बांग्लादेश में एक और हिन्दू पर हमला: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
मामला सिलहट जिले के गोवाइनघाट उपजिला के बहोर गांव से सामने आया है, जहां एक हिंदू शिक्षक के घर को निशाना बनाकर आग के हवाले कर दिया गया।
पीड़ित शिक्षक बिरेंद्र कुमार डे, जिन्हें इलाके में ‘झुनू सर’ के नाम से जाना जाता है, वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सेवा दे रहे हैं। देर रात कट्टरपंथी भीड़ ने उनके घर पर हमला किया और आग लगा दी।
गनीमत रही कि घर में मौजूद परिवार के सदस्य समय रहते बाहर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन घर और संपत्ति को भारी नुकसान हुआ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला हमला नहीं है इससे पहले भी उनके घर को निशाना बनाया जा चुका है।
बार-बार हो रही इन घटनाओं ने पूरे इलाके के हिंदू परिवारों को दहशत में डाल दिया है।
नरसिंगदी में खून से सनी सड़कें
सिर्फ घरों को जलाना ही नहीं बल्कि लोगों की खुलेआम हत्याएं भी की जा रही हैं।
नरसिंगदी जिले के पलाश उपजिला के चर्सिंदुर बाजार में 40 वर्षीय हिंदू किराना दुकानदार मोनी चक्रवर्ती की धारदार हथियार से गोदकर हत्या कर दी गई।
मोनी रोज की तरह दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी मज़हबियों ने उन पर ताबड़तोड़ वार किए। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने जांच शुरू करने की बात कही है, लेकिन अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इस हत्या ने स्थानीय हिंदू समुदाय में भय और आक्रोश दोनों को जन्म दिया है।
एक ही दिन में दो हिन्दुओं की हत्याएं
हैरानी की बात यह है कि मोनी चक्रवर्ती की हत्या उसी दिन हुई, जब जेसोर जिले में हिंदू कारोबारी और एक अखबार के कार्यकारी संपादक राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
कुछ ही घंटों के भीतर दो अलग-अलग जिलों में हिंदुओं की हत्या ने यह साफ कर दिया कि ये घटनाएं संयोग नहीं हैं।
व्यापारी, शिक्षक, दुकानदार हर वर्ग के हिंदू निशाने पर हैं। इससे यह संदेश जा रहा है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक होना अब जानलेवा साबित हो सकता है।
मानवाधिकार संगठनों की चौंकाने वाली रिपोर्ट
बांग्लादेश में एक और हिन्दू पर हमला: ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज (HRCBM) की जनवरी 2026 की रिपोर्ट ने हालात की भयावह तस्वीर पेश की है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच बांग्लादेश में लगभग 116 अल्पसंख्यकों की हत्या हुई है। इनमें बहुसंख्यक हिंदू हैं, जबकि कुछ बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोग भी शामिल हैं।
वहीं जनवरी 2026 के केवल 16 दिनों में ही कम से कम 8 हिंदुओं की हत्या की पुष्टि हो चुकी है। ये हत्याएं देश के सभी 8 डिवीजनों और कम से कम 45 जिलों में दर्ज की गई हैं।
रिपोर्ट्स बताती है कि इनमें मॉब लिंचिंग, टारगेट किलिंग, हिरासत में मौत और ईशनिंदा जैसे झूठे आरोपों के बाद की गई हत्याएं शामिल हैं।
यह कोई छिटपुट हिंसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और देशव्यापी पैटर्न है।
प्रशासन की चुप्पी बन रही मज़हबियों की हिम्मत
बांग्लादेश में एक और हिन्दू पर हमला: सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ज्यादातर मामलों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका सवालों के घेरे में है।
एफआईआर दर्ज करने में देरी, कमजोर जांच, पीड़ित परिवारों को डराया जाना और आरोपियों की गिरफ्तारी न होना ये सब अपराधियों के हौसले बढ़ा रहे हैं।
स्थानीय हिंदू परिवारों का कहना है कि उन्हें न तो सुरक्षा का भरोसा है और न ही न्याय की उम्मीद। कई लोग पलायन पर मजबूर होने की बात कह रहे हैं।
सत्ता परिवर्तन के बाद हालात बदतर
जब से शेख हसीना ने देश छोड़ा है और डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार आई है, तब से हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में तेजी आई है।
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि सरकार इन हत्याओं के धार्मिक और सांप्रदायिक पहलुओं को नजरअंदाज कर रही है।
HRCBM ने साफ कहा है कि यह हिंसा आकस्मिक नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था के लगातार पतन का नतीजा है।
मानवाधिकार संगठन ने दी चेतावनी
बांग्लादेश में बिगड़ते हालात पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। मानवाधिकार संगठन चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह हिंसा नहीं रुकी,
तो इससे न केवल अल्पसंख्यकों का अस्तित्व खतरे में पड़ेगा, बल्कि बांग्लादेश की सामाजिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय छवि को भी गंभीर नुकसान होगा।
जलते घर, बहती लाशें और खामोश प्रशासन बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति आज इसी त्रासदी की कहानी कह रही है।
सवाल यह नहीं है कि घटनाएं हो रही हैं, सवाल यह है कि इन्हें रोका क्यों नहीं जा रहा?
जब तक दोषियों को सजा और पीड़ितों को सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा और हर नई घटना मानवता के चेहरे पर एक और दाग छोड़ती रहेगी।

