे।
इसके बाद 2008 के परिसीमन में इस सीट का नाम बांकीपुर हो गया। वर्ष 2010 से लेकर अब तक हुए सभी विधानसभा चुनावों में नितिन नवीन लगातार जीत दर्ज करते आए हैं।
यही नहीं हर चुनाव में उनका वोट मार्जिन लगातार बढ़ता गया।
छत्तीसगढ़ का बनाया प्रभारी
संगठन के स्तर पर भी नितिन नवीन का अनुभव व्यापक रहा है। वे छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे और बाद में भाजपा की युवा इकाई भाजयुमो के बिहार अध्यक्ष बने।
अनुराग ठाकुर के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए वे भाजयुमो के राष्ट्रीय महासचिव भी रहे। यही नहीं बीजेपी ने उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाकार बहुत बड़ी राजनीति जिम्मेदारी सौंपी।
परिणाम स्वरूप उन्होंने बीजेपी को बहुत बड़ी और निर्णायक जीत दिलाई। साफ-सुथरी छवि, मजबूत संगठन क्षमता और चुनावी सफलता के चलते ही भाजपा ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
बता दें कि जेपी नड्डा को भी पहले कार्यकारणी अध्यक्ष बनाया गया था उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष,
ऐसे में राजनीति गलियारे में ये हलचल तेज हो गई है कि नितिन नवीन को अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

